9 अगस्त के सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2026 में VB-G RAM G स्कीम के तहत सिर्फ 7.67 करोड़ पर्सन-डे (काम के दिन) पैदा हुए—जो पिछले साल इसी महीने में MGNREGS के तहत पैदा हुए 15.33 करोड़ पर्सन-डे की तुलना में 49.94 प्रतिशत कम है।

साभार : डाउन टू अर्थ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार के नए ग्रामीण रोजगार गारंटी प्रोग्राम के तहत रोजगार पैदा करने में भारी गिरावट आई है। जुलाई में इसमें साल-दर-साल 49.94 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यह गिरावट तब आई जब सरकार ने 1 जुलाई से दो दशक पुरानी ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (MGNREGS) को बदलकर नई शुरू की गई ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G को अपनाया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 9 अगस्त के सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2026 में VB-G RAM G योजना के तहत केवल 7.67 करोड़ ‘पर्सन-डे’ (एक व्यक्ति द्वारा एक दिन में किए गए काम की इकाई) पैदा हुए। यह पिछले साल इसी महीने में MGNREGS के तहत पैदा हुए 15.33 करोड़ ‘पर्सन-डे’ की तुलना में 49.94 प्रतिशत कम है।
‘पर्सन-डे’ माप की एक इकाई है जो एक व्यक्ति द्वारा एक कामकाजी दिन में किए गए काम की आदर्श मात्रा पर आधारित होती है।
हालांकि VB-G RAM G डैशबोर्ड जुलाई में 7.67 करोड़ ‘पर्सन-डे’ दिखाता है, लेकिन ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि योजना लागू होने के पहले महीने में लगभग 9 करोड़ ‘पर्सन-डे’ पैदा हुए थे।
इस साल जुलाई में VB-G RAM G योजना के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का लाभ उठाने वाले परिवारों की संख्या 51.45 प्रतिशत घटकर 68.94 लाख रह गई। MGNREGS के तहत पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा 1.42 करोड़ था।
ग्रामीण रोजगार योजना के तहत परिवारों और ‘पर्सन-डे’ की संख्या असल में पिछले पांच वर्षों में सबसे कम रही है। VB-G RAM G योजना का लाभ उठाने वाले परिवारों की औसत संख्या 0.68 करोड़ है, जो पिछले चार वर्षों के 1.72 करोड़ परिवारों के औसत का 40% से भी कम है। इसी तरह, इस जुलाई के ‘पर्सन-डे’ भी पिछले चार वर्षों के 21.56 करोड़ औसत ‘पर्सन-डे’ का केवल 35% हैं। मार्च 2025 में, नरेगा के तहत 17.56 करोड़ पर्सन-डे पैदा हुए—जो मार्च 2024 के 17.69 करोड़ पर्सन-डे से 0.70% कम थे। नरेगा के तहत पैदा हुए रोजगार के मासिक आंकड़ों में साल-दर-साल यह गिरावट जून 2026 तक जारी रही, जो यूपीए-युग की इस योजना का आखिरी महीना था।
अनियमित मॉनसून को देखते हुए VB-G RAM G के तहत रोजगार पैदा होने में जुलाई में आई गिरावट अहम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के 741 जिलों में से 50 प्रतिशत जिलों में 1 जून से 3 अगस्त के बीच कम से लेकर बहुत कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसे हालात में, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अकुशल खेतिहर मजदूरों के लिए एक सहारा बन जाती है।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक खरीफ फसल के तहत खेती का रकबा 894.22 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया—जो पिछले साल इसी अवधि में 920.72 लाख हेक्टेयर था।
सूत्रों का कहना है कि रोजगार पैदा होने में गिरावट की एक वजह खरीफ बुआई के मौसम में योजना का कुछ समय के लिए रुकना हो सकता है। हालांकि, बुआई के मौसम में काम रुकने के बारे में कोई डेटा उपलब्ध नहीं है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के एक ईमेल का जवाब देते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “VB-G RAM G एक्ट, 2025 को 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण इलाकों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। MGNREGA से VB–G RAM G में बदलाव आसान, बिना किसी रुकावट वाला और टेक्नोलॉजी पर आधारित रहा है। सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी-अपनी योजनाएं नोटिफाई कर दी हैं और पहले दिन से ही कार्यक्रम शुरू होने से पहले पूरा प्रशासनिक और डिजिटल इकोसिस्टम चालू कर दिया गया था।”
