महिला पत्रकारों पर आपत्तिजनक पोस्ट: दिल्ली कोर्ट का अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश

Written by sabrang india | Published on: April 28, 2026
अदालत ने कहा कि ट्वीट्स में यौन-संकेत वाली बातें हैं और प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि उनका उद्देश्य किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना था; इसलिए एक्स अकाउंट और उससे जुड़े डिवाइस की पुलिस जांच करने का निर्देश दिया गया।



डिजिटल मंच पर ऑनलाइन दुर्व्यवहार और लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े एक अहम आदेश में, दिल्ली की एक अदालत ने 22 अप्रैल, 2026 को राजनीतिक टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। यह शिकायत न्यूज़लॉन्ड्री की संपादकीय निदेशक मनीषा पांडे और अन्य महिला पत्रकारों द्वारा दर्ज कराई गई थी। अदालत ने माना कि एक्स (पूर्व में Twitter) प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित विवादित सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसे संज्ञेय अपराध सामने आते हैं, जिनमें यौन-संकेत वाले बयान और महिलाओं की गरिमा का अपमान शामिल है।

शिकायत और आरोप

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत दायर यह अर्जी मनीषा पांडे ने छह शिकायतकर्ताओं की ओर से पेश की थी। ये सभी शिकायतकर्ता मीडिया पेशेवर हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री से जुड़े हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मित्रा ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट की एक श्रृंखला के जरिए बार-बार उनके बारे में यौन रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसमें उन्हें "वेश्या" कहना और उनके कार्यस्थल को बेहद आपत्तिजनक और नीचा दिखाने वाले शब्दों में प्रस्तुत करना शामिल है।

शिकायत में विशेष रूप से कई ट्वीट्स का हवाला दिया गया, जिनमें 28 अप्रैल, 2025 का एक ट्वीट भी शामिल था। इस ट्वीट में संगठन और उसकी महिला कर्मचारियों के खिलाफ स्पष्ट और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। 8 फरवरी, 2025 के एक अन्य ट्वीट में पांडे को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया गया था, जिसमें यौन रूप से स्पष्ट और अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं। इन पोस्ट के स्क्रीनशॉट अदालत के समक्ष रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किए गए थे।

अदालत के निष्कर्ष: "यौन-संकेत वाले बयान" और प्रथम दृष्टया अपराध

प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट भानु प्रताप सिंह ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री की जांच करने के बाद पाया कि ट्वीट्स की सामग्री स्पष्ट रूप से "यौन-संकेत वाले बयान" की श्रेणी में आती है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस्तेमाल की गई भाषा न केवल आपत्तिजनक थी, बल्कि शिकायतकर्ताओं की गरिमा को नीचा दिखाने और अपमानित करने का स्पष्ट इरादा भी दर्शाती है; विशेष रूप से इसलिए क्योंकि एक ट्वीट में मनीषा पांडे का नाम स्पष्ट रूप से लिया गया था।

इस आधार पर, अदालत ने माना कि दस्तावेजी सामग्री द्वारा समर्थित आरोप, प्रथम दृष्टया निम्नलिखित धाराओं के तहत संज्ञेय अपराधों का संकेत देते हैं:

● भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(3), जो यौन-संकेत वाले बयानों के लिए दंड का प्रावधान करती है, और

● BNS की धारा 79, जो किसी महिला की गरिमा का अपमान करने के इरादे से किए गए कृत्यों से संबंधित है।

कोर्ट के तर्क इस बात को रेखांकित करते हैं कि ऑनलाइन कही गई बात, जब यौन रूप से अपमानजनक और किसी को निशाना बनाने वाली हो, तो आपराधिक कानून के तहत इसके गंभीर दंडात्मक परिणाम हो सकते हैं।

साइबर संदर्भ में पुलिस जांच की आवश्यकता

कोर्ट के आदेश में पुलिस जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया, खासकर इसलिए क्योंकि कथित अपराधों की प्रकृति डिजिटल थी। यह देखते हुए कि ये कृत्य साइबरस्पेस में किए गए थे, कोर्ट ने माना कि जांच में हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि:

● उस एक्स अकाउंट की प्रामाणिकता और स्वामित्व की पुष्टि की जा सके, जिससे ट्वीट किए गए थे, और

● उस सामग्री को प्रकाशित करने के लिए इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का पता लगाया जा सके और उन्हें बरामद किया जा सके।

कोर्ट ने पुलिस की अपर्याप्त प्रतिक्रिया की आलोचना की

कोर्ट ने पुलिस द्वारा दायर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) पर भी असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने पाया कि रिपोर्ट में शिकायतकर्ताओं द्वारा जिन विशिष्ट ट्वीट्स का हवाला दिया गया था, उन पर विचार नहीं किया गया, जिसके कारण पुलिस की प्रतिक्रिया अधूरी और अपर्याप्त रही।

अपने निष्कर्षों के आधार पर, कोर्ट ने मालवीय नगर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को निर्देश दिया कि वे:

● BNS की धारा 75(3) और 79 के तहत अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करें, और

● 4 मई, 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) दायर करें।

इस प्रकार, BNSS की धारा 175(3) के तहत दायर आवेदन का निपटारा कर दिया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि की कार्यवाही

यह आपराधिक कार्यवाही दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे एक दीवानी मानहानि मुकदमे के साथ-साथ चल रही है, जिसमें शिकायतकर्ताओं ने सार्वजनिक माफी और 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। उस कार्यवाही में पत्रकारों ने कहा है कि मित्रा की पोस्ट न केवल मानहानिकारक थीं, बल्कि जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण भी थीं और उनका उद्देश्य उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा और गरिमा को नुकसान पहुंचाना था।

हाई कोर्ट ने इससे पहले आपत्तिजनक सामग्री का संज्ञान लिया था और कथित तौर पर मित्रा को फटकार लगाई थी, जिसके बाद संबंधित पोस्ट हटा दी गई थीं। मानहानि मुकदमे को खारिज करने की मांग वाला एक आवेदन अभी भी सुनवाई के लिए लंबित है।

यह आदेश यहां पढ़ा जा सकता है:




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