अमेरिका में ‘नो किंग्स’ आंदोलन हुआ तेज, ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

Written by sabrang india | Published on: March 30, 2026
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अमेरिका में ‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। 50 राज्यों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। मिनेसोटा में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां पुलिस कार्रवाई में मारे गए नागरिकों को श्रद्धांजलि दी गई। प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई।


फोटो साभार: सोशल मीडिया एक्स

अमेरिका के कई शहरों में ‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। ये प्रदर्शन ईरान के खिलाफ शुरू की गई संयुक्त अमेरिका-इज़राइल सैन्य कार्रवाई के एक महीने बाद हुए।

अल जज़ीरा के अनुसार, शनिवार, 28 मार्च को आयोजित ये मार्च और रैलियां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ‘नो किंग्स’ आंदोलन का तीसरा प्रमुख चरण हैं। आयोजकों का कहना है कि देश के सभी 50 राज्यों में 3,300 से अधिक कार्यक्रमों की योजना बनाई गई थी। न्यूयॉर्क, लॉस एंजेलिस और वॉशिंगटन डीसी जैसे बड़े शहरों में बड़ी संख्या में लोग जुटे, वहीं रोम, पेरिस और बर्लिन जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में भी समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इस बार आंदोलन की रणनीति सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। आयोजकों ने खास तौर पर उन इलाकों पर ध्यान दिया, जिन्हें आमतौर पर रूढ़िवादी माना जाता है। उनका कहना है कि लगभग दो-तिहाई प्रतिभागियों ने बड़े शहरों से बाहर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

‘इंडिविज़िबल’ नामक प्रगतिशील संगठन की सह-संस्थापक लीआ ग्रीनबर्ग के अनुसार, इस बार की खास बात केवल यह नहीं है कि कितने लोग सड़कों पर उतरे, बल्कि यह भी है कि वे किन जगहों पर उतरे।

इस आंदोलन का मुख्य कार्यक्रम मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस–सेंट पॉल क्षेत्र, जिसे ‘ट्विन सिटीज़’ कहा जाता है, में आयोजित किया गया। यह क्षेत्र हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन की सख्त आप्रवासन नीतियों का प्रमुख केंद्र बना रहा है।

दिसंबर में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ के तहत यहां 3,000 से अधिक संघीय एजेंट तैनात किए गए थे। इन एजेंटों पर निर्वासन अभियान के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगे।

जनवरी में इसी अभियान के दौरान दो अमेरिकी नागरिक—एलेक्स प्रेट्टी और रेनी निकोल गुड—की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया और सुधार की मांग तेज हो गई। अभियान के खिलाफ दर्जनों मुकदमे दायर किए गए, जिसके बाद फरवरी में इसे समाप्त कर दिया गया।

द वायर के अनुसार, शनिवार के प्रदर्शन में इन दोनों की याद में श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में भाषण, संगीत प्रस्तुतियां और सामाजिक कार्यकर्ताओं, श्रमिक नेताओं तथा राजनेताओं की भागीदारी रही।

इस दौरान प्रगतिशील नेता बर्नी सैंडर्स ने लोगों को संबोधित किया। वहीं, प्रसिद्ध रॉक कलाकार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन और लोक गायिका जोन बाएज़ ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो ने रिकॉर्डेड संदेश के माध्यम से प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया।

उन्होंने कहा, “आपके साहस और प्रतिबद्धता ने हम सभी को प्रेरित किया है। आपने अहिंसक विरोध की ताकत को साबित किया है।”

वॉशिंगटन डीसी में भी प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल और वॉशिंगटन मॉन्यूमेंट के आसपास इकट्ठा होकर रैलियां कीं। लोगों ने तख्तियां उठाईं और ट्रंप प्रशासन के प्रतीकों के पुतले भी लहराए।

इससे पहले जून और अक्टूबर में हुए ‘नो किंग्स’ प्रदर्शनों में लाखों लोग शामिल हुए थे। अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक एआई-निर्मित वीडियो साझा किया था, जिसमें वे प्रदर्शनकारियों का मजाक उड़ाते नजर आए थे।

इसी बीच अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश में है, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी सीटों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही है।

प्रदर्शन के दौरान बर्नी सैंडर्स ने लोगों से चुनाव में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा, “हम इस देश को अधिनायकवाद या कुलीनतंत्र की ओर नहीं बढ़ने देंगे। अमेरिका में जनता ही सर्वोच्च है।”

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