अधिकारी ने कहा, “बिना किसी रुकावट के इसे लागू करने के लिए, केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 95,692 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट अनुमान दिया है, जो किसी भी ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे ज्यादा बजट है। इसके तहत, यह प्रोग्राम पूरे देश में असरदार ढंग से लागू किया जा रहा है। काम की मांग करने वाले 98% से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को काम दिया गया है। इसे लागू करने के पहले महीने में, लगभग नौ करोड़ ‘पर्सन-डे’ पैदा हुए हैं। NMMS के जरिए हाजिरी दर्ज की जा रही है, जिसमें असली मामलों के लिए तय ‘एक्सेप्शन-हैंडलिंग मैकेनिज्म’ के साथ-साथ ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। काम की मांग के आधार पर 1.33 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण मजदूरों को रोजगार दिया गया है और नौ लाख से ज्यादा एक्टिव वर्कसाइट पर काम चल रहा है, जिससे रोजगार के मौकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।”
अधिकारी ने आगे कहा कि अब तक पैदा हुए कुल ‘पर्सन-डे’ में से लगभग 63% महिलाओं का योगदान रहा है, जो एक-तिहाई भागीदारी की कानूनी जरूरत से कहीं ज्यादा है।
अधिकारी ने कहा, “VB-G RAM G एक्ट के सभी प्रावधान 1 जुलाई, 2026 से लागू हो गए हैं। इनमें बुवाई और कटाई के मुख्य मौसम से जुड़ा कानूनी प्रावधान भी शामिल है, जिसे राज्य स्थानीय कृषि-जलवायु स्थितियों के अनुसार लागू कर रहे हैं। मंत्रालय एरिया ऑफिसर के दौरों, नियमित समीक्षा बैठकों, टेक्नोलॉजी-बेस्ड डैशबोर्ड और फील्ड-लेवल फीडबैक के जरिए इसके लागू होने की लगातार निगरानी कर रहा है।”
VB-G RAM G स्कीम के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-रोजगार की गारंटी दी जाती है, जो नरेगा के तहत 100 दिन थी। इसमें “एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की अवधि के लिए रोजगार गारंटी को रोकने” का प्रावधान भी है, जिसमें बुवाई और कटाई का मुख्य कृषि मौसम शामिल है, इस दौरान कोई काम नहीं किया जाएगा।
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साभार : डाउन टू अर्थ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार के नए ग्रामीण रोजगार गारंटी प्रोग्राम के तहत रोजगार पैदा करने में भारी गिरावट आई है। जुलाई में इसमें साल-दर-साल 49.94 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यह गिरावट तब आई जब सरकार ने 1 जुलाई से दो दशक पुरानी ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (MGNREGS) को बदलकर नई शुरू की गई ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G को अपनाया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 9 अगस्त के सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2026 में VB-G RAM G योजना के तहत केवल 7.67 करोड़ ‘पर्सन-डे’ (एक व्यक्ति द्वारा एक दिन में किए गए काम की इकाई) पैदा हुए। यह पिछले साल इसी महीने में MGNREGS के तहत पैदा हुए 15.33 करोड़ ‘पर्सन-डे’ की तुलना में 49.94 प्रतिशत कम है।
‘पर्सन-डे’ माप की एक इकाई है जो एक व्यक्ति द्वारा एक कामकाजी दिन में किए गए काम की आदर्श मात्रा पर आधारित होती है।
हालांकि VB-G RAM G डैशबोर्ड जुलाई में 7.67 करोड़ ‘पर्सन-डे’ दिखाता है, लेकिन ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि योजना लागू होने के पहले महीने में लगभग 9 करोड़ ‘पर्सन-डे’ पैदा हुए थे।
इस साल जुलाई में VB-G RAM G योजना के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का लाभ उठाने वाले परिवारों की संख्या 51.45 प्रतिशत घटकर 68.94 लाख रह गई। MGNREGS के तहत पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा 1.42 करोड़ था।
