रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने जांच में पाया है कि आरएसएस कार्यकर्ता हिम्मत पाटीदार ने बीमा की रकम पाने के लिए अपनी हत्या की साजिश रची और मजदूर मदन मालवीय की हत्या कर चेहरे को बुरी तरह जला दिया, ताकि आसानी से पहचान न हो सके।

पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी ने सोमवार को बताया, ‘23 जनवरी को बिलपांक थाने के कमेड़ गांव के खेत में एक युवक की लाश मिली थी, जिसे हिम्मत पाटीदार का शव बताया गया था। हिम्मत के परिजनों ने भी शिनाख्त की। बाद में पुलिस ने मामले की जांच की और जो तथ्य सामने आए उससे हत्या का प्रकरण ही संदिग्ध हो गया।’
तिवारी के अनुसार, ‘जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि हिम्मत के खेत पर मदन मालवीय नामक व्यक्ति दो साल से मजदूरी करता था, जो 22 जनवरी की रात से लापता है। जब शव से लगभग 500 मीटर दूर मिले जूते और कपड़ों को मदन के पिता को दिखाया गया तो उन्होंने उसकी पहचान की, इससे मामला और गंभीर हो गया।’
तिवारी ने बताया, ‘जब मामला संदिग्ध हुआ तो पुलिस ने मृतक के कपड़े और अन्य सामग्री पोस्टमॉर्टम के बाद सुरक्षित रख लिया। बाद में उसे सागर स्थित लैब में भेजा गया जहां जांच में पुष्टि हुई है कि शव हिम्मत का न होकर मदन का था। फिलहाल हिम्मत फरार है, उसकी तलाश जारी है।’ पुलिस अधीक्षक तिवारी ने कहा, ‘जांच में सामने आया है कि हिम्मत पर बहुत कर्ज था और उसने दिसंबर 2018 में अपना बीमा कराया था। लिहाजा वह अपनी हत्या की साजिश रचकर परिवारवालों को बीमा की रकम दिलाना चाहता था।’
पुलिस विवेचना के दौरान पाया गया कि मृतक द्वारा दिनांक 23.01.2019 को रात्रि लगभग 4.30 बजे तक मोबाईल का लगातार उपयोग किया गया था, परंतु मृतक से बरामद मोबाईल की जांच सायबर सेल से कराने पर मृतक के मोबाईल से कॉल रिकार्ड, मैसेजेस, व्हाट्सएप मैसेज व गैलेरी से फोटो, वीडियो डिलीट होना पाया गया। इसी के साथ मृतक के खेत पर मृतक द्वारा मोटर चालू करना नहीं पाया
गया, जबकि रात 01.30 बजे मृतक को गांव के ही रमेश राठौर द्वारा अपनी मोटरसाइकिल पर देखा गया था।
इन सब तथ्यों से जांच टीम के सामने कई अनसुलझे सवाल थे, जैसे-
1.मृतक के जैकेट व पेन्ट की चैन खुली कैसे थी?
2.मृतक के शरीर पर अन्य कोई स्ट्रगल मार्क नहीं होना?
3.मृतक का सिर्फ चेहरा जलाया जाना?
4.पॉकेट डायरी में सिर्फ उन्हीं तथ्यों का खुलासा करना, जिनका फायदा मृतक के परिवार को मिले जैसे बीमा, एटीएम पिन एवं एफडी।
5.मृतक के मोबाईल फोन से व्हाट्सएप मैसेज, कॉल रिकार्डिंग, गैलेरी में से फोटो, वीडियो, हिस्ट्री इत्यादि डिलीट करना जबकि रात भर मोबाईल पर इंटरनेट का उपयोग किया गया हो ?
6.संदिग्ध का घटनास्थल के आसपास पहचान छुपाते हूए अपना सामान जैसे जूते, कपड़े छोड़ के जाना ?
7.हिम्मत द्वारा रात्रि में खेत पर जाना, जिसका चश्मदीद रमेश राठौर है, परंतु हिम्मत का अपने खेत पर पम्प न चालु करना ?
