नई दिल्ली। देश के पूर्व रक्षा मंत्री और समता पार्टी के संस्थापक जॉर्ज फर्नांडिस का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। मजदूरों और किसानों के मसीहा रहे फर्नांडिस ने इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जमकर मोर्चा खोला था। वह अपने कई साथियों के साथ जेल भी भेजे गए थे।

जॉर्ज फर्नांडिस के साथ तिहाड़ जेल में रहे विजय नारायण ने एक इंटरव्यू में इमरजेंसी के दिनों की कई यादें साझा की थीं। बतौर नारायण, "पुलिस हमारी तलाश कर रही थी लेकिन छिपने के बजाय हमने अपना काम करना जारी रखा। गिरफ्तारी से बचने के लिए जॉर्ज ने एक सिख का अवतार धारण कर लिया था और वह खुद को खुशवंत सिंह बुलाने लगे थे।"
फर्नांडिस और उनके साथियों को 10 जून 1976 को कोलकाता में गिरफ्तार कर लिया गया था। उनके ऊपर बड़ौदा डायनामाइट केस चला जिसमें सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया।
फर्नांडिस को 1973 में हुई रेलवे स्ट्राइक से प्रसिद्धि मिली थी। इमरजेंसी के वक्त वह चर्चित चेहरा बन चुके थे। कुछ दिनों तक अलग-अलग वेशभूषाओं में छिपने और इमरजेंसी के खिलाफ अभियान चलाने के बाद फर्नांडिस, नारायण और उनके बाकी साथियों को कोलकाता के सेंट पॉल चर्च से गिरफ्तार कर लिया गया था।
नारायण के मुताबिक, 'सेंट पॉल चर्च में जॉर्ज के पास एक टाइपराइटर, एक साइक्लोस्टाइल मशीन थी। वह पत्र लिखा करते थे और मैं उन्हें रेलवे मेल सर्विस काउंटर्स पर डिलीवर करने जाता था।' फर्नांडिस की एक तस्वीर इमरजेंसी की सबसे प्रभावशाली तस्वीर बन गई थी जिसमें वह हथकड़ियां पहने हाथ उठाए नजर आ रहे थे। यह तस्वीर तब ली गई थी जब जॉर्ज को ट्रायल के लिए कोर्ट ले जाया जा रहा था।
इमरजेंसी के दौरान आम नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले जॉर्ज फर्नांडिस के लिए भारत रत्न की मांग भी उठती रही। फर्नांडिस ने जेल में रहते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर से 1977 का लोकसभा चुनाव लड़ा। उन पर बड़ौदा डायनामाइट केस का ट्रायल चल रहा था। उनके समर्थकों ने उनकी तस्वीर के साथ कैंपेन किए और फर्नांडिस ने जीत दर्ज की। सत्ता में आने के बाद जनता पार्टी ने 1977 के मामले वापस ले लिए और सभी आरोपियों को रिहा कर दिया गया। बिहार से सांसद फर्नांडिस ने रेलमंत्री के पद पर भी अपनी सेवाएं दीं। वह अटल विहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री भी बने।

जॉर्ज फर्नांडिस के साथ तिहाड़ जेल में रहे विजय नारायण ने एक इंटरव्यू में इमरजेंसी के दिनों की कई यादें साझा की थीं। बतौर नारायण, "पुलिस हमारी तलाश कर रही थी लेकिन छिपने के बजाय हमने अपना काम करना जारी रखा। गिरफ्तारी से बचने के लिए जॉर्ज ने एक सिख का अवतार धारण कर लिया था और वह खुद को खुशवंत सिंह बुलाने लगे थे।"
फर्नांडिस और उनके साथियों को 10 जून 1976 को कोलकाता में गिरफ्तार कर लिया गया था। उनके ऊपर बड़ौदा डायनामाइट केस चला जिसमें सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया।
फर्नांडिस को 1973 में हुई रेलवे स्ट्राइक से प्रसिद्धि मिली थी। इमरजेंसी के वक्त वह चर्चित चेहरा बन चुके थे। कुछ दिनों तक अलग-अलग वेशभूषाओं में छिपने और इमरजेंसी के खिलाफ अभियान चलाने के बाद फर्नांडिस, नारायण और उनके बाकी साथियों को कोलकाता के सेंट पॉल चर्च से गिरफ्तार कर लिया गया था।
नारायण के मुताबिक, 'सेंट पॉल चर्च में जॉर्ज के पास एक टाइपराइटर, एक साइक्लोस्टाइल मशीन थी। वह पत्र लिखा करते थे और मैं उन्हें रेलवे मेल सर्विस काउंटर्स पर डिलीवर करने जाता था।' फर्नांडिस की एक तस्वीर इमरजेंसी की सबसे प्रभावशाली तस्वीर बन गई थी जिसमें वह हथकड़ियां पहने हाथ उठाए नजर आ रहे थे। यह तस्वीर तब ली गई थी जब जॉर्ज को ट्रायल के लिए कोर्ट ले जाया जा रहा था।
इमरजेंसी के दौरान आम नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले जॉर्ज फर्नांडिस के लिए भारत रत्न की मांग भी उठती रही। फर्नांडिस ने जेल में रहते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर से 1977 का लोकसभा चुनाव लड़ा। उन पर बड़ौदा डायनामाइट केस का ट्रायल चल रहा था। उनके समर्थकों ने उनकी तस्वीर के साथ कैंपेन किए और फर्नांडिस ने जीत दर्ज की। सत्ता में आने के बाद जनता पार्टी ने 1977 के मामले वापस ले लिए और सभी आरोपियों को रिहा कर दिया गया। बिहार से सांसद फर्नांडिस ने रेलमंत्री के पद पर भी अपनी सेवाएं दीं। वह अटल विहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री भी बने।