रविवार के दिन: देशभर के सफाई कर्मचारियों के हालात बयां करती ये डॉक्यूमेण्ट्री
रविवार के दिन: देशभर के सफाई कर्मचारियों के हालात बयां करती ये डॉक्यूमेण्ट्रीजरूर देखें और दिखाएं।
पुणे महानगरपालिका सफाई कर्मचारी यूनियन के सहयोग से अतुल पेठे द्वारा ये डॉक्यूमेंट्री बनायी गई है।
भाषा मराठी है पर सबटाइटल (उपशीर्षक) हिन्दी में दिये हैं जिससे इसे समझने में आपको कोई परेशानी नहीं होगी।
ये डॉक्यूमेण्ट्री दिखाती है कि *विज्ञान व तकनीक के इस आधुनिक दौर में भी एक इंसान को दूसरे इंसान की गन्दगी में उतरना पड़ रहा है, मशीनें होने के बावजुद सफाई कर्मचारी गट्टर की गन्दगी में दम तोड़ रहा है। और इतना सब कुछ होने के बावजुद भी मध्यमवर्गीय अय्याशखोरों को सफाई कर्मचारी ही कामचोर नजर आते हैं।*
साथ ही ये छोटा सा लेख भी पढ़ें जो सफाई कर्मचारियों के बदतर हालात को दिखाता है -
*हर साल गटर में दम तोड़ देते हैं 22 हजार से ज्यादा सफाई कर्मचारी! आखिर क्यों?*
आपकी गंदगी साफ करने वाले आपके ही जैसे इंसानों की जान कितनी सस्ती है ! हर साल तकरीबन 22 हज़ार लोग इन गटरों में अपनी जान गंवा देते हैं। सीवर या गटर का नाम आते ही आप नाक सिकोड़ लेते होंगे। लेकिन हर साल हज़ारों लोग जाम सीवर की मरम्मत करने के दौरान दम घुटने से मारे जाते हैं। हर मौत का कारण ये वही गटर है जिसके आस पास से आप गुज़रना भी पसंद नहीं करते। सरकार और सफाई कर्मचारी आयोग सिर पर मैला ढोने की अमानवीय प्रथा पर रोक लगाने की बात करते हैं। लेकिन इन खौफनाक तस्वीरों को देखने के बाद आप समझ जाएंगे की कैसे जहरीले कचरे में उतरकर ये सफाई करने पर मजबूर हैं। सीवर की गंदगी से उन्हें लाइलाज बिमारियां हो जाती है जो आखिर में उन्हें मौत के मुंह में ले जाती है। तहलका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल सीवर में काम करते समय 22,327 लोगों की मौत हो जाती है। सिर्फ मुंबई में हर महीने 20 से ज्यादा सीवर साफ करने वालों की मौत होती है। शरीर पर बस सरसों का तेल इन सफाई कर्मचारियों को बिना किसी तकनीक या यंत्र के गटर में शरीर पर सरसों का तेल लगाकर गटर में सफाई करने उतारा जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि समय बीते के साथ-साथ वे कई तरह की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सीवर की सफाई के लिए केवल मशीनों का ही उपयोग किया जाना। सफाई के लिए कर्मचारियों का सीवर में उतरना पूर्णरूप से प्रतिबंधित है। वर्ष 2000 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी सीवरों की सफाई करने वाले कर्मचारियों को सीवर सुरक्षा उपकरण देने के लिए दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिए थे। लेकिन कहीं भी सफाई कर्मचारियों को ये सुविधाएं नहीं दी जाती।
सफाई कर्मचारियों की बदहाली :
देश भर में 27 लाख सफाई कर्मचारी। जिसमें 7,70000 सरकारी सफाई कर्मचारी और 20 लाख सफाई कर्मचारी ठेके पर काम करते हैं। औसतन सफाईकर्मी की कमाई 3 से 5 हजार रुपये महीने । 20 लाख लोग सीवर और गटर साफ करने में लगे हैं। 90 फीसदी गटर-सीवर साफ करने वालों की मौत 60 बरस से पहले। 60 फीसदी सफाईकर्मी कॉलरा, अस्थमा, मलेरिया और कैंसर से पीड़ित। 8 सफाई कर्मचारियों की मौत हर घंटे होती है। हेल्थ और इंश्योरेंस की कोई सुविधा नहीं। 13 लाख कर्मचारी मल-मूत्र साफ करने वाले।