लिंचिंग पर पीएम मोदी को पत्र लिखने पर वर्धा यूनिवर्सिटी के छह छात्र सस्पेंड

Written by Sabrangindia Staff | Published on: October 12, 2019
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के 6 छात्रों को यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने पर निकाल दिया गया है। छात्रों ने यूनिवर्सिटी से प्रधानमंत्री को खत लिखने से संबंधित एक कार्यक्रम की इजाजत मांगी थी। प्रशासन ने परमीशन देने से इनकार कर दिया और छात्रों के कार्यक्रम को रोक दिया। इसके बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया था।



विश्वविद्यालय प्रशासन के 9 अक्टूबर को लिखे खत के मुताबिक, छात्रों को 'आचार संहिता’ और ‘प्रशासनिक काम में दखलंदाजी’ के चलते सस्पेंड किया गया है।

छात्र संगठन ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, छात्र प्रधानमंत्री को जो खत लिखना चाहते थे, उस में मॉब लिंचिंग, सरकारी कंपनियों की बिक्री, कश्मीर मुद्दे और रेप के आरोपी नेताओं के बचाव से संबंधित बातें थीं।

बुधवार को विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को खत लिखने के लिए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया। छात्र नेता चंदन सरोज के मुताबिक, यह कार्यक्रम 49 विख्यात व्यक्तियों के खिलाफ देशद्रोह के मामले पर प्रदर्शन करने के लिए किया गया था।

बता दें कि इन 49 व्यक्तियों ने प्रधानमंत्री को खुला खत लिखा था, जिसमें मॉब लिंचिंग पर चिंता जताई गई थी। हालांकि बुधवार को बिहार पुलिस ने राजद्रोह का मामला वापस ले लिया।

सरोज की रिलीज के मुताबिक, जब छात्रों ने प्रधानमंत्री को खत लिखने की कोशिश की, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की।

रिलीज में बताया गया, ‘'प्रशासन ने भारी मात्रा में सुरक्षा बढ़ा दी और छात्रों को 'गांधी हिल' में जाने से रोक दिया। इसके बाद छात्रों ने 'गांधी हिल' के गेट पर बैठकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और नारे लगाए।’'

विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने चंदन सरोज समेत 6 छात्रों को सस्पेंड कर दिया। जिन छात्रों को सस्पेंड किया गया, उनके नाम हैं नीरज कुमार, राजेश सारथी, रजनीश अंबेडकर, पंकज वेला और वैभव पिंपलकर।

लेकिन निष्कासन वाले लेटर में विश्वविद्यालय की तरफ से कार्यक्रम के बारे में कोई बात नहीं कही गई है। कारण में ‘आचार संहिता’ और ‘प्रशासनिक कार्य में बाधा’ पैदा करने की बात कही गई। इससे पहले प्रशासन ने कार्यक्रम लॉन्च करने की इजाजत देने से भी इनकार कर दिया था। इसके लिए सेंट्रल सिविल सर्विस कानूनों का हवाला दिया गया था।

लेकिन द क्विंट से बात करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सस्पेंशन के ग्राउंड पर बात करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनका जिक्र पिछले खतों में कर दिया गया था।

आइसा की प्रेस रिलीज के मुताबिक, छात्रों का ‘कथित अपराध’ प्रधानमंत्री को ‘देश के हालात पर चिट्ठी लिखना है’। रिलीज में यह बात भी बताई गई कि सस्पेंड किए गए सभी छात्र वंचित तबके से संबंधित हैं।

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