इन अनसुलझें सवालो के जवाबों के लिए पुलिस टीम द्वारा पुनः मौकास्थल का मुआयना किया गया एवं रात्रि काल में सीन ऑफ क्राइम रिक्रिएट करने का प्रयास किया गया । मृतक की शरीर की सुक्ष्मता से जांच फोटो एवं वीडियो के माध्यम से की गई एवं मृतक एवं संदेही के परिवारजनों से पृथक-पृथक कराई गई। जिसमें मदन के परिवारजनों द्वारा मृतक के अण्डरवियर मदन के होने की पुष्टि की गई। उक्त तथ्यों एवं घटनास्थल से प्राप्त महत्वपूर्ण साक्ष्यों का अवलोकन व विश्लेषण करने पर पाया गया कि मृतक हिम्मत पाटीदार न होकर मदन का शव हो सकता है।
गौरतलब है कि 23 जनवरी को बिलपांक थाना क्षेत्र के कमेड़ गांव के खेत में एक शव मिला था जिसे संघ कार्यकर्ता हिम्मत का बताया गया था। इस पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर जमकर हमले किए थे। लेकिन पुलिस जांच से मामला पलट गया।

पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी ने सोमवार को बताया, ‘23 जनवरी को बिलपांक थाने के कमेड़ गांव के खेत में एक युवक की लाश मिली थी, जिसे हिम्मत पाटीदार का शव बताया गया था। हिम्मत के परिजनों ने भी शिनाख्त की। बाद में पुलिस ने मामले की जांच की और जो तथ्य सामने आए उससे हत्या का प्रकरण ही संदिग्ध हो गया।’
तिवारी के अनुसार, ‘जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि हिम्मत के खेत पर मदन मालवीय नामक व्यक्ति दो साल से मजदूरी करता था, जो 22 जनवरी की रात से लापता है। जब शव से लगभग 500 मीटर दूर मिले जूते और कपड़ों को मदन के पिता को दिखाया गया तो उन्होंने उसकी पहचान की, इससे मामला और गंभीर हो गया।’
तिवारी ने बताया, ‘जब मामला संदिग्ध हुआ तो पुलिस ने मृतक के कपड़े और अन्य सामग्री पोस्टमॉर्टम के बाद सुरक्षित रख लिया। बाद में उसे सागर स्थित लैब में भेजा गया जहां जांच में पुष्टि हुई है कि शव हिम्मत का न होकर मदन का था। फिलहाल हिम्मत फरार है, उसकी तलाश जारी है।’ पुलिस अधीक्षक तिवारी ने कहा, ‘जांच में सामने आया है कि हिम्मत पर बहुत कर्ज था और उसने दिसंबर 2018 में अपना बीमा कराया था। लिहाजा वह अपनी हत्या की साजिश रचकर परिवारवालों को बीमा की रकम दिलाना चाहता था।’
पुलिस विवेचना के दौरान पाया गया कि मृतक द्वारा दिनांक 23.01.2019 को रात्रि लगभग 4.30 बजे तक मोबाईल का लगातार उपयोग किया गया था, परंतु मृतक से बरामद मोबाईल की जांच सायबर सेल से कराने पर मृतक के मोबाईल से कॉल रिकार्ड, मैसेजेस, व्हाट्सएप मैसेज व गैलेरी से फोटो, वीडियो डिलीट होना पाया गया। इसी के साथ मृतक के खेत पर मृतक द्वारा मोटर चालू करना नहीं पाया
गया, जबकि रात 01.30 बजे मृतक को गांव के ही रमेश राठौर द्वारा अपनी मोटरसाइकिल पर देखा गया था।
इन सब तथ्यों से जांच टीम के सामने कई अनसुलझे सवाल थे, जैसे-
1.मृतक के जैकेट व पेन्ट की चैन खुली कैसे थी?
2.मृतक के शरीर पर अन्य कोई स्ट्रगल मार्क नहीं होना?
3.मृतक का सिर्फ चेहरा जलाया जाना?
4.पॉकेट डायरी में सिर्फ उन्हीं तथ्यों का खुलासा करना, जिनका फायदा मृतक के परिवार को मिले जैसे बीमा, एटीएम पिन एवं एफडी।
5.मृतक के मोबाईल फोन से व्हाट्सएप मैसेज, कॉल रिकार्डिंग, गैलेरी में से फोटो, वीडियो, हिस्ट्री इत्यादि डिलीट करना जबकि रात भर मोबाईल पर इंटरनेट का उपयोग किया गया हो ?
6.संदिग्ध का घटनास्थल के आसपास पहचान छुपाते हूए अपना सामान जैसे जूते, कपड़े छोड़ के जाना ?
7.हिम्मत द्वारा रात्रि में खेत पर जाना, जिसका चश्मदीद रमेश राठौर है, परंतु हिम्मत का अपने खेत पर पम्प न चालु करना ?
इन अनसुलझें सवालो के जवाबों के लिए पुलिस टीम द्वारा पुनः मौकास्थल का मुआयना किया गया एवं रात्रि काल में सीन ऑफ क्राइम रिक्रिएट करने का प्रयास किया गया । मृतक की शरीर की सुक्ष्मता से जांच फोटो एवं वीडियो के माध्यम से की गई एवं मृतक एवं संदेही के परिवारजनों से पृथक-पृथक कराई गई। जिसमें मदन के परिवारजनों द्वारा मृतक के अण्डरवियर मदन के होने की पुष्टि की गई। उक्त तथ्यों एवं घटनास्थल से प्राप्त महत्वपूर्ण साक्ष्यों का अवलोकन व विश्लेषण करने पर पाया गया कि मृतक हिम्मत पाटीदार न होकर मदन का शव हो सकता है।
गौरतलब है कि 23 जनवरी को बिलपांक थाना क्षेत्र के कमेड़ गांव के खेत में एक शव मिला था जिसे संघ कार्यकर्ता हिम्मत का बताया गया था। इस पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर जमकर हमले किए थे। लेकिन पुलिस जांच से मामला पलट गया।