मोदी सरकार ने RBI से मांगे थे 3.6 लाख करोड़ रुपये, बैंक ने इंकार किया तो बढ़ा टकराव !

Published on: November 7, 2018
नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और केंद्र सरकार के बीच चल रहे टकराव में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं. इस टकराव की एक बड़ी वजह सामने आ रही है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार का एक प्रस्ताव आरबीआई के साथ टकराव की वजह बना. इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक की रिजर्व पूंजी में से सरप्लस के 3.6 लाख करोड़ रुपये मांगे थे. लेकिन आरबीआई ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मानने से इंकार करते हुए ठुकरा दिया. केंद्र सरकार और आरबीआई के टकराव की वजह सामने आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार के प्रस्ताव को ठुकराते हुए आरबीआई ने दलील दी थी कि बैंक का कुल सरप्लस 9.59 लाख करोड़ रुपये है. केंद्र सरकार इसकी एक तिहाई राशि मांग रही है अगर इस प्रस्ताव को मान लिया गया तो इससे देश की माइक्रो इकोनॉमी को खतरा हो सकता है. केंद्र ने सलाह दी थी कि सरकार और आरबीआई मिलकर सरप्लस को मैनेज करें.



इस मामले पर आरबीआई का कहना था कि अर्जेंटिना जैसी आर्थिक हालत में सरप्लस की रकम स्थिति को काबू रखने में मददगार होगी. आरबीआई के डिप्टी गवर्नर आचार्य विरल ने भी 26 अक्टूबर की अपनी स्पीच में इस मुद्दे का जिक्र किया था जिसके बाद सरकार और रिजर्व बैंक के बीच तकरार की बातों को बल मिला.

इस मामले पर वित्त मंत्रालय की दलील है कि सरप्लस ट्रांसफर से जुड़े वर्तमान सिस्टम को रिजर्व बैंक ने जुलाई 2017 में मंजूरी दी थी. रिजर्व बैंक ने यह मंजूरी एकतरफा दी थी क्योंकि इस बोर्ड में सरकार की तरफ से नामांकित दो सदस्य मीटिंग में मौजूद नहीं थे. आरबीआई द्वारा लागू की गई इस व्यवस्था से सरकार सहमत नहीं है इसलिए इस मामले पर बैंक से बात करना चाहती है. वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक के पास जमा राशि को जरुरत से ज्यादा बताया था औऱ कहा था कि बैंक के पास 3.6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी है. यह मुद्दा ही केंद्र सरकार औऱ रिजर्व बैंक के बीच टकराव का असली कारण बना.