बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन, एहतियाती हिरासत, राजनीतिक असर और चार साल तक चली आपराधिक कार्यवाही के बाद तेलंगाना के विधायक टी. राजा सिंह को बरी कर दिया गया।

पैगंबर मोहम्मद के बारे में 2022 में की गई टिप्पणियों के मामले में तेलंगाना के विधायक टी. राजा सिंह का बरी होना, हाल के वर्षों में हेट स्पीच (नफरत फैलाने वाले भाषण) से जुड़े सबसे ज्यादा राजनीतिक और सांप्रदायिक रूप से विवादित मुकदमों में से एक मकदमे का अंत है। यह मामला कभी भी सिर्फ किसी व्यक्ति के विवादित बयानों तक सीमित नहीं था। यह मामला बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, राजनीतिक हस्तियों द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ बार-बार अपमानजनक टिप्पणियों पर देशव्यापी आक्रोश, हैदराबाद में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन, एक मौजूदा विधायक के खिलाफ प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) के इस्तेमाल और हेट स्पीच से जुड़े भारत के कानूनी ढांचे की नई सिरे से जांच-पड़ताल के माहौल में सामने आया था। हैदराबाद में सांसदों और विधायकों के लिए बनी स्पेशल कोर्ट ने यह कहते हुए सिंह को बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। हालांकि इस फैसले से इस खास मामले में आपराधिक कार्यवाही खत्म हो गई है, लेकिन इससे राजनीतिक हेट स्पीच, सांप्रदायिक लामबंदी, जन-प्रतिनिधियों की जवाबदेही और भारत के मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत दोषी ठहराने की चुनौतियों से जुड़े बड़े सवाल खत्म नहीं होते।

वह विवाद जिसने देशव्यापी गुस्सा पैदा किया
इस मामले की शुरुआत अगस्त 2022 में हुई, जब स्टैंड-अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूक़ी का हैदराबाद में शो होने वाला था। उस समय गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक रहे राजा सिंह ने इस कार्यक्रम का सार्वजनिक रूप से विरोध किया और फारूक़ी पर अपने कॉमेडी शो के दौरान हिंदू देवी-देवताओं का बार-बार अपमान करने का आरोप लगाया। कानून-व्यवस्था से जुड़ी संभावित समस्याओं को देखते हुए, हैदराबाद पुलिस ने 20 अगस्त 2022 को सिंह को प्रिवेंटिव हाउस अरेस्ट (एहतियाती नजरबंदी) में रखा, साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए कि फारूक़ी का शो शांतिपूर्ण ढंग से हो सके।
विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ी जा सकती है।
हालांकि, कुछ ही दिनों में विवाद तेजी से बढ़ गया। राजा सिंह ने फारूक़ी के शो के जवाब में अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया। वीडियो के दौरान, उन्होंने पैगंबर मोहम्मद के बारे में कई अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जिनमें ऐसी बातें भी शामिल थीं जिन्हें कई मुसलमानों ने बेहद आपत्तिजनक और ईशनिंदापूर्ण माना। यह वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल गया, जिससे धार्मिक संगठनों, नागरिक समाज समूहों और राजनीतिक नेताओं की ओर से तुरंत तीखी आलोचना हुई।
ये टिप्पणियां एक बेहद संवेदनशील समय पर की गई थीं। कुछ हफ्ते पहले ही, भारत ने एक राजनयिक संकट का सामना किया था, जब बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद के बारे में विवादित टिप्पणियों के कारण कई देशों में विरोध-प्रदर्शन हुए थे और खाड़ी तथा अन्य मुस्लिम-बहुल देशों की सरकारों ने तीखी आलोचना की थी। इस माहौल में, राजा सिंह के बयानों को एक और ऐसी घटना के तौर पर देखा गया जो पहले से ही नाज़ुक सांप्रदायिक रिश्तों को और बिगाड़ सकती थी।
हैदराबाद में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन
राजा सिंह के बयानों के खिलाफ लोगों का गुस्सा तेजी से और जोरदार तरीके से सामने आया। हैदराबाद के अलग-अलग हिस्सों, खासकर पुराने शहर में हजारों लोग जमा हुए और उनकी तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर सी.वी. आनंद के दफ्तर के बाहर बड़े प्रदर्शन हुए, जबकि शालीबांडा, मंगलहाट और चारमीनार समेत कई इलाकों में विरोध मार्च और जनसभाएं हुईं।
