प्रधानमंत्री मोदी पर आधारित एक व्यंग्यात्मक कार्टून को लेकर द वायर का इंस्टाग्राम अकाउंट सोमवार शाम भारत में लगभग दो घंटे तक ब्लॉक रहा। इस मामले में मंत्रालय ने किसी भी तरह की ज़िम्मेदारी से इनकार किया, जबकि मेटा ने इसे एक “गलती” बताया। बिना किसी पूर्व सूचना के की गई इस कार्रवाई ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सेंसरशिप को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोमवार, 9 फ़रवरी की शाम द वायर का इंस्टाग्राम अकाउंट भारत में करीब दो घंटे तक ब्लॉक रहा। 13 लाख से अधिक फ़ॉलोअर्स वाला यह अकाउंट ख़बरों, विचारों और विश्लेषण के साथ-साथ हास्य और व्यंग्य के लिए सोशल मीडिया पर सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से फ़ॉलो किए जाने वाले न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म्स में शामिल है।
सोमवार शाम जब पाठकों ने द वायर का आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज खोलने की कोशिश की, तो उन्हें एक संक्षिप्त सूचना दिखाई दी, जिसमें कहा गया था कि यह अकाउंट “भारत में उपलब्ध नहीं है, क्योंकि कंटेंट को सीमित करने से जुड़े एक कानूनी अनुरोध का पालन किया गया है।”
हालाँकि, जिन उपयोगकर्ताओं के पास वीपीएन की सुविधा थी या जो भारत से बाहर मौजूद थे, वे द वायर के इंस्टाग्राम अकाउंट तक पहुँच पा रहे थे।
इस मामले में संपर्क किए जाने पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अधिकारियों ने द वायर से कहा, “हमने आपका अकाउंट ब्लॉक नहीं किया है।”
द वायर को अनौपचारिक रूप से यह जानकारी मिली है कि मंत्रालय ने मेटा से इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए 52 सेकंड के एक व्यंग्यात्मक कार्टून वीडियो को ब्लॉक करने का अनुरोध किया था। इसके बाद सोशल मीडिया कंपनी ने कथित तौर पर गलती से द वायर का पूरा इंस्टाग्राम हैंडल ही ब्लॉक कर दिया।
रात लगभग 8:30 बजे तक मुख्य अकाउंट की पहुँच बहाल कर दी गई थी, लेकिन संबंधित कार्टून तब भी इंस्टाग्राम पर उपलब्ध नहीं था। फेसबुक पर भी उस कार्टून की पहुँच को सीमित कर दिया गया है।
गौरतलब है कि भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क़ानून के तहत किसी भी कंटेंट को ब्लॉक करने से पहले संबंधित प्रकाशक को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है, सिवाय आपात स्थितियों के। यह व्यंग्यात्मक कार्टून 7 फ़रवरी को शाम 6:30 बजे इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स पर पोस्ट किया गया था।
फिलहाल यह कार्टून यूट्यूब और ब्लूस्काई पर देखा जा सकता है।
इस मामले पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा:
“मैं सभी पाठकों से अपील करता हूँ कि इस कार्टून को अधिक से अधिक साझा करें। नरेंद्र मोदी ने कभी कहा था, ‘मैं चाहता हूँ कि इस सरकार की आलोचना हो। आलोचना से लोकतंत्र मज़बूत होता है।’ लेकिन ‘56 प्रोडक्शंस’ द्वारा द वायर में प्रकाशित यह कार्टून जाहिर तौर पर ‘डियर लीडर’ को असहज कर गया, तभी तो उन्होंने अश्विनी वैष्णव से इसे इंस्टाग्राम पर ब्लॉक करवाने का आदेश दिलवाया, जहाँ यह तेज़ी से वायरल हो रहा था।”
संस्थापक संपादक ने उक्त कार्टून को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने की अपील की है।
उन्होंने आगे लिखा, “आईटी क़ानून के तहत, आपात स्थिति को छोड़कर सरकार को किसी भी सामग्री को ब्लॉक करने से पहले प्रकाशक को सूचना देना अनिवार्य है। द वायर को कोई सूचना नहीं दी गई। इसका मतलब यही है कि मोदी सरकार के लिए अब हँसी और व्यंग्य भी ‘आपात स्थिति’ बन चुके हैं।”
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब द वायर को इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा हो। मई 2025 में द वायर की वेबसाइट को मनमाने ढंग से पूरे एक दिन के लिए ब्लॉक कर दिया गया था। बाद में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने वेबसाइट की पहुँच बहाल तो कर दी, लेकिन उस ख़बर को हटाने की शर्त पर, जिसमें CNN द्वारा पाकिस्तान के उस दावे की रिपोर्ट की गई थी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसने एक भारतीय राफ़ेल लड़ाकू विमान को मार गिराया था।
मंत्रालय की ओर से 9 मई 2025 को रात 9:41 बजे भेजे गए एक ईमेल में कहा गया था कि thewire.in को उस वेबपेज पर प्रकाशित एक लेख के संबंध में प्राप्त ब्लॉकिंग अनुरोध के आधार पर रोका गया है। ईमेल में यह भी स्पष्ट किया गया था कि तकनीकी सीमाओं के कारण https वेबसाइटों के मामलों में किसी एक सब-पेज को नहीं, बल्कि पूरे डोमेन को ही ब्लॉक किया जा सकता है। इसके साथ ही द वायर से संबंधित सामग्री पर उचित कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई की जानकारी साझा करने को कहा गया था, ताकि वेबसाइट की पहुँच दोबारा बहाल की जा सके।
