एक ऐसे संत की स्मृति में, जिनका जीवन आज भी प्रेरणा है: 5 जुलाई की सभा  

Written by sabrang india | Published on: July 8, 2026
5 जुलाई 2026 को फादर स्टेन स्वामी की मृत्यु की पांचवीं बरसी थी। महाराष्ट्र में न्यायिक हिरासत के दौरान हुई उनकी मौत को व्यापक रूप से 'संस्थागत हत्या' करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की गई थी। 84 वर्षीय इस सामाजिक कार्यकर्ता की मृत्यु मुंबई की जेल में कथित उपेक्षा, अमानवीय व्यवहार और कोविड-19 महामारी के दौरान बिगड़ती स्वास्थ्य स्थितियों के बीच हुई थी। वे झारखंड में आदिवासियों के अधिकारों के लिए किए गए अपने लंबे और समर्पित कार्यों के लिए आज भी याद किए जाते हैं।



फादर स्टेन स्वामी की पांचवीं पुण्यतिथि पर रविवार, 5 जुलाई को एक स्मृति सभा आयोजित की गई। बॉम्बे कैथोलिक सभा (BCS) द्वारा लोयोला हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 200 मुंबईवासियों ने भाग लिया। आमंत्रित वक्ताओं ने "फादर स्टेन और संविधान में उनका विश्वास" विषय पर अपने विचार रखे।

बीसीएस के अध्यक्ष नॉर्बर्ट मेंडोंका के स्वागत भाषण के बाद, सेंट पीटर्स चर्च के फादर ल्यूक रोड्रिग्स ने फादर स्टेन स्वामी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके संदेश और उनके उत्कृष्ट कार्यों को समाज तक पहुंचाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) की सचिव तीस्ता सेतलवाड़ ने झारखंड और अन्य क्षेत्रों में आदिवासियों के भूमि अधिकारों से जुड़े कानूनों के अन्यायपूर्ण और अपर्याप्त क्रियान्वयन पर फादर स्टेन स्वामी के व्यापक लेखन और दस्तावेज़ी कार्यों को याद किया। फादर स्टेन स्वामी सबरंगइंडिया के लिए नियमित रूप से लिखते थे और उनके लेख यहां, यहां और यहां पढ़े जा सकते हैं।

सेतलवाड़ ने कहा कि फादर स्टेन स्वामी की सबसे बड़ी ताकत भारतीय आदिवासियों, विशेषकर झारखंड के मूल निवासियों के बीच उनका अथक और समर्पित कार्य था। उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु और दर्जनों राजनीतिक बंदियों की निरंतर कैद नागरिक समाज और अधिकार समूहों को कठोर यूएपीए कानून को निरस्त कराने के प्रयास और तेज़ करने के लिए प्रेरित करती है। इस कानून का विश्लेषण यहां और यहां पढ़ा जा सकता है।

सेतलवाड़ ने यह भी बताया कि फादर स्टेन स्वामी को उनके कंप्यूटर में कथित रूप से "दस्तावेज़ और अन्य सबूत प्लांट करके" अनुचित ढंग से फंसाया गया था। उन्होंने कहा कि ये तथ्य उनकी मृत्यु के लगभग दस महीने बाद दिसंबर 2022 में प्रकाशित आर्सेनल रिपोर्ट के माध्यम से सामने आए, जिसे सबसे पहले वॉशिंगटन पोस्ट और एनडीटीवी ने प्रकाशित किया था। उनके अनुसार, इस रिपोर्ट ने राज्य की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई को उजागर किया। उन्होंने कहा कि यूएपीए को निरस्त कराने और जेलों की स्थितियों में सुधार के लिए अभियान चलाना ही फादर स्टेन स्वामी की विरासत को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका होगा।

कार्यक्रम में फादर फ्रेजर मैसेरेनहास का संदेश भी पढ़ा गया। उन्होंने फादर स्टेन स्वामी की पुण्यतिथि को वंचित समुदायों के लिए सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर बताते हुए सभी नागरिकों से अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाकर संविधान का सम्मान करने का आह्वान किया।

सीएसएसएस (CSSS) के निदेशक इरफान इंजीनियर ने सिटिज़न्स फॉर डेमोक्रेसी तथा वरिष्ठ कार्यकर्ताओं सुरेंद्र गाडलिंग और दिनकर गोटा के एकजुटता संदेश पढ़कर सुनाए। दोनों ने 5 जुलाई को फादर स्टेन स्वामी की स्मृति में एक दिन का उपवास रखा था। इंजीनियर ने कमजोर समुदायों, विशेषकर आदिवासियों के लिए संविधान में निहित भाईचारे और गरिमा के मूल्यों की रक्षा तथा उनके सामूहिक अधिकारों के लिए फादर स्टेन स्वामी के संघर्ष को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि फादर स्वामी ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा आदिवासियों के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्ज़ा करने की कोशिशों का भी साहसपूर्वक विरोध किया।

एपीसीआर (APCR) के महासचिव शाकिर शेख ने फादर स्टेन स्वामी के विचारों और मूल्यों को आम लोगों तक पहुंचाने तथा एसआईआर प्रक्रिया में आम नागरिकों की सहायता करने की आवश्यकता पर बल दिया। बॉम्बे कैथोलिक सभा के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट राफेल डिसूज़ा ने मेडिकल बेल की सुनवाई के दौरान हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि फादर स्टेन स्वामी के साथ किस प्रकार अन्याय हुआ और कैसे लापरवाहीपूर्ण प्रक्रिया उनकी मृत्यु का कारण बनी। कोच्चि से आए वरिष्ठ पत्रकार एंटो अक्कारा ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पीयूसीएल (PUCL) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मिहिर देसाई ने कहा कि फादर स्टेन स्वामी की मृत्यु "मुठभेड़ हत्या" से कम नहीं थी, क्योंकि उन्हें यह जानते हुए जेल में रखा गया कि (a) वे निर्दोष थे और (b) उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति जेल की कठिन परिस्थितियों को सहन करने की अनुमति नहीं देती थी।

देसाई ने कहा कि व्यवस्था फादर स्टेन स्वामी को सलाखों के पीछे इसलिए रखना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों की आवाज़ बुलंद हो। उन्होंने फादर स्वामी की बेगुनाही को न्यायिक रूप से सिद्ध करने और उनकी "न्यायिक हत्या" के लिए जवाबदेही तय करने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने नागरिकों से न्याय के लिए साहसपूर्वक संघर्ष करने और "सत्य की जीत" में विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन बीसीएस के प्रवक्ता डॉल्फी डिसूज़ा ने किया, जबकि समापन बीसीएस के ब्रायन डिसूज़ा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

इस जनसभा का आयोजन बॉम्बे कैथोलिक सभा (BCS), सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड सेक्युलरिज्म (CSSS), सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP), क्रिश्चियन डेवलपमेंट एसोसिएशन (CDA), एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR), मुंबई फॉर पीस तथा पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ (PUCL) सहित कई संगठनों ने संयुक्त रूप से किया। भारी बारिश के बावजूद 150 से अधिक नागरिक इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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