विरोध-प्रदर्शन कई दिनों तक जारी रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि नेताओं द्वारा बार-बार नफरत भरे भाषण दिए जाने के बावजूद उनके खिलाफ पर्याप्त कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, राजा सिंह के पुतले जलाए और उनके खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई की मांग की।
कुछ इलाकों में प्रदर्शन हिंसक हो गए। पत्थरबाज़ी, प्रदर्शनकारियों के कुछ गुटों और पुलिस के बीच झड़प और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की घटनाएं हुईं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हालात को काबू में करने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया। सांप्रदायिक हिंसा की आशंका के चलते एहतियात के तौर पर हैदराबाद के कुछ हिस्सों में शिक्षण संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और पेट्रोल पंप बंद रहे।
विरोध-प्रदर्शनों का पैमाना यह दिखाता है कि मुस्लिम समुदाय ने इन बयानों को कितनी गंभीरता से लिया। साथ ही, इससे यह भी पता चलता है कि सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माहौल में भड़काऊ राजनीतिक भाषण किस तरह कानून-व्यवस्था बिगाड़ सकते हैं।
आपराधिक कार्रवाई शुरू
कई शिकायतों के बाद, मंगलहाट पुलिस ने सांप्रदायिक नफरत और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने से संबंधित भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत राजा सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया।
इन आरोपों में शामिल थे:
● IPC की धारा 153A: विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना;
● IPC की धारा 295A: धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण हरकतें करना;
● IPC की धारा 504: जानबूझकर अपमान करना जिससे शांति भंग होने की संभावना हो;
● IPC की धारा 505(2): विभिन्न समुदायों के बीच नफरत, दुश्मनी या दुर्भावना को बढ़ावा देने वाले बयान देना; और
● IPC की धारा 506: आपराधिक धमकी देना।
ये प्रावधान उस मुख्य कानूनी ढांचे का हिस्सा हैं जिसके तहत भारत में हेट स्पीच के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाती रही है। इनके तहत कार्रवाई के लिए अभियोजन पक्ष को न केवल यह साबित करना होता है कि आपत्तिजनक शब्द कहे गए थे, बल्कि यह भी दिखाना होता है कि भाषण में कानून के तहत तय खास बातें शामिल थीं, जैसे कि जानबूझकर किया गया काम, दुर्भावनापूर्ण व्यवहार या सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा देना।
गिरफ्तारी, रिहाई और प्रिवेंटिव डिटेंशन
राजा सिंह को शुरू में 23 अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, रिमांड अर्जी में प्रक्रियात्मक कमियों के कारण मजिस्ट्रेट ने पुलिस कस्टडी देने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया गया।
इसके बाद हैदराबाद पुलिस ने तेलंगाना प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट (एहतियाती हिरासत कानून) लागू करने का असामान्य कदम उठाया। 25 अगस्त 2022 को सिंह को प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत फिर से गिरफ्तार किया गया। इसका आधार यह था कि उनके बार-बार दिए गए भाषणों और गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव को लगातार खतरा बना हुआ था।
एक मौजूदा विधायक के खिलाफ प्रिवेंटिव डिटेंशन का इस्तेमाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून आमतौर पर तब लागू किए जाते हैं जब अधिकारियों को लगता है कि सार्वजनिक व्यवस्था को आसन्न खतरों से बचाने के लिए सामान्य आपराधिक कानून काफी नहीं हैं। एक चुने हुए प्रतिनिधि के खिलाफ इनके इस्तेमाल से पता चलता है कि प्रशासन ने सिंह के भाषणों के संभावित नतीजों को कितनी गंभीरता से लिया था।
