यह मुद्दा श्रमिक पैरवी व अधिकार केंद्र जयपुर और पीयूसीएल (PUCL) द्वारा राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया गया। संगठनों ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, जिला कलेक्टर संदेश नायक और जिला रसद अधिकारी प्रियव्रत सिंह चारण को ज्ञापन सौंपा।

जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (वीकेआई) में एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने प्रवासी मजदूरों के जीवन को गंभीर संकट में डाल दिया है। श्रमिक संगठनों के अनुसार, बढ़ती महंगाई और गैस की अनुपलब्धता के कारण मजदूरों को भोजन में कटौती करनी पड़ रही है और कुछ मामलों में अस्थायी पलायन भी देखने को मिला है।
यह मुद्दा श्रमिक पैरवी व अधिकार केंद्र जयपुर और पीयूसीएल (PUCL) द्वारा राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया गया। संगठनों ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, जिला कलेक्टर संदेश नायक और जिला रसद अधिकारी प्रियव्रत सिंह चारण को ज्ञापन सौंपा।
सर्वे में सामने आई भयावह स्थिति
13 अप्रैल को वीकेआई क्षेत्र की विभिन्न श्रमिक बस्तियों—जेएस कॉलोनी, युवराज विहार और श्रीराम उद्योग विहार—में किए गए सर्वे में कई गंभीर तथ्य सामने आए:
● क्षेत्र में 40,000 से अधिक प्रवासी मजदूर रह रहे हैं, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक सर्वे नहीं हुआ है।
● एलपीजी की कमी के कारण मजदूर भुखमरी और असुरक्षा के संकट से जूझ रहे हैं।
● पहले लगभग ₹100 प्रति लीटर मिलने वाली गैस अब ₹250 प्रति लीटर तक ब्लैक में खरीदी जा रही है।
● आटा, दाल, चावल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों के कारण मजदूरों को खाने में कटौती करनी पड़ रही है।
लकड़ी के चूल्हे का सहारा, स्वास्थ्य पर खतरा
गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण कई मजदूर अब लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। साथ ही, मकान मालिकों के साथ विवाद की स्थिति भी बन रही है।
सरकारी दावे जमीन पर नाकाफी
संगठनों का आरोप है कि पेट्रोल पंपों पर छोटे गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की सरकारी घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। वीकेआई क्षेत्र में 5 लीटर गैस सिलेंडर की कोई वास्तविक व्यवस्था नहीं है।
इसके अलावा, श्रमिक बस्तियों में अन्नपूर्णा रसोई का अभाव स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
बढ़ रहा पलायन और खाद्य संकट
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ एकल श्रमिकों ने अस्थायी रूप से क्षेत्र छोड़ना शुरू कर दिया है। मजदूरों को न तो सूखा राशन मिल रहा है और न ही सस्ती भोजन व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे खाद्य असुरक्षा बढ़ती जा रही है।
संगठनों की प्रमुख मांगें
संगठनों ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है:
● महंगी गैस की कालाबाजारी पर छापेमारी और कार्रवाई
● सभी पेट्रोल पंप और राशन दुकानों पर 5 लीटर गैस सिलेंडर की उपलब्धता
● मजदूरों के लिए विशेष गैस वितरण शिविर
● वीकेआई क्षेत्र, खासकर रोड नंबर 17 पर अन्नपूर्णा रसोई का संचालन
● राशन दुकानों के माध्यम से दाल, तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति
● मकान मालिकों द्वारा मजदूरों के उत्पीड़न पर रोक
● उद्योगों को मजदूरों के लिए बुनियादी सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश
प्रशासन का आश्वासन
जिला कलेक्टर संदेश नायक ने गैस आपूर्ति को लेकर इंडियन ऑयल से बात करने और कालाबाजारी पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, अन्नपूर्णा रसोई के विस्तार पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया।
जिला रसद अधिकारी प्रियव्रत सिंह चारण ने अपनी टीम के साथ तुरंत रणनीति बनाते हुए ब्लैक में गैस बेचने वाले दुकानों की सूची मांगी और पेट्रोल पंपों पर गैस उपलब्धता की समीक्षा की।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भी गैस संकट और सस्ती खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने पर विचार करने का आश्वासन दिया।
त्वरित कार्रवाई की जरूरत
