लालच और कायरता की कहानी: रात के सन्नाटे में काटे गए आरे में पेड़!

Written by sabrang india | Published on: October 5, 2019
शुक्रवार को मुंबई के "ग्रीन लंग्स" के रूप में माने जाने वाले क्षेत्र आरे मिल्क कॉलोनी में पेड़ों को गिरा दिया गया। यह काम पूरी तरह से सत्ताधारी खेमे के आशीर्वाद के साथ किया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई मेट्रो परियोजना के लिए कार शेड के लिए रास्ता बनाने के लिए 2,700 से अधिक पेड़ों की कटाई के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को रद्द कर दिया था जिसके कुछ ही घंटों बाद यह कार्रवाई की गई। CJP सभी घटनाक्रमों को बारीकी से देख रहा है और यहाँ हम आरे के मुद्दे को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे आरे बचाओ आंदोलन जंगल की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।



विभिन्न व्यक्ति, नागरिक, पर्यावरणविद समूह, आदिवासी और वनवासी एक उदासीन राज्य प्रशासन के खिलाफ इस कठिन लड़ाई को लड़ रहे हैं। सभी को उम्मीद है कि सत्ताधारी मान जाएंगे लेकिन उनके लालच व अहंकार को तब और बढ़ावा मिल गया जब उन्हें उच्च न्यायालय से मंजूरी मिल गई। हालांकि, उन्होंने पेड़ों को काटने के ऑप्रेशन को अंधेरे की आड़ में अंजाम दिया जो कायरता का संकेत देता है। शायद उन्हें लगा कि वे अंधेरे का फायदा उठाकर सबकी नजरों से बच जाएंगे, लेकिन कई कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उन्हें कैमरे में कैद कर लिया। आप खुद ही देख लें...



रात के करीब 8 बजे थे, यहां पेड़ काटने के उपकरण लाए गए जिसकी जानकारी कुछ लोगों को हो गई। इसके बाद यहां करीब 200 की संख्या में लोग यहां पहुंच गए। अंधेरी रात में लगभग 80 की संख्या में पुलिसकर्मियों और बीएमसी अधिकारियों को लोगों की एक भीड़ को जबरदस्ती रोकने की कोशिश करते देखा गया। लेकिन लोगों को सांस लेने के लिए विकास नहीं, ऑक्सीजन चाहिए। उन लोगों को भी जो पेड़ों को जबरन काटने पर तुले हैं, इसलिए विरोध प्रदर्शन जारी रहा और दो बार पुलिस ने हिंसक लाठीचार्ज का सहारा लिया। प्रदर्शनकारी बिरसा मुंडा चौक पर इकट्ठा होते रहे। देर रात तक सीजेपी स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए थी, लेकिन अनैतिक तरीके से जल्दबाजी में पेड़ों की अवैध कटाई जारी रही। अपुष्ट रिपोर्टों का कहना है कि कुछ ही घंटों में 400 के करीब पेड़ गिर गए। सवाल यह है कि यह पाशविकता जल्दी क्यों?

अब सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरणविद, छात्र, नागरिक, महिलाएं आदि "चिपको" आंदोलन शुरू करने का विचार कर रहे हैं। इसके तहत लोग पेड़ को चारों तरफ से घेरकर खड़े हो जाएंगे ताकि उन्हें काटे जाने से बचा सकें।  





 

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