नवंबर 2022 में तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा हिरासत के आदेश को रद्द करने और जमानत पर रिहाई का निर्देश देने से पहले राजा सिंह लगभग 77 दिनों तक हिरासत में रहे।
बीजेपी ने दूरी बनाई
इस विवाद के तुरंत राजनीतिक नतीजे भी सामने आए। राजा सिंह की गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों के भीतर, भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया और कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह सस्पेंशन ऐसे समय में हुआ जब बीजेपी नेताओं द्वारा पैगंबर मोहम्मद के बारे में भड़काऊ टिप्पणियों को लेकर देश और विदेश में कड़ी आलोचना हो रही थी।
पार्टी प्रवक्ताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा कि बीजेपी हेट स्पीच या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयानों का समर्थन नहीं करती है। राजनीतिक टिप्पणीकारों ने इस सस्पेंशन को बढ़ते विवाद को रोकने की कोशिश के तौर पर देखा, खासकर पार्टी प्रवक्ताओं से जुड़े पिछले विवादों के बाद हुए राजनयिक नतीजों को देखते हुए।
सस्पेंशन के बावजूद, राजा सिंह तेलंगाना में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बने रहे। 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले, बीजेपी ने उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया, उन्हें गोशामहल से फिर से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने अपनी विधानसभा सीट सफलतापूर्वक बरकरार रखी। हालांकि, 2025 में तेलंगाना राज्य पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर मतभेदों के कारण उन्होंने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया।
स्पेशल कोर्ट में सुनवाई
सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तय स्पेशल कोर्ट में आपराधिक कार्यवाही जारी रही।
लगभग चार साल के दौरान, अभियोजन पक्ष ने गवाहों से पूछताछ की, दस्तावेजी सबूत पेश किए और विवादित भाषण की रिकॉर्डिंग का सहारा लिया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अभियोजन पक्ष के सबूतों के आधार और राजा सिंह के बयानों की व्याख्या, दोनों को चुनौती दी।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील के. करुणा सागर ने कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद जिरह के दौरान माना था कि विवादित भाषण के कुछ हिस्से इस्लामी साहित्य में मौजूद सामग्री का जिक्र करते हैं। बचाव पक्ष के अनुसार, गवाहों के बयानों और दस्तावेजी सबूतों का मूल्यांकन करने के बाद, कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष कथित अपराधों के तत्वों को साबित करने में विफल रहा। नतीजतन, कोर्ट ने यह मानते हुए कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा, राजा सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

राजा सिंह की प्रतिक्रिया
बरी होने के बाद, ANI से बात करते हुए राजा सिंह ने फैसले को "सत्य, न्याय और कानून के शासन की जीत" बताया।
उन्होंने कहा कि उनका कभी भी किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था और आरोप लगाया कि आपराधिक मामला, साथ ही उनकी निवारक हिरासत (preventive detention), AIMIM द्वारा तत्कालीन भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार पर डाले गए राजनीतिक दबाव के तहत शुरू की गई थी।
उन्होंने आगे दावा किया कि अलग-अलग सरकारों के दौरान उनके खिलाफ दर्ज कई अन्य आपराधिक मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और भरोसा जताया कि वे उन मामलों में भी अंततः बरी हो जाएंगे।

भड़काऊ भाषणों का इतिहास
हालांकि इस खास मामले में उन्हें बरी कर दिया गया, लेकिन राजा सिंह भारत के सबसे विवादित राजनीतिक चेहरों में से एक बने हुए हैं, क्योंकि उनका भड़काऊ सांप्रदायिक बयानबाजी का लंबा इतिहास रहा है।
पिछले दशक में, उनके खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण (हेट स्पीच), सांप्रदायिक दुश्मनी को बढ़ावा देने और उकसाने के आरोप में कई FIR दर्ज की गई हैं। उनके भाषणों में अक्सर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया गया है और नागरिक समाज के संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने बार-बार उनकी आलोचना की है।