संगठनों का कहना है कि जयपुर में वर्तमान 84 अन्नपूर्णा रसोई केंद्र पर्याप्त नहीं हैं और इन्हें वीकेआई, सांगानेर और सीतापुरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ाने की आवश्यकता है।
“मौजूदा स्थिति मजदूरों को भुखमरी और असुरक्षा की ओर धकेल रही है। सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे,” संगठनों ने कहा।
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यह मुद्दा श्रमिक पैरवी व अधिकार केंद्र जयपुर और पीयूसीएल (PUCL) द्वारा राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया गया। संगठनों ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, जिला कलेक्टर संदेश नायक और जिला रसद अधिकारी प्रियव्रत सिंह चारण को ज्ञापन सौंपा।
सर्वे में सामने आई भयावह स्थिति
13 अप्रैल को वीकेआई क्षेत्र की विभिन्न श्रमिक बस्तियों—जेएस कॉलोनी, युवराज विहार और श्रीराम उद्योग विहार—में किए गए सर्वे में कई गंभीर तथ्य सामने आए:
● क्षेत्र में 40,000 से अधिक प्रवासी मजदूर रह रहे हैं, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक सर्वे नहीं हुआ है।
● एलपीजी की कमी के कारण मजदूर भुखमरी और असुरक्षा के संकट से जूझ रहे हैं।
● पहले लगभग ₹100 प्रति लीटर मिलने वाली गैस अब ₹250 प्रति लीटर तक ब्लैक में खरीदी जा रही है।
● आटा, दाल, चावल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों के कारण मजदूरों को खाने में कटौती करनी पड़ रही है।
लकड़ी के चूल्हे का सहारा, स्वास्थ्य पर खतरा
गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण कई मजदूर अब लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। साथ ही, मकान मालिकों के साथ विवाद की स्थिति भी बन रही है।
सरकारी दावे जमीन पर नाकाफी
संगठनों का आरोप है कि पेट्रोल पंपों पर छोटे गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की सरकारी घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। वीकेआई क्षेत्र में 5 लीटर गैस सिलेंडर की कोई वास्तविक व्यवस्था नहीं है।
इसके अलावा, श्रमिक बस्तियों में अन्नपूर्णा रसोई का अभाव स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
बढ़ रहा पलायन और खाद्य संकट
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ एकल श्रमिकों ने अस्थायी रूप से क्षेत्र छोड़ना शुरू कर दिया है। मजदूरों को न तो सूखा राशन मिल रहा है और न ही सस्ती भोजन व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे खाद्य असुरक्षा बढ़ती जा रही है।
संगठनों की प्रमुख मांगें
संगठनों ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है:
● महंगी गैस की कालाबाजारी पर छापेमारी और कार्रवाई
● सभी पेट्रोल पंप और राशन दुकानों पर 5 लीटर गैस सिलेंडर की उपलब्धता
● मजदूरों के लिए विशेष गैस वितरण शिविर
● वीकेआई क्षेत्र, खासकर रोड नंबर 17 पर अन्नपूर्णा रसोई का संचालन
● राशन दुकानों के माध्यम से दाल, तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति
● मकान मालिकों द्वारा मजदूरों के उत्पीड़न पर रोक
● उद्योगों को मजदूरों के लिए बुनियादी सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश
प्रशासन का आश्वासन
जिला कलेक्टर संदेश नायक ने गैस आपूर्ति को लेकर इंडियन ऑयल से बात करने और कालाबाजारी पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, अन्नपूर्णा रसोई के विस्तार पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया।
जिला रसद अधिकारी प्रियव्रत सिंह चारण ने अपनी टीम के साथ तुरंत रणनीति बनाते हुए ब्लैक में गैस बेचने वाले दुकानों की सूची मांगी और पेट्रोल पंपों पर गैस उपलब्धता की समीक्षा की।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भी गैस संकट और सस्ती खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने पर विचार करने का आश्वासन दिया।
त्वरित कार्रवाई की जरूरत
संगठनों का कहना है कि जयपुर में वर्तमान 84 अन्नपूर्णा रसोई केंद्र पर्याप्त नहीं हैं और इन्हें वीकेआई, सांगानेर और सीतापुरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ाने की आवश्यकता है।
“मौजूदा स्थिति मजदूरों को भुखमरी और असुरक्षा की ओर धकेल रही है। सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे,” संगठनों ने कहा।
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