पटना. बिहार में मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या का एक मामला सामने आया है. बिहार के सीतामढ़ी में तीन हफ्ते पहले हुई हिंसा में एक बुज़ुर्ग को ज़िंदा जला दिया गया. इस घटना के बाद पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. न तो इस मामले में कोई अब तक गिरफ्तार हुआ है और न ही परिवार को पुलिस पर भरोसा है.

प्रशासन पर अपराधियों को बचाने का भी आरोप लग रहा है. बताया जा रहा है कि पिछले महीने हिंसा के दौरान उन्मादी भीड़ ने पहले जैनुल अंसारी का गला रेता और उसके बाद चौक पर जिंदा जला दिया. परिवार को इस घटना का पता तीन दिन बाद चला.
दरअसल, सीतामढ़ी में बीते 20 अक्टूबर को दुर्गा पूजा के मौके पर दो पक्षों में हिंसक झड़प हो गई. बताया जा रहा है कि एक इलाके में लोगों दुर्गा पूजा मना रहे थे और वहीं से दूसरे पक्ष के लोग जुलूज निकालने लगे. जिसको लेकर दोनों पक्षों में हिंसक झड़प हो गई. स्थानीय पुलिस के मुताबिक, जुलूस को इस इलाके से न निकालने की पहले ही चेतावनी जारी कर दी गई थी. लेकिन फिर भी इलाके से जुलूस निकाला गया. नतीजतन दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी.
हिंसा के दौरान सीतामढ़ी में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी, लेकिन हत्या के तीन दिन बाद जब एक घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बहाल की गई तब जैनुल अंसारी के परिजनों को एक वायरल फोटो मिला, जो उनकी हत्या का था. कहा यह भी जा रहा है कि प्रशासन के दबाव की वजह से जैनुल अंसारी के परिजनों को उनका शव पैतृक गांव से 75 किलोमीटर दूर मुज़फ़्फ़रपुर में दफ़नाना पड़ा.
दूसरी तरफ, इस पूरे मामले में सरकार ने परिजनों को पांच लाख की सहायता राशि दी है, लेकिन पुलिस अभी तक किसी अपराधी को गिरफ़्तार नहीं कर पाई है. इस घटना के बाद से बिहार में कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'सुशासन' के तमाम दावों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है.

प्रशासन पर अपराधियों को बचाने का भी आरोप लग रहा है. बताया जा रहा है कि पिछले महीने हिंसा के दौरान उन्मादी भीड़ ने पहले जैनुल अंसारी का गला रेता और उसके बाद चौक पर जिंदा जला दिया. परिवार को इस घटना का पता तीन दिन बाद चला.
दरअसल, सीतामढ़ी में बीते 20 अक्टूबर को दुर्गा पूजा के मौके पर दो पक्षों में हिंसक झड़प हो गई. बताया जा रहा है कि एक इलाके में लोगों दुर्गा पूजा मना रहे थे और वहीं से दूसरे पक्ष के लोग जुलूज निकालने लगे. जिसको लेकर दोनों पक्षों में हिंसक झड़प हो गई. स्थानीय पुलिस के मुताबिक, जुलूस को इस इलाके से न निकालने की पहले ही चेतावनी जारी कर दी गई थी. लेकिन फिर भी इलाके से जुलूस निकाला गया. नतीजतन दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी.
हिंसा के दौरान सीतामढ़ी में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी, लेकिन हत्या के तीन दिन बाद जब एक घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बहाल की गई तब जैनुल अंसारी के परिजनों को एक वायरल फोटो मिला, जो उनकी हत्या का था. कहा यह भी जा रहा है कि प्रशासन के दबाव की वजह से जैनुल अंसारी के परिजनों को उनका शव पैतृक गांव से 75 किलोमीटर दूर मुज़फ़्फ़रपुर में दफ़नाना पड़ा.
दूसरी तरफ, इस पूरे मामले में सरकार ने परिजनों को पांच लाख की सहायता राशि दी है, लेकिन पुलिस अभी तक किसी अपराधी को गिरफ़्तार नहीं कर पाई है. इस घटना के बाद से बिहार में कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'सुशासन' के तमाम दावों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है.