गुजरात के अशांत क्षेत्र कानून में संशोधन: कलेक्टरों को संपत्ति अपने नियंत्रण में लेने की व्यापक शक्तियां मिलीं

Written by sabrang india | Published on: March 28, 2026
गुजरात विधानसभा ने राज्य के विवादित ‘अशांत क्षेत्र’ कानून में संशोधन किया है। इन बदलावों के तहत अब इन इलाकों को ‘स्पेसिफाइड एरियाज’ कहा जाएगा और जिला कलेक्टरों को यहां संपत्ति अपने नियंत्रण में लेने तक की शक्तियां दी गई हैं।


साभार : इंडिया टुडे

गुजरात विधानसभा ने बुधवार, 25 मार्च को भाजपा शासित राज्य के विवादास्पद ‘अशांत क्षेत्र’ कानून में बहुमत से संशोधन पारित किया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नए संशोधनों के तहत अब इन इलाकों को ‘निर्दिष्ट क्षेत्र’ कहा जाएगा और जिला कलेक्टरों को यहां संपत्ति अपने नियंत्रण में लेने का अधिकार भी दिया गया है।

राज्य के राजस्व राज्यमंत्री संजयसिंह महीड़ा ने बताया कि इस कदम का मकसद ‘निर्दिष्ट क्षेत्रों में संपत्तियों के जबरन या बिना इच्छा के होने वाले हस्तांतरण को रोकना और वास्तविक मालिकों के हितों की सुरक्षा करना’ है।

‘गुजरात प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन इन डिस्टर्ब्ड एरियाज (संशोधन) विधेयक, 2026’ में ‘पीड़ित पक्ष’ की परिभाषा को और व्यापक किया गया है। इसके तहत कलेक्टरों को यह अधिकार दिया गया है कि वे किसी भी असंतुष्ट पक्ष की शिकायत मिलने पर संपत्ति के हस्तांतरण के मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू कर सकते हैं।

मंत्री के अनुसार, यदि संपत्ति का हस्तांतरण ‘आपत्तिजनक’ पाया जाता है, तो कलेक्टर को ऐसी संपत्ति अपने कब्जे में लेने का भी अधिकार होगा।

संशोधन में एक मॉनिटरिंग और सलाहकार समिति बनाने का प्रावधान भी जोड़ा गया है, जो सरकार को किसी क्षेत्र में संभावित सांप्रदायिक तनाव और उससे होने वाले ‘जबरन विस्थापन’ के बारे में सुझाव देगी।

इसके साथ ही ‘पीड़ित व्यक्तियों’ की परिभाषा का दायरा भी पहले से अधिक विस्तृत किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा कानून में किसी क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित करने के प्रावधान की जगह नया प्रावधान लाया गया है, जिसमें उन स्थितियों को भी शामिल किया जाएगा, जहां किसी क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव के कारण सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो।

चर्चा के दौरान भाजपा के कई विधायकों, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि और वेजलपुर के विधायक अमित ठाकर भी शामिल थे, ने दावा किया कि हिंदुओं को अपनी संपत्ति मुसलमानों को बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें पलायन करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अहमदाबाद की जनसंख्या संरचना बदलने की साजिश चल रही है।

विधानसभा के एकमात्र मुस्लिम विधायक इमरान खेड़ावाला ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि भाजपा विधायक वोट खोने के डर से ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं।

उन्होंने राज्य सरकार से यह भी मांग की कि अल्पसंख्यक समुदाय को उनकी जनसंख्या के अनुपात में जमीन आवंटित की जाए।

जमालपुर-खाड़िया से कांग्रेस विधायक खेड़ावाला ने कहा, “अगर भाजपा के 30 साल के शासन में गुजरात में शांति है, तो फिर नए इलाकों को डिस्टर्ब्ड एरियाज कानून में क्यों जोड़ा जा रहा है? पिछले कुछ वर्षों में 44 नए क्षेत्रों को इस कानून के तहत शामिल किया गया है।”

गुजरात का मौजूदा ‘अशांत क्षेत्र’ कानून अक्सर अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के गेट्टोआइजेशन को लेकर सवालों के घेरे में रहा है।

द वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में गुजरात की एक 15 वर्षीय मुस्लिम किशोरी ने आत्महत्या कर ली थी। उसके परिवार को अपने ही इलाके में घर खरीदने के बाद महीनों तक उत्पीड़न, हिंसा और धमकियों का सामना करना पड़ा था, जो इस कानून की पृष्ठभूमि में हुआ।

परिवार के अनुसार, पड़ोसियों ने उन्हें ‘डिस्टर्ब्ड एरियाज’ कानून के तहत कानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी, जिससे उनकी खरीद को अवैध ठहराया जा सकता है। इससे परिवार पुलिस कार्रवाई के लिए आगे बढ़ने से हिचकता रहा और उत्पीड़न झेलता रहा।

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