गुजरातः बंदरगाहों के आयेंगे 'अच्छे दिन', जेएनपीटी पोर्ट को कर्ज में डुबोने का षड्यंत्र

Written by उन्मेश गुजराती | Published on: July 23, 2018
देशभर में करोड़ों रुपए फायदे में चल रहे जेएनपीटी बंदरगाह को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझा जाता है। अब इस मुर्गी को काटने की चाल केंद्र सरकार चल रही है। डूब चुकी एयर इंडिया का मुंबई स्थित 23 मंजिली इमारत को खरीदने का आदेश सीधे केंद्र सरकार ने जेएनपीटी को दिया है। इतना ही नहीं, कर्ज में डूबे दिघी पोर्ट में भी करोड़ों रुपए खर्च कर चलाने का दबाव जेएनपीटी पर डाला गया है।



सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रकल्पों के लिए जापान से लगभग तीन हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया है। इसके लिए जेएनपीटी को गिरवी रखा गया है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय दर्जे का बंदरगाह जेएनपीटी को कर्ज के समुद्र में डुबोकर गुजरात के बंदरगाह के अच्छे दिन लाने का षड्यंत्र केंद्र सरकार द्वारा रचे जाने का खुलासा हुआ है।

मोदी को खुश करने नौकानयन अधिकारियों ने भरी हामी
जेएनपीटी के इस फायदे से मेरी टाइम बोर्ड के दिघी बंदरगाह और एयर इंडिया मुंबई मुख्यालय की 23 मंजिली इमारत खरीदने की चाल है। इसका जेएनपीटी के वरिष्ठ अधिकारियों ने विरोध किया है। मोदी को खुश करने के लिए नौकानयन मंत्रालय ने इसके लिए सहमति दिखाई है। 

इतना ही नहीं, महाराष्ट्र के जिस प्रोजेक्ट का जेएनपीटी से सीधा कोई भी संबंध नहीं है। ऐसे काम के लिए जेएनपीटी की तिजोरी से हजारों करोड़ खर्च किया जाने वाला है। इसके लिए जापान से तीन करोड़ रुपए का कर्ज भी लिया गया है। एक तरफ कंटेनर यातायात के आर्थिक वर्ष में 9.45 प्रतिशत की कमी आई है। ऐसे हालात में जेएनपीटी को कर्ज का हफ्ता चुकाना होगा। इससे जेएनपीटी पर आर्थिक बोझ पड़ने वाला है।

जेएनपीटी की आय पर सरकार की गिद्ध नजर
चौथे बंदरगाह के कारण जेएनपीटी की क्षमता बढ़ गई है। इससे आने वाले कुछ वर्षों में एक करोड़ कंटेनर्स का आवागमन होगा। इससे रॉयल्टी जमा होने का आंकड़ा 1800 करोड़ के करीब पहुंच जाएगा। इसके साथ ही 4 हजार 500 करोड़ का रिजर्व फंड जमा है। उसमें से 350 करोड़ रुपए का ब्याज वर्षभर में जेएनपीटी को मिलता है। इसकी आर्थिक स्थिति देखकर केंद्र सरकार की गिद्ध नजर पड़ गई है।

सत्ता बदल होते ही प्रस्ताव पटल पर
पांच वर्ष पहले एयर इंडिया की मुंबई स्थित यह 23 मंजिली इमारत  800 करोड़ रुपए में खरीदने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन उस समय इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया था। अब सत्ता परिवर्तन होते ही इस प्रस्ताव को वापस लाया गया है। दिघी पोर्ट चलाने के लिए बैंक और रेलवे कनेक्टिविटी के लिए 2600 करोड़ रुपए खर्च किया जाने वाला है.

गुजरात की तरफ डायवर्ट होंगे कंटेनर
जेएनपीटी में डीपीडी योजना लागू कर स्थानीय ट्रासंपोर्ट और भूमिपुत्रों का रोजगार  समाप्त करने की चाल सरकार ने चली है. यहां का कंटेनर ट्रांसपोर्ट गुजरात की तरफ डायवर्ट करने की चाल का आरोप लगाया जा रहा है. 

डीपीडी योजना से होने वाले नुकसान व फायदे
जेएनपीटी का डीपीडी (डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी) योजना के अंतर्गत सीधे पोर्ट से  डिलीवरी किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत पोर्ट से कंटेनर को निकलने और उसके डिलीवरी का समय बताया जाएगा। उसके अनुसार कंटेनर से संबंधित व्यक्ति उस समय पोर्ट में जाकर अपने कंटेनर ले सकते हैं. इस योजना से पूरे लागत में 15 प्रतिशत की कमी आएगी, लेकिन यह कमी आने के साथ ही योजना से स्थानीय एजेंट, गोदाम मालिक और काम करने वाले भूमिपुत्रों का रोजगार समाप्त हो जाएगा. इससे लगभग 15 हजार लोगों का रोजगार समाप्त होगा। लगभग 60 हजार लोगों पर इसका असर देखने को मिलेगा.

परियोजनाओं पर होने वाले खर्च
1 हजार करोड़: जालना ,वर्धा ,सांगली ,निफाड जिले में ड्रायपोर्ट के लिए 

500 करोड़: जेएनपीटी सेज के लिए 

6 हजार करोड़: इंदोर,मनमाड रेलवे मार्ग के लिए  

10 हजार करोड़: वाढवण पोर्ट के लिए  

10 हजार करोड़: अन्य विविध रास्तो के लिए जेएनपीटी के तिजोरी से होंगे खर्च

(लेखक दबंग दुनिया के स्थानीय संपादक हैं।)

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