ठेकेदार की लापरवाही से  गई  मजदूरों की जान, बिना सुरक्षा उपकरण नाले में उतरने से हुआ दर्दनाक हादसा

Written by sabrang india | Published on: April 18, 2026
हरियाणा के नूंह में बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतरे दो मजदूरों की जहरीली गैस से दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।


फोटो साभार : एचटी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर निवासी 30 वर्षीय अब्दुल कलाम को मंगलवार देर रात एक ऐसा काम सौंपा गया, जो उनकी रोजमर्रा के काम से अलग था। उनके ठेकेदार तौफीक ने उन्हें हरियाणा के नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका स्थित व्यस्त अंबेडकर चौक पर एक सीवर साफ करने के लिए कहा। कलाम मूलतः सीवर लाइन बिछाने का काम करते थे, न कि सफाई का। उनके 55 वर्षीय पिता जमशेद, जो पेशे से किसान हैं, बताते हैं कि बिना ज्यादा विचार किए उनका बेटा बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उस गहरे सीवर में उतर गया।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, इससे कुछ ही मिनट पहले उनके दोस्त और 27 वर्षीय सफाईकर्मी राजेंद्र कुमार भी कथित तौर पर ठेकेदार के निर्देश पर ही उस 25 फुट गहरे नाले की सफाई के लिए उतरे थे। जब काफी देर तक राजेंद्र बाहर नहीं आए, तो अब्दुल उन्हें बचाने और बाहर निकालने की कोशिश में उस सीवर के अंदर चले गए।

दुर्भाग्यवश, दोनों में से कोई भी जीवित वापस नहीं लौट सका। जहरीली गैसों की चपेट में आकर वे वहीं बेहोश हो गए और जब तक मदद पहुंची, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

इस दर्दनाक हादसे में 28 वर्षीय मोहम्मद अरबाज नामक एक तीसरा मजदूर भी रस्सी के सहारे सीवर में उतरा था। वह किसी तरह खुद को बचाते हुए बाहर निकलने में सफल रहा। पुलिस के अनुसार, अस्पताल में उपचार के बाद उसे गुरुवार को छुट्टी दे दी गई।

अब्दुल के पिता जमशेद के अनुसार, उनका बेटा ईद के बाद करीब एक महीने पहले ही नूंह लौटा था। वह अपने पीछे सहारनपुर में पत्नी, छह महीने की बेटी और दो साल का बेटा छोड़ गया है। सात बहनों के परिवार में अब्दुल इकलौता भाई था।

मृतकों के परिवारों की शिकायत के आधार पर बुधवार दोपहर सिटी फिरोजपुर झिरका थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 (लापरवाही से मौत) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह एफआईआर ठेकेदार, संबंधित कनिष्ठ अभियंता (जेई) और उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) के खिलाफ दर्ज हुई है। पुलिस के अनुसार, ठेकेदार फिलहाल फरार है और इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है।

हरियाणा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर दिया गया है और गुरुवार को उप-मंडल अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिकायतें मिलने के बाद करीब चार महीने पहले ठेकेदार को सीवर से गाद निकालने का टेंडर दिया गया था। सरकारी नीति के अनुसार ठेकेदार को मृतकों के परिवारों को मुआवजा देना होगा और इस गंभीर लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर सुरक्षा उपकरणों की कमी की पुष्टि की है। फिरोजपुर झिरका के उप-मंडल अधिकारी लक्ष्मी नारायण, सब-इंस्पेक्टर शिव प्रकाश और पीएचईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद नहीं थी। लक्ष्मी नारायण ने बताया कि वह घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे थे और मजदूरों के पास कोई सुरक्षा गियर नहीं था, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

सहायक उप-निरीक्षक कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए काम करवाया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर जयंती के राज्यव्यापी अवकाश के दिन मजदूरों से काम नहीं कराया जाना चाहिए था, वह भी बिना जरूरी सुरक्षा उपकरणों के। पुलिस ने आरोपियों को जांच में शामिल होने के लिए आधिकारिक नोटिस जारी कर दिए हैं।

गुरुवार को जब घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, तो पाया गया कि स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा के मद्देनज़र खुले नाले को मोटे लकड़ी के लट्ठों से ढक दिया था।

घटनास्थल के पास गन्ने के रस की दुकान चलाने वाले 35 वर्षीय यासीन खान ने बताया। उनके अनुसार, जब पहला मजदूर काफी देर तक बाहर नहीं निकला, तो दूसरा मजदूर बिना किसी रस्सी या सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतर गया। कुछ ही देर में उसके चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। इसके बाद लोगों ने एक रस्सी की व्यवस्था की और तीसरे मजदूर ने अंदर जाकर अब्दुल को बाहर निकाला। यासीन का कहना है कि यह मामला ठेकेदार की ओर से बरती गई गंभीर लापरवाही का उदाहरण है।

नाले के बगल में दुकान चलाने वाले 20 वर्षीय मोहम्मद समीर ने भी इस बात पर जोर दिया कि उन बेबस मजदूरों के पास कोई सेफ्टी मास्क, रस्सी या अन्य जरूरी गियर नहीं था।

बचाव कार्य के लिए आखिरकार एक अर्थमूवर (जेसीबी) मशीन भी मौके पर मंगाई गई। चौराहे के पास स्थित पुलिस चौकी पर तैनात होमगार्ड मुकेश कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही वे तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए थे और मशीन भी बुलवा ली गई थी, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

अब्दुल कलाम के परिवार के लिए यह गहरा दुख अब आक्रोश में बदल गया है। बुधवार को अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने वाले जमशेद ने भावुक स्वर में कहा कि ठेकेदार एक बार भी उनसे या परिवार से मिलने नहीं आया। उन्होंने कहा कि अब उनकी एक ही मांग है-न्याय, क्योंकि उन्हें कलाम के पीछे छूटे छोटे बच्चों के भविष्य की भी चिंता है।

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