16 जुलाई, 2024 को 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' ने महाराष्ट्र के संबंधित अधिकारियों को तीन अलग-अलग शिकायतें भेजीं। ये शिकायतें मई के महीने में BJP विधायक राजा सिंह द्वारा दिए गए नफरत भरे भाषणों की तीन अलग-अलग घटनाओं के बारे में थीं। शिकायत में बताई गई तीनों घटनाओं में, BJP विधायक राजा सिंह को 'सकल हिंदू समाज' द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ उकसावे वाले और भड़काऊ बयान देते हुए सुना जा सकता है। पूरी जानकारी यहां पढ़ी जा सकती है।
राजा सिंह की विस्तृत प्रोफाइल यहां देखी जा सकती है।
कानूनी पहलू
यह बरी होना भारत में हेट स्पीच से जुड़े मुकदमों की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक को दिखाता है। जनता का गुस्सा, बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन या बहुत ज्यादा आपत्तिजनक भाषण भी अपने आप आपराधिक सजा में नहीं बदलते। आपराधिक अदालतें आपराधिक कानून के बुनियादी सिद्धांतों से बंधी होती हैं, जिनके तहत अभियोजन पक्ष को स्वीकार्य सबूतों के जरिए कथित अपराधों के हर पहलू को बिना किसी उचित संदेह के साबित करना होता है।
साथ ही, इस फैसले को उस भाषण को न्यायिक मंजूरी के तौर पर नहीं समझा जाना चाहिए। अदालत का निष्कर्ष केवल मुकदमे के दौरान पेश किए गए सबूतों और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत सजा के लिए जरूरी सबूतों के ऊंचे पैमाने को पूरा करने में अभियोजन पक्ष की नाकामी पर आधारित है।
इसलिए, यह मामला भारत के कानूनी ढांचे के भीतर एक बड़ी संरचनात्मक समस्या को उजागर करता है। IPC की धारा 153A और 295A जैसे मौजूदा प्रावधान- जो अब काफी हद तक 'भारतीय न्याय संहिता' में शामिल हैं- हेट स्पीच के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य कानूनी साधन बने हुए हैं।
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पैगंबर मोहम्मद के बारे में 2022 में की गई टिप्पणियों के मामले में तेलंगाना के विधायक टी. राजा सिंह का बरी होना, हाल के वर्षों में हेट स्पीच (नफरत फैलाने वाले भाषण) से जुड़े सबसे ज्यादा राजनीतिक और सांप्रदायिक रूप से विवादित मुकदमों में से एक मकदमे का अंत है। यह मामला कभी भी सिर्फ किसी व्यक्ति के विवादित बयानों तक सीमित नहीं था। यह मामला बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, राजनीतिक हस्तियों द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ बार-बार अपमानजनक टिप्पणियों पर देशव्यापी आक्रोश, हैदराबाद में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन, एक मौजूदा विधायक के खिलाफ प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) के इस्तेमाल और हेट स्पीच से जुड़े भारत के कानूनी ढांचे की नई सिरे से जांच-पड़ताल के माहौल में सामने आया था। हैदराबाद में सांसदों और विधायकों के लिए बनी स्पेशल कोर्ट ने यह कहते हुए सिंह को बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। हालांकि इस फैसले से इस खास मामले में आपराधिक कार्यवाही खत्म हो गई है, लेकिन इससे राजनीतिक हेट स्पीच, सांप्रदायिक लामबंदी, जन-प्रतिनिधियों की जवाबदेही और भारत के मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत दोषी ठहराने की चुनौतियों से जुड़े बड़े सवाल खत्म नहीं होते।

वह विवाद जिसने देशव्यापी गुस्सा पैदा किया
इस मामले की शुरुआत अगस्त 2022 में हुई, जब स्टैंड-अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूक़ी का हैदराबाद में शो होने वाला था। उस समय गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक रहे राजा सिंह ने इस कार्यक्रम का सार्वजनिक रूप से विरोध किया और फारूक़ी पर अपने कॉमेडी शो के दौरान हिंदू देवी-देवताओं का बार-बार अपमान करने का आरोप लगाया। कानून-व्यवस्था से जुड़ी संभावित समस्याओं को देखते हुए, हैदराबाद पुलिस ने 20 अगस्त 2022 को सिंह को प्रिवेंटिव हाउस अरेस्ट (एहतियाती नजरबंदी) में रखा, साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए कि फारूक़ी का शो शांतिपूर्ण ढंग से हो सके।
विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ी जा सकती है।
हालांकि, कुछ ही दिनों में विवाद तेजी से बढ़ गया। राजा सिंह ने फारूक़ी के शो के जवाब में अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया। वीडियो के दौरान, उन्होंने पैगंबर मोहम्मद के बारे में कई अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जिनमें ऐसी बातें भी शामिल थीं जिन्हें कई मुसलमानों ने बेहद आपत्तिजनक और ईशनिंदापूर्ण माना। यह वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल गया, जिससे धार्मिक संगठनों, नागरिक समाज समूहों और राजनीतिक नेताओं की ओर से तुरंत तीखी आलोचना हुई।
ये टिप्पणियां एक बेहद संवेदनशील समय पर की गई थीं। कुछ हफ्ते पहले ही, भारत ने एक राजनयिक संकट का सामना किया था, जब बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद के बारे में विवादित टिप्पणियों के कारण कई देशों में विरोध-प्रदर्शन हुए थे और खाड़ी तथा अन्य मुस्लिम-बहुल देशों की सरकारों ने तीखी आलोचना की थी। इस माहौल में, राजा सिंह के बयानों को एक और ऐसी घटना के तौर पर देखा गया जो पहले से ही नाज़ुक सांप्रदायिक रिश्तों को और बिगाड़ सकती थी।
हैदराबाद में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन
राजा सिंह के बयानों के खिलाफ लोगों का गुस्सा तेजी से और जोरदार तरीके से सामने आया। हैदराबाद के अलग-अलग हिस्सों, खासकर पुराने शहर में हजारों लोग जमा हुए और उनकी तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर सी.वी. आनंद के दफ्तर के बाहर बड़े प्रदर्शन हुए, जबकि शालीबांडा, मंगलहाट और चारमीनार समेत कई इलाकों में विरोध मार्च और जनसभाएं हुईं।
विरोध-प्रदर्शन कई दिनों तक जारी रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि नेताओं द्वारा बार-बार नफरत भरे भाषण दिए जाने के बावजूद उनके खिलाफ पर्याप्त कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, राजा सिंह के पुतले जलाए और उनके खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई की मांग की।
कुछ इलाकों में प्रदर्शन हिंसक हो गए। पत्थरबाज़ी, प्रदर्शनकारियों के कुछ गुटों और पुलिस के बीच झड़प और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की घटनाएं हुईं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हालात को काबू में करने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया। सांप्रदायिक हिंसा की आशंका के चलते एहतियात के तौर पर हैदराबाद के कुछ हिस्सों में शिक्षण संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और पेट्रोल पंप बंद रहे।
विरोध-प्रदर्शनों का पैमाना यह दिखाता है कि मुस्लिम समुदाय ने इन बयानों को कितनी गंभीरता से लिया। साथ ही, इससे यह भी पता चलता है कि सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माहौल में भड़काऊ राजनीतिक भाषण किस तरह कानून-व्यवस्था बिगाड़ सकते हैं।
आपराधिक कार्रवाई शुरू
कई शिकायतों के बाद, मंगलहाट पुलिस ने सांप्रदायिक नफरत और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने से संबंधित भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत राजा सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया।
इन आरोपों में शामिल थे:
● IPC की धारा 153A: विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना;
● IPC की धारा 295A: धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण हरकतें करना;
● IPC की धारा 504: जानबूझकर अपमान करना जिससे शांति भंग होने की संभावना हो;
● IPC की धारा 505(2): विभिन्न समुदायों के बीच नफरत, दुश्मनी या दुर्भावना को बढ़ावा देने वाले बयान देना; और