ताज़ा घटनाक्रम के मद्देनज़र द वायर ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा को पत्र लिखकर बिना किसी पूर्व सूचना के एक लोकप्रिय, विश्वसनीय और जानकारीपूर्ण प्लेटफ़ॉर्म को ब्लॉक किए जाने पर स्पष्टीकरण माँगा है।
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सोमवार, 9 फ़रवरी की शाम द वायर का इंस्टाग्राम अकाउंट भारत में करीब दो घंटे तक ब्लॉक रहा। 13 लाख से अधिक फ़ॉलोअर्स वाला यह अकाउंट ख़बरों, विचारों और विश्लेषण के साथ-साथ हास्य और व्यंग्य के लिए सोशल मीडिया पर सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से फ़ॉलो किए जाने वाले न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म्स में शामिल है।
सोमवार शाम जब पाठकों ने द वायर का आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज खोलने की कोशिश की, तो उन्हें एक संक्षिप्त सूचना दिखाई दी, जिसमें कहा गया था कि यह अकाउंट “भारत में उपलब्ध नहीं है, क्योंकि कंटेंट को सीमित करने से जुड़े एक कानूनी अनुरोध का पालन किया गया है।”
हालाँकि, जिन उपयोगकर्ताओं के पास वीपीएन की सुविधा थी या जो भारत से बाहर मौजूद थे, वे द वायर के इंस्टाग्राम अकाउंट तक पहुँच पा रहे थे।
इस मामले में संपर्क किए जाने पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अधिकारियों ने द वायर से कहा, “हमने आपका अकाउंट ब्लॉक नहीं किया है।”
द वायर को अनौपचारिक रूप से यह जानकारी मिली है कि मंत्रालय ने मेटा से इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए 52 सेकंड के एक व्यंग्यात्मक कार्टून वीडियो को ब्लॉक करने का अनुरोध किया था। इसके बाद सोशल मीडिया कंपनी ने कथित तौर पर गलती से द वायर का पूरा इंस्टाग्राम हैंडल ही ब्लॉक कर दिया।
रात लगभग 8:30 बजे तक मुख्य अकाउंट की पहुँच बहाल कर दी गई थी, लेकिन संबंधित कार्टून तब भी इंस्टाग्राम पर उपलब्ध नहीं था। फेसबुक पर भी उस कार्टून की पहुँच को सीमित कर दिया गया है।
गौरतलब है कि भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क़ानून के तहत किसी भी कंटेंट को ब्लॉक करने से पहले संबंधित प्रकाशक को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है, सिवाय आपात स्थितियों के। यह व्यंग्यात्मक कार्टून 7 फ़रवरी को शाम 6:30 बजे इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स पर पोस्ट किया गया था।
फिलहाल यह कार्टून यूट्यूब और ब्लूस्काई पर देखा जा सकता है।
इस मामले पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा:
“मैं सभी पाठकों से अपील करता हूँ कि इस कार्टून को अधिक से अधिक साझा करें। नरेंद्र मोदी ने कभी कहा था, ‘मैं चाहता हूँ कि इस सरकार की आलोचना हो। आलोचना से लोकतंत्र मज़बूत होता है।’ लेकिन ‘56 प्रोडक्शंस’ द्वारा द वायर में प्रकाशित यह कार्टून जाहिर तौर पर ‘डियर लीडर’ को असहज कर गया, तभी तो उन्होंने अश्विनी वैष्णव से इसे इंस्टाग्राम पर ब्लॉक करवाने का आदेश दिलवाया, जहाँ यह तेज़ी से वायरल हो रहा था।”
संस्थापक संपादक ने उक्त कार्टून को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने की अपील की है।
उन्होंने आगे लिखा, “आईटी क़ानून के तहत, आपात स्थिति को छोड़कर सरकार को किसी भी सामग्री को ब्लॉक करने से पहले प्रकाशक को सूचना देना अनिवार्य है। द वायर को कोई सूचना नहीं दी गई। इसका मतलब यही है कि मोदी सरकार के लिए अब हँसी और व्यंग्य भी ‘आपात स्थिति’ बन चुके हैं।”
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब द वायर को इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा हो। मई 2025 में द वायर की वेबसाइट को मनमाने ढंग से पूरे एक दिन के लिए ब्लॉक कर दिया गया था। बाद में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने वेबसाइट की पहुँच बहाल तो कर दी, लेकिन उस ख़बर को हटाने की शर्त पर, जिसमें CNN द्वारा पाकिस्तान के उस दावे की रिपोर्ट की गई थी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसने एक भारतीय राफ़ेल लड़ाकू विमान को मार गिराया था।
मंत्रालय की ओर से 9 मई 2025 को रात 9:41 बजे भेजे गए एक ईमेल में कहा गया था कि thewire.in को उस वेबपेज पर प्रकाशित एक लेख के संबंध में प्राप्त ब्लॉकिंग अनुरोध के आधार पर रोका गया है। ईमेल में यह भी स्पष्ट किया गया था कि तकनीकी सीमाओं के कारण https वेबसाइटों के मामलों में किसी एक सब-पेज को नहीं, बल्कि पूरे डोमेन को ही ब्लॉक किया जा सकता है। इसके साथ ही द वायर से संबंधित सामग्री पर उचित कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई की जानकारी साझा करने को कहा गया था, ताकि वेबसाइट की पहुँच दोबारा बहाल की जा सके।
ताज़ा घटनाक्रम के मद्देनज़र द वायर ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा को पत्र लिखकर बिना किसी पूर्व सूचना के एक लोकप्रिय, विश्वसनीय और जानकारीपूर्ण प्लेटफ़ॉर्म को ब्लॉक किए जाने पर स्पष्टीकरण माँगा है।
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