पुलिस ने श्याम मीरा सिंह को हिरासत में ले लिया। उनकी टीम के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए, रिकॉर्ड किए गए वीडियो डिलीट कर दिए गए और कैमरे की मेमोरी चिप भी फॉर्मेट कर दी गई। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जमानत मिलने के बाद श्याम ने इस पूरी घटना के बारे में जानकारी साझा की।

यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह ने बुधवार को नोएडा में आम लोगों के बीच जाकर एलपीजी सिलेंडर और बढ़ते बिजली बिल से जुड़ी समस्याओं पर ग्राउंड रिपोर्टिंग की। वे लोगों से बातचीत कर उनकी परेशानियों को रिकॉर्ड कर रहे थे। इसी दौरान नोएडा पुलिस वहां पहुंची और उन्हें रोक दिया। पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू की और उनकी पहचान के लिए आईडी मांगी। इस पर श्याम ने सवाल उठाया कि उनकी रिपोर्टिंग में दखल क्यों दिया जा रहा है।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, इस बहस के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। श्याम के अनुसार, पुलिस ने उनके खिलाफ "बदतमीजी" का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज की। थाने में टीम के तीनों सदस्यों के फोन जब्त कर लिए गए, रिकॉर्ड किए गए वीडियो डिलीट कर दिए गए और श्याम के कैमरे की मेमोरी चिप भी फॉर्मेट कर दी गई।
पूरे दिन थाने में बिठाए रखने के बाद शाम को उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई और रिहा कर दिया गया। श्याम मीरा सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा:
“आज मैं नोएडा में बिजली बिल/LPG पर ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए गया था। तभी नोएडा पुलिस ने मुझे रोका और पूछने लगी कि क्या कर रहे हो, आईडी दिखाओ। मैंने पूछा कि आप रिपोर्टिंग में हस्तक्षेप क्यों कर रहे हैं? इसी बात पर बहस हुई। इस पर नोएडा पुलिस मुझे थाने ले गई और मेरे खिलाफ कथित बदतमीजी की एफआईआर दर्ज कर दी। थाने में जिस तरह से पुलिस ने बदतमीजी की, उसका जिक्र भी क्या करूं। फिलहाल मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद मुझे जमानत पर छोड़ दिया गया है। लेकिन यह कितनी अजीब बात है कि रिपोर्टिंग करने पर पुलिस आती है, काम रोकती है और ऐसे धमकाती है जैसे हम नागरिक नहीं, पुलिस के गुलाम हों। पुलिस से सवाल करना गुस्ताखी हो गया है। एक सामान्य सी बात के लिए पूरे दिन थाने में बिठाया गया, मुकदमा किया गया और परेशान किया गया। आप सबके समर्थन के लिए आभारी हूं—आपके समर्थन की वजह से मैं बाहर आ सका।”
उन्होंने यह भी कहा कि नोएडा पुलिस ने उनकी टीम के तीनों सदस्यों के फोन जब्त किए, वीडियो डिलीट किए और उनके कैमरे की चिप को भी फॉर्मेट कर दिया।
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने इस घटना का विरोध करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “सवाल पूछने के जुर्म में @ShyamMeeraSingh को योगी जी की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें थाने लेकर गई है @noidapolice। सरकार की तानाशाही देखिए—पत्रकार सवाल करेगा तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी।”
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सर्वेश ने कहा, “सवाल करोगे तो सरकार गिरफ्तार कर देगी। यह डरपोक सरकार है।”
नोएडा पुलिस की सफाई
घटना को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ती बहस के बाद पुलिस ने एक पोस्ट साझा किया। इसमें किसी का नाम लिए बिना बताया गया कि 18 मार्च 2026 को थाना सेक्टर-58 क्षेत्र के सेक्टर-60 में काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने शांति बनाए रखने और ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू करने के लिए वहां मौजूद लोगों से किनारे चलने को कहा। पुलिस के अनुसार, इस दौरान दो व्यक्ति पुलिसकर्मियों से बहस करने लगे। उन्हें समझाने की कोशिश की गई, लेकिन शांत न होने पर दोनों को हिरासत में लेकर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
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द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, इस बहस के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। श्याम के अनुसार, पुलिस ने उनके खिलाफ "बदतमीजी" का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज की। थाने में टीम के तीनों सदस्यों के फोन जब्त कर लिए गए, रिकॉर्ड किए गए वीडियो डिलीट कर दिए गए और श्याम के कैमरे की मेमोरी चिप भी फॉर्मेट कर दी गई।
पूरे दिन थाने में बिठाए रखने के बाद शाम को उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई और रिहा कर दिया गया। श्याम मीरा सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा:
“आज मैं नोएडा में बिजली बिल/LPG पर ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए गया था। तभी नोएडा पुलिस ने मुझे रोका और पूछने लगी कि क्या कर रहे हो, आईडी दिखाओ। मैंने पूछा कि आप रिपोर्टिंग में हस्तक्षेप क्यों कर रहे हैं? इसी बात पर बहस हुई। इस पर नोएडा पुलिस मुझे थाने ले गई और मेरे खिलाफ कथित बदतमीजी की एफआईआर दर्ज कर दी। थाने में जिस तरह से पुलिस ने बदतमीजी की, उसका जिक्र भी क्या करूं। फिलहाल मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद मुझे जमानत पर छोड़ दिया गया है। लेकिन यह कितनी अजीब बात है कि रिपोर्टिंग करने पर पुलिस आती है, काम रोकती है और ऐसे धमकाती है जैसे हम नागरिक नहीं, पुलिस के गुलाम हों। पुलिस से सवाल करना गुस्ताखी हो गया है। एक सामान्य सी बात के लिए पूरे दिन थाने में बिठाया गया, मुकदमा किया गया और परेशान किया गया। आप सबके समर्थन के लिए आभारी हूं—आपके समर्थन की वजह से मैं बाहर आ सका।”
उन्होंने यह भी कहा कि नोएडा पुलिस ने उनकी टीम के तीनों सदस्यों के फोन जब्त किए, वीडियो डिलीट किए और उनके कैमरे की चिप को भी फॉर्मेट कर दिया।
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने इस घटना का विरोध करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “सवाल पूछने के जुर्म में @ShyamMeeraSingh को योगी जी की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें थाने लेकर गई है @noidapolice। सरकार की तानाशाही देखिए—पत्रकार सवाल करेगा तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी।”
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सर्वेश ने कहा, “सवाल करोगे तो सरकार गिरफ्तार कर देगी। यह डरपोक सरकार है।”
नोएडा पुलिस की सफाई
घटना को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ती बहस के बाद पुलिस ने एक पोस्ट साझा किया। इसमें किसी का नाम लिए बिना बताया गया कि 18 मार्च 2026 को थाना सेक्टर-58 क्षेत्र के सेक्टर-60 में काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने शांति बनाए रखने और ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू करने के लिए वहां मौजूद लोगों से किनारे चलने को कहा। पुलिस के अनुसार, इस दौरान दो व्यक्ति पुलिसकर्मियों से बहस करने लगे। उन्हें समझाने की कोशिश की गई, लेकिन शांत न होने पर दोनों को हिरासत में लेकर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
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