● IPC की धारा 506: आपराधिक धमकी देना।
ये प्रावधान उस मुख्य कानूनी ढांचे का हिस्सा हैं जिसके तहत भारत में हेट स्पीच के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाती रही है। इनके तहत कार्रवाई के लिए अभियोजन पक्ष को न केवल यह साबित करना होता है कि आपत्तिजनक शब्द कहे गए थे, बल्कि यह भी दिखाना होता है कि भाषण में कानून के तहत तय खास बातें शामिल थीं, जैसे कि जानबूझकर किया गया काम, दुर्भावनापूर्ण व्यवहार या सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा देना।
गिरफ्तारी, रिहाई और प्रिवेंटिव डिटेंशन
राजा सिंह को शुरू में 23 अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, रिमांड अर्जी में प्रक्रियात्मक कमियों के कारण मजिस्ट्रेट ने पुलिस कस्टडी देने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया गया।
इसके बाद हैदराबाद पुलिस ने तेलंगाना प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट (एहतियाती हिरासत कानून) लागू करने का असामान्य कदम उठाया। 25 अगस्त 2022 को सिंह को प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत फिर से गिरफ्तार किया गया। इसका आधार यह था कि उनके बार-बार दिए गए भाषणों और गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव को लगातार खतरा बना हुआ था।
एक मौजूदा विधायक के खिलाफ प्रिवेंटिव डिटेंशन का इस्तेमाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून आमतौर पर तब लागू किए जाते हैं जब अधिकारियों को लगता है कि सार्वजनिक व्यवस्था को आसन्न खतरों से बचाने के लिए सामान्य आपराधिक कानून काफी नहीं हैं। एक चुने हुए प्रतिनिधि के खिलाफ इनके इस्तेमाल से पता चलता है कि प्रशासन ने सिंह के भाषणों के संभावित नतीजों को कितनी गंभीरता से लिया था।
नवंबर 2022 में तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा हिरासत के आदेश को रद्द करने और जमानत पर रिहाई का निर्देश देने से पहले राजा सिंह लगभग 77 दिनों तक हिरासत में रहे।
बीजेपी ने दूरी बनाई
इस विवाद के तुरंत राजनीतिक नतीजे भी सामने आए। राजा सिंह की गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों के भीतर, भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया और कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह सस्पेंशन ऐसे समय में हुआ जब बीजेपी नेताओं द्वारा पैगंबर मोहम्मद के बारे में भड़काऊ टिप्पणियों को लेकर देश और विदेश में कड़ी आलोचना हो रही थी।
पार्टी प्रवक्ताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा कि बीजेपी हेट स्पीच या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयानों का समर्थन नहीं करती है। राजनीतिक टिप्पणीकारों ने इस सस्पेंशन को बढ़ते विवाद को रोकने की कोशिश के तौर पर देखा, खासकर पार्टी प्रवक्ताओं से जुड़े पिछले विवादों के बाद हुए राजनयिक नतीजों को देखते हुए।
सस्पेंशन के बावजूद, राजा सिंह तेलंगाना में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बने रहे। 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले, बीजेपी ने उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया, उन्हें गोशामहल से फिर से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने अपनी विधानसभा सीट सफलतापूर्वक बरकरार रखी। हालांकि, 2025 में तेलंगाना राज्य पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर मतभेदों के कारण उन्होंने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया।
स्पेशल कोर्ट में सुनवाई
सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तय स्पेशल कोर्ट में आपराधिक कार्यवाही जारी रही।
