सुप्रीम कोर्ट मणिपुर राहत शिविरों में मौत पर सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं, सीजेआई ने जताई नाराजगी

Written by sabrang india | Published on: September 19, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के राहत शिविरों में हुई मौतों को लेकर राज्य सरकार के जवाब पर नाराजगी जताई है। अदालत ने 25 अप्राकृतिक मौतों के मामले में जस्टिस गीता मित्तल समिति को संतोषजनक जानकारी नहीं दिए जाने और कई मामलों में पोस्टमार्टम नहीं कराए जाने पर मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।


फोटो साभार : पीटीआई

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 17 सितंबर को हिंसा प्रभावित मणिपुर की भाजपा सरकार को राहत शिविरों में हुई मौतों के मामले में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर फटकार लगाई।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने 2023 की जातीय हिंसा के बाद राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की 25 अप्राकृतिक मौतों को लेकर जस्टिस गीता मित्तल समिति के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया है।

इस मामले में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने मणिपुर सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, “यह बेहद चौंकाने वाला है। इनमें से एक मामला यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। समिति ने जो जानकारी मांगी थी, वह बेहद गंभीर थी।”

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2023 की जातीय हिंसा के पीड़ितों को राहत और पुनर्वास देने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए जस्टिस गीता मित्तल समिति का गठन किया था। अदालत ने मणिपुर के मुख्य सचिव को इन मौतों के संबंध में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी भी शामिल करने को कहा गया है।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी होनी चाहिए।

द वायर ने लिखा, अदालत ने कहा कि इन लोगों को रोजमर्रा की जरूरी सुविधाओं और इलाज तक आसानी से पहुंच मिलनी चाहिए।

सीजेआई सूर्यकांत ने राज्य सरकार के वकीलों से कहा, “अपने मुख्य सचिव से कहिए कि कोई समस्या खड़ी न करें।”

आठ जिलों के राहत शिविरों में 640 मौतें

सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार के आदेश में एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, मणिपुर के आठ जिलों के राहत शिविरों में 640 लोगों की मौत हुई है। इनमें से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया और बाद में आपराधिक मामले दर्ज किए गए।

अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम क्यों कराया गया। साथ ही, उसने सवाल किया कि इन मामलों में महज 20,000 से 30,000 रुपये का मुआवजा ही क्यों दिया गया।

इससे पहले ‘द वायर’ ने आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर बताया था कि मई 2023 में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से मणिपुर के राहत शिविरों और प्रीफैब्रिकेटेड आवासों में रह रहे कम से कम 731 विस्थापित लोगों की मौत हो चुकी है।

मणिपुर के गृह विभाग ने अलग-अलग जिला प्रशासनों से प्राप्त आंकड़ों को एकत्र किया था। ये मौतें उन लोगों की हुईं, जो मेईतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हुई हिंसा के बाद बनाए गए राहत शिविरों और अस्थायी आवासों में रह रहे थे।

आरटीआई से मिले जिलावार आंकड़ों के मुताबिक, चूड़ाचांदपुर में सबसे ज्यादा 248 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद बिष्णुपुर में 151, कांगपोकपी में 128, इंफाल पश्चिम में 94, काकचिंग में 60, इंफाल पूर्व में 25, जिरीबाम में 13, थौबल में 11 और तेंगनौपाल में एक मौत हुई।

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