उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में भाजपा सांसद शंकर त्रिपाठी ने एक मीटिंग के दौरान अपनी ही पार्टी के विधायक राकेश बघेल पर जूतों की बारिश की थी. शिलापट पर अपना नाम लिखाने को लेकर दोनों नेता आपस में भिड़ गए थे. इसके बाद भाजपा सांसद त्रिपाठी ने सबके सामने सात-आठ बार राकेश बघेल को जूतों से पीटा. मीटिंग के दौरान तमाम अधिकारी विधायक और सांसद मौजूद थे. घटना को सभी ने देखा लेकिन उत्तर प्रदेश की पुलिस ने 'अज्ञात' लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके मामले की लीपापोती कर दी है. इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैयद नफीसउल हसन की तरफ से आईपीसी की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 427 सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 और दंडविधि (संशोधन) अधिनियम, 2013 के तहत मामला दर्ज कराया गया है.
अपनी शिकायत में सैयद नफीसउल हसन ने लिखा, '6 मार्च को जनपद के प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जिला नियोजन समिति की बैठक हो रही थी. बैठक में चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी और मेंहदावल से बीजेपी विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच किसी बात को लेकर 'हाथापाई' हो गई और बैठक का माहौल अशांत हो गया. बैठक कक्ष से सभी लोग बाहर आ गए और कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा करने लगे. इस बीच उत्तेजित भीड़ में से कुछ अज्ञात लोगों ने कलेक्ट्रेट भवन के मुख्य द्वार से अंदर घुसकर वहां रखे कुछ गमलों और दरवाजे के शीशों को तोड़ डाला. इसमें राजकीय संपत्ति को क्षति हुई. इसलिए अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए.'
उधर भाजपा हाईकमान ने इसे अनुशासनहीनता का मामला बताते हुए नेताओं को फटकार लगाई और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.
सवाल ये है कि जिला योजना समिति की इस मीटिंग में राज्य सरकार के मंत्री, जिलाधिकारी, सांसद, विधायकों समेत कई अन्य अधिकारी भी शामिल थे. इस प्रकरण में न तो वीडियो से छेड़छाड़ का डिफेंस है, न ही विपक्षी नेताओं का साजिश का आरोप और न ही किसी पक्ष ने इस घटनाक्रम से इंकार किया है, तो फिर दोषी लोगों के विरुद्ध नामजद एफआईआर क्यों नहीं होती?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैयद नफीसउल हसन की तरफ से आईपीसी की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 427 सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 और दंडविधि (संशोधन) अधिनियम, 2013 के तहत मामला दर्ज कराया गया है.
अपनी शिकायत में सैयद नफीसउल हसन ने लिखा, '6 मार्च को जनपद के प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जिला नियोजन समिति की बैठक हो रही थी. बैठक में चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी और मेंहदावल से बीजेपी विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच किसी बात को लेकर 'हाथापाई' हो गई और बैठक का माहौल अशांत हो गया. बैठक कक्ष से सभी लोग बाहर आ गए और कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा करने लगे. इस बीच उत्तेजित भीड़ में से कुछ अज्ञात लोगों ने कलेक्ट्रेट भवन के मुख्य द्वार से अंदर घुसकर वहां रखे कुछ गमलों और दरवाजे के शीशों को तोड़ डाला. इसमें राजकीय संपत्ति को क्षति हुई. इसलिए अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए.'
उधर भाजपा हाईकमान ने इसे अनुशासनहीनता का मामला बताते हुए नेताओं को फटकार लगाई और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.
सवाल ये है कि जिला योजना समिति की इस मीटिंग में राज्य सरकार के मंत्री, जिलाधिकारी, सांसद, विधायकों समेत कई अन्य अधिकारी भी शामिल थे. इस प्रकरण में न तो वीडियो से छेड़छाड़ का डिफेंस है, न ही विपक्षी नेताओं का साजिश का आरोप और न ही किसी पक्ष ने इस घटनाक्रम से इंकार किया है, तो फिर दोषी लोगों के विरुद्ध नामजद एफआईआर क्यों नहीं होती?