लगभग चार साल के दौरान, अभियोजन पक्ष ने गवाहों से पूछताछ की, दस्तावेजी सबूत पेश किए और विवादित भाषण की रिकॉर्डिंग का सहारा लिया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अभियोजन पक्ष के सबूतों के आधार और राजा सिंह के बयानों की व्याख्या, दोनों को चुनौती दी।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील के. करुणा सागर ने कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद जिरह के दौरान माना था कि विवादित भाषण के कुछ हिस्से इस्लामी साहित्य में मौजूद सामग्री का जिक्र करते हैं। बचाव पक्ष के अनुसार, गवाहों के बयानों और दस्तावेजी सबूतों का मूल्यांकन करने के बाद, कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष कथित अपराधों के तत्वों को साबित करने में विफल रहा। नतीजतन, कोर्ट ने यह मानते हुए कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा, राजा सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

राजा सिंह की प्रतिक्रिया
बरी होने के बाद, ANI से बात करते हुए राजा सिंह ने फैसले को "सत्य, न्याय और कानून के शासन की जीत" बताया।
उन्होंने कहा कि उनका कभी भी किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था और आरोप लगाया कि आपराधिक मामला, साथ ही उनकी निवारक हिरासत (preventive detention), AIMIM द्वारा तत्कालीन भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार पर डाले गए राजनीतिक दबाव के तहत शुरू की गई थी।
उन्होंने आगे दावा किया कि अलग-अलग सरकारों के दौरान उनके खिलाफ दर्ज कई अन्य आपराधिक मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और भरोसा जताया कि वे उन मामलों में भी अंततः बरी हो जाएंगे।

भड़काऊ भाषणों का इतिहास
हालांकि इस खास मामले में उन्हें बरी कर दिया गया, लेकिन राजा सिंह भारत के सबसे विवादित राजनीतिक चेहरों में से एक बने हुए हैं, क्योंकि उनका भड़काऊ सांप्रदायिक बयानबाजी का लंबा इतिहास रहा है।
पिछले दशक में, उनके खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण (हेट स्पीच), सांप्रदायिक दुश्मनी को बढ़ावा देने और उकसाने के आरोप में कई FIR दर्ज की गई हैं। उनके भाषणों में अक्सर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया गया है और नागरिक समाज के संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने बार-बार उनकी आलोचना की है।
16 जुलाई, 2024 को 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' ने महाराष्ट्र के संबंधित अधिकारियों को तीन अलग-अलग शिकायतें भेजीं। ये शिकायतें मई के महीने में BJP विधायक राजा सिंह द्वारा दिए गए नफरत भरे भाषणों की तीन अलग-अलग घटनाओं के बारे में थीं। शिकायत में बताई गई तीनों घटनाओं में, BJP विधायक राजा सिंह को 'सकल हिंदू समाज' द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ उकसावे वाले और भड़काऊ बयान देते हुए सुना जा सकता है। पूरी जानकारी यहां पढ़ी जा सकती है।
राजा सिंह की विस्तृत प्रोफाइल यहां देखी जा सकती है।
कानूनी पहलू
यह बरी होना भारत में हेट स्पीच से जुड़े मुकदमों की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक को दिखाता है। जनता का गुस्सा, बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन या बहुत ज्यादा आपत्तिजनक भाषण भी अपने आप आपराधिक सजा में नहीं बदलते। आपराधिक अदालतें आपराधिक कानून के बुनियादी सिद्धांतों से बंधी होती हैं, जिनके तहत अभियोजन पक्ष को स्वीकार्य सबूतों के जरिए कथित अपराधों के हर पहलू को बिना किसी उचित संदेह के साबित करना होता है।
साथ ही, इस फैसले को उस भाषण को न्यायिक मंजूरी के तौर पर नहीं समझा जाना चाहिए। अदालत का निष्कर्ष केवल मुकदमे के दौरान पेश किए गए सबूतों और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत सजा के लिए जरूरी सबूतों के ऊंचे पैमाने को पूरा करने में अभियोजन पक्ष की नाकामी पर आधारित है।
इसलिए, यह मामला भारत के कानूनी ढांचे के भीतर एक बड़ी संरचनात्मक समस्या को उजागर करता है। IPC की धारा 153A और 295A जैसे मौजूदा प्रावधान- जो अब काफी हद तक 'भारतीय न्याय संहिता' में शामिल हैं- हेट स्पीच के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य कानूनी साधन बने हुए हैं।
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