संस्कृति

December 4, 2017
नई दिल्ली। अयोध्या का शाब्दिक अर्थ समझा जाए तो यह (अ-युद्धा) होता है, जिसका मतलब है कि वह स्थान जिसे युद्ध से नहीं जीता जा सकता। लेकिन बड़ी विडम्बना है कि अयोध्या विवाद का नाम लेते ही 'अलगाव' की राजनीति और खून खराबे का मंजर आंखों के सामने कौंधने लगता है। 25 साल से अयोध्या को लेकर बांटने वाली राजनीति होती आ रही है।  सियासी फायदे के लिए की जा रही इस राजनीति से इतर देखा जाए तो...
November 27, 2017
ट्रेन इलाहाबाद पहुंची। यमुना के पुल से जब गुजरने लगी तो लोग नदी में सिक्के उछालने लगे। इस तरह से लोगों को पानी में पैसे फेंकते हुए देखकर मुझे जरा भी यकीन नहीं हुआ कि मैं उसी प्रदेश में हूँ जहां एक हॉस्पिटल में सैकड़ों बच्चे  ऑक्सीजन की कमी से महज इसलिए मर गए कि ऑक्सीजन सिलेंडर वाले का पेमेंट नहीं हुआ और उसनें सप्लाई रोक दी। मैं उनके सिक्के फेंकने से किंकर्तव्यविमूढ़ था कि गर्व से फूल जाऊँ या...
November 18, 2017
फ़िल्म ‘पद्मावती’ को लेकर मचे बवाल के तमाम रोचक आयाम हैं। क्या रानी पद्मावती वास्तव में कोई ऐतिहासिक पात्र है? क्या उन्हें महिमामंडित किया गया? फ़िल्मकारों को ‘ऐतिहासिक पात्रों’ पर आधारित फ़िल्म बनाने के लिए किस सीमा तक जाने की छूट मिलनी चाहिए? कलाकारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी की लक्ष्मण-रेखा कैसे तय हो? क्या महज ‘डिस्क्लेमर’ की आड़ में ऐतिहासिक और सामाजिक...
September 20, 2017
भारत में फासीवाद के दो प्रमुख स्रोत माने जाते हंै: कारपोरेट वित्तीय पूंजी और हिन्दुत्व। हिन्दू धर्म और हिन्दुत्व में बुनियादी फ़र्क है। यह फ़र्क समझना फासीवाद विरोधी संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है। हिन्दू धर्म हिन्दू शास्त्रों पर आधारित है। वहीं हिन्दुत्व विनायक दामोदर सावरकर, माधव सदाशिव गोलवलकर और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचार पर आधारित है। हिन्दू धर्म पुरातन है, हिन्दुत्व...
September 20, 2017
हिंदू संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि वो नवरात्र के दौरान मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवाए और इलाके की मांस और अंडे की दुकानों को बंद करवाए। राजधानी दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में इन संगठनों ने ऐसी मांग की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेटर नोएडा के दो मंदिर के महंतों ने भी नवरात्र को दौरान इन दुकानों को बंद करवाने की प्रशासन मांग की है। गौरक्षा हिन्दू दल के पदाधिकारियों ने प्रशासन को...
September 14, 2017
आज हिन्दी दिवस है। अपनी चेतना को अभिव्यक्त करने व अपने विचारों से दूसरों को अवगत कराने तथा दूसरे की राय व भावनाओं को जानने का माध्यम है भाषा। संप्रेषण व विचार-विनिमय का सशक्त सेतु है भाषा। कहते हैं, भाषा का मनुष्य के साथ वही संबंध है, जो माँ का अपने बच्चों के साथ। मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान, इयत्ता व निधि उसकी भाषा होती है। भाषा मेरे लिए महज अभिव्यक्ति का ज़रिया नहीं है, यह उससे बहुत ऊपर की चीज़...
August 20, 2017
सिनेमा जगत और गाँव देहात का अनोखा प्रयोग : श्रीराम डाल्टन की डायरी 25th जुलाई 2017 को जब हम Netarhat  के लिए रवाना हुए तो  50 किलोमीटर पहले से ही घाटी में घनघोर कोहरे  ने हमारा स्वागत किया। एक तरफ़ पहाड़ तो दूसरी  तरफ़ खाई और दो क़दम की दूरी पर भी कुछ नहीं दिख रहा था। पर, हम धीरे-धीरे चलते रहे। और जब हम Netarhat पहुँचे तो देखा घनघोर बारिश हो रही थी।...
August 4, 2017
आजकल जब समाचार देखते हैं तो विश्वास ही नहीं होता कि ये इक्कीसवीं सदी के भारत में हो रही घटनाओं का समाचार है! आजकल राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कोने कोने में अफवाह फैल गई कि कोई अनजान साया, प्रेतात्मा, डायन या दैविक शक्ति, सोती हुई औरतों की चोटियाँ काट रही हैं, कहीं कहीं तो ये अफवाह भी फैल रही है, कि जिनकी चोटी काटी जा रही है उनकी मृत्यु भी हो जाती है. हद तो ये है कि उत्तर प्रदेश के गाँव में...
August 4, 2017
लिंच काल...यह लिंच काल है, लिंच काल की शुरुआत भारत में 2013 के शुरुआती दिनों में हुई...धर्मवीर भारती के कालजयी काव्य नाटक 'अंधा युग' की स्थापना के शब्दों में माफ़ी के साथ व्यंग्यपूर्ण खिलवाड़ करते हुए कहें, तो  जिस युग का वर्णन इस कृति में है उसके विषय में किसी पुराण में कहा है : ततश्चानुदिनमल्पाल्प ह्रास व्यवच्छेददाद्धर्मार्थयोर्जगतस्संक्षयो भविष्यति।’ उस भविष्य...
August 1, 2017
क्या ये प्रेमचंद हमारे जमाने की जरूरत नहीं हैं? वैसे, हमारे वक्त में प्रेमचंद का क्या काम? जाहिर है, ऐसा लग सकता है।  प्रेमचंद का इंतकाल 1936 में यानी आज से 81 साल पहले हुआ था। जो भी लिखा 81 साल पहले ही लिखा। उस वक्त देश गुलाम था। अंग्रेजों का राज था। आजादी की लड़ाई तरह-तरह से लड़ी जा रही थी। आँखों में नया भारत बनाने का ख्वाब था। जाहिर है, उस वक्त की समाजी-सियासी जरूरत कुछ और ही रही...