ग्रामीण रोजगार योजना के तहत परिवारों और ‘पर्सन-डे’ की संख्या असल में पिछले पांच वर्षों में सबसे कम रही है। VB-G RAM G योजना का लाभ उठाने वाले परिवारों की औसत संख्या 0.68 करोड़ है, जो पिछले चार वर्षों के 1.72 करोड़ परिवारों के औसत का 40% से भी कम है। इसी तरह, इस जुलाई के ‘पर्सन-डे’ भी पिछले चार वर्षों के 21.56 करोड़ औसत ‘पर्सन-डे’ का केवल 35% हैं। मार्च 2025 में, नरेगा के तहत 17.56 करोड़ पर्सन-डे पैदा हुए—जो मार्च 2024 के 17.69 करोड़ पर्सन-डे से 0.70% कम थे। नरेगा के तहत पैदा हुए रोजगार के मासिक आंकड़ों में साल-दर-साल यह गिरावट जून 2026 तक जारी रही, जो यूपीए-युग की इस योजना का आखिरी महीना था।
अनियमित मॉनसून को देखते हुए VB-G RAM G के तहत रोजगार पैदा होने में जुलाई में आई गिरावट अहम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के 741 जिलों में से 50 प्रतिशत जिलों में 1 जून से 3 अगस्त के बीच कम से लेकर बहुत कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसे हालात में, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अकुशल खेतिहर मजदूरों के लिए एक सहारा बन जाती है।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक खरीफ फसल के तहत खेती का रकबा 894.22 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया—जो पिछले साल इसी अवधि में 920.72 लाख हेक्टेयर था।
सूत्रों का कहना है कि रोजगार पैदा होने में गिरावट की एक वजह खरीफ बुआई के मौसम में योजना का कुछ समय के लिए रुकना हो सकता है। हालांकि, बुआई के मौसम में काम रुकने के बारे में कोई डेटा उपलब्ध नहीं है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के एक ईमेल का जवाब देते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “VB-G RAM G एक्ट, 2025 को 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण इलाकों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। MGNREGA से VB–G RAM G में बदलाव आसान, बिना किसी रुकावट वाला और टेक्नोलॉजी पर आधारित रहा है। सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी-अपनी योजनाएं नोटिफाई कर दी हैं और पहले दिन से ही कार्यक्रम शुरू होने से पहले पूरा प्रशासनिक और डिजिटल इकोसिस्टम चालू कर दिया गया था।”
अधिकारी ने कहा, “बिना किसी रुकावट के इसे लागू करने के लिए, केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 95,692 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट अनुमान दिया है, जो किसी भी ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे ज्यादा बजट है। इसके तहत, यह प्रोग्राम पूरे देश में असरदार ढंग से लागू किया जा रहा है। काम की मांग करने वाले 98% से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को काम दिया गया है। इसे लागू करने के पहले महीने में, लगभग नौ करोड़ ‘पर्सन-डे’ पैदा हुए हैं। NMMS के जरिए हाजिरी दर्ज की जा रही है, जिसमें असली मामलों के लिए तय ‘एक्सेप्शन-हैंडलिंग मैकेनिज्म’ के साथ-साथ ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। काम की मांग के आधार पर 1.33 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण मजदूरों को रोजगार दिया गया है और नौ लाख से ज्यादा एक्टिव वर्कसाइट पर काम चल रहा है, जिससे रोजगार के मौकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।”
अधिकारी ने आगे कहा कि अब तक पैदा हुए कुल ‘पर्सन-डे’ में से लगभग 63% महिलाओं का योगदान रहा है, जो एक-तिहाई भागीदारी की कानूनी जरूरत से कहीं ज्यादा है।
अधिकारी ने कहा, “VB-G RAM G एक्ट के सभी प्रावधान 1 जुलाई, 2026 से लागू हो गए हैं। इनमें बुवाई और कटाई के मुख्य मौसम से जुड़ा कानूनी प्रावधान भी शामिल है, जिसे राज्य स्थानीय कृषि-जलवायु स्थितियों के अनुसार लागू कर रहे हैं। मंत्रालय एरिया ऑफिसर के दौरों, नियमित समीक्षा बैठकों, टेक्नोलॉजी-बेस्ड डैशबोर्ड और फील्ड-लेवल फीडबैक के जरिए इसके लागू होने की लगातार निगरानी कर रहा है।”
VB-G RAM G स्कीम के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-रोजगार की गारंटी दी जाती है, जो नरेगा के तहत 100 दिन थी। इसमें “एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की अवधि के लिए रोजगार गारंटी को रोकने” का प्रावधान भी है, जिसमें बुवाई और कटाई का मुख्य कृषि मौसम शामिल है, इस दौरान कोई काम नहीं किया जाएगा।
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