वर्धा: महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान पुलिस निगरानी में 20 से ज्यादा छात्र रहे नजरबंद

Written by sabrang india | Published on: April 17, 2026
र्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे के दौरान 20 से अधिक छात्रों को उनके हॉस्टल कमरों तक सीमित रखा गया। पुलिस ने इसे सुरक्षा के लिहाज़ से उठाया गया कदम बताया, जबकि छात्रों ने इस कार्रवाई को बेबुनियाद बताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें बिना ठोस कारण रोका गया और सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय से जुड़ी कोई भी पोस्ट करने से मना किया गया।


फोटो साभार: X/@rashtrapatibhvn

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में गुरुवार को हुए छठे दीक्षांत समारोह के दौरान 20 से अधिक छात्रों को उनके हॉस्टल कमरों तक सीमित रखा गया। छात्रों का कहना है कि वर्धा पुलिस ने ‘सुरक्षा’ का कारण बताते हुए उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया, जिसे वे ‘नजरबंदी’ जैसा कदम मानते हैं।

इस दीक्षांत समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुलामी की मानसिकता के बचे हुए प्रभावों को समाप्त कर भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करना चाहिए।

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के तीन हॉस्टलों—सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद—के कुल 22 छात्रों को रोकने के लिए एक सूची तैयार की गई थी। द वायर हिंदी से बातचीत में रामनगर थाने की पुलिस अधिकारी कंचन ने बताया कि यह सूची छात्रों के पुराने पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर बनाई गई थी। हालांकि, सूची में शामिल हिंदी साहित्य के छात्र गोविंद कुमार का कहना है कि उनका कोई पुलिस रिकॉर्ड नहीं है।

द वायर हिंदी से बातचीत में गोविंद ने कहा, “मेरा कोई पुलिस रिकॉर्ड नहीं है। मेरे खिलाफ इस विश्वविद्यालय में कोई शिकायत दर्ज नहीं है। मैंने कभी किसी से मारपीट या गाली-गलौज नहीं की। मैं किसी छात्र संगठन से भी नहीं जुड़ा हूं। फिर भी पता नहीं मुझे किस आधार पर नोटिस दिया गया।”

गोविंद के अनुसार, पुलिस का कहना था कि विश्वविद्यालय की राजनीतिक आवाजें कहीं विद्रोह का रूप न ले लें, इसलिए यह कदम उठाया गया। वहीं, जब उनके मामले पर रामनगर थाने की पुलिस अधिकारी कंचन से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार किया कि किसी भी छात्र को ऐसा कोई नोटिस दिया गया था।

सूची में शामिल धनंजय सिंह ने बताया, “मैं उस समय कैंपस में भी नहीं था, फिर भी मेरा नाम सूची में जोड़ दिया गया। मुझे लोकल इंटेलिजेंस यूनिट और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कॉल आ रहे थे। जूनियर्स ने यह भी बताया कि पुलिस ने रात में उन्हें हॉस्टल की छत पर सोने की अनुमति नहीं दी।”

द वायर हिंदी से बातचीत में कंचन ने कहा, “राष्ट्रपति आई थीं, इसलिए सुरक्षा के लिए नोटिस देना पड़ा। हालांकि, मैं वहीं मौजूद थी ताकि अगर उन्हें (छात्रों को) कोई इमरजेंसी हो तो बाहर जाने दिया जा सके।”

नोटिस में क्या था?

15 अप्रैल, 2026 की रात ही छात्रों को पुलिस स्टेशन रामनगर, जिला वर्धा की ओर से धारा 168 बीएनएसएस के तहत एक नोटिस दिया गया था।

नोटिस में उल्लेख किया गया है कि 16 अप्रैल को विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति की उपस्थिति को देखते हुए पुलिस को ‘गोपनीय और विश्वसनीय सूचना’ प्राप्त हुई है। इसके अनुसार, संबंधित व्यक्ति या उनके सहयोगियों द्वारा कार्यक्रम स्थल पर ‘आक्षेप, अनुचित कृत्य या व्यवधान’ उत्पन्न किए जाने की आशंका है।

नोटिस में छात्रों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी गैरकानूनी या व्यवधान पैदा करने वाली गतिविधि में शामिल न हों। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि उनके आचरण से कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इस नोटिस को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय का पक्ष जानने के लिए कुलसचिव कादर नवाज खान से संपर्क किया गया है। उनका जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से रोक

गोविंद सहित अन्य छात्रों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय से संबंधित कोई भी पोस्ट करने से रोका था। इस दौरान कुछ छात्रों ने अपने फेसबुक अकाउंट बंद किए जाने की बात भी कही है।

चंदन सरोज, राजेश कुमार यादव, रजनीश कुमार आंबेडकर और निरंजन ओबेरॉय के फेसबुक प्रोफाइल 15 अप्रैल से दिखाई नहीं दे रहे हैं। ये सभी छात्र विभिन्न मुद्दों पर कैंपस में सक्रिय रूप से आवाज उठाते रहे हैं।

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