उत्तर प्रदेश के अमरोहा में सड़क पर प्रदर्शन करने वाले किसानों ने भाजपा सरकार के विरोध का नायाब तरीका ढूंढ निकाला है. जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के रसूलपुर गांव में एक बोर्ड लगा दिया गया है जिसमें लिखा है कि बीजेपी वालों का इस गांव में आना सख्त मना है। जान माल की स्वयं रक्षा करें।

गांव के बाहर लगा यह बोर्ड अब सोशल मीडिया और तमाम मंचों पर भी चर्चा का विषय बन गया है. बोर्ड पर किसान एकता के सौजन्य से लिखा गया है कि ” बीजेपी वालों का इस गांव में आना मना है, जान माल की स्वंय रक्षा करें.” बता दें कि लोकसभा चुनाव में अब ज्यादा समय बाकी नहीं है. ऐसे में इस तरह किसानों के विरोध करने का खामियाजा देश की नरेंद्र मोदी सरकार को भुगतना पड़ सकता है.
अगर हम उत्तर प्रदेश की ही बात करें तो काफी संख्या में किसान जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. वहीं राज्य के पश्चिमी भाग यानी वेस्ट यूपी में जाट वोटर्स की संख्या काफी अधिक है. जिसका बीजेपी पर सीधा असर लोकसभा चुनाव 2019 में देखने को मिल सकता है. इसका एक ताजा उदाहरण हाल ही में वेस्ट यूपी की कैराना सीट पर हु्आ उप-चुनाव भी है.
जहां बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था क्योंकि इलाके में रहने वाले जाट और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने महागठबंधन की प्रत्याशी तब्बसुम हसन का सपोर्ट किया था. बता दें कि कैराना साल 2014 बीजेपी कैंडिडेट हुकुम सिंह ने भारी भरकम जीत हासिल की थी. लेकिन कुछ समय पहले उनकी अचानक मृत्यु हो गई और इस सीट पर उप-चुनाव कराया गया.

गांव के बाहर लगा यह बोर्ड अब सोशल मीडिया और तमाम मंचों पर भी चर्चा का विषय बन गया है. बोर्ड पर किसान एकता के सौजन्य से लिखा गया है कि ” बीजेपी वालों का इस गांव में आना मना है, जान माल की स्वंय रक्षा करें.” बता दें कि लोकसभा चुनाव में अब ज्यादा समय बाकी नहीं है. ऐसे में इस तरह किसानों के विरोध करने का खामियाजा देश की नरेंद्र मोदी सरकार को भुगतना पड़ सकता है.
अगर हम उत्तर प्रदेश की ही बात करें तो काफी संख्या में किसान जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. वहीं राज्य के पश्चिमी भाग यानी वेस्ट यूपी में जाट वोटर्स की संख्या काफी अधिक है. जिसका बीजेपी पर सीधा असर लोकसभा चुनाव 2019 में देखने को मिल सकता है. इसका एक ताजा उदाहरण हाल ही में वेस्ट यूपी की कैराना सीट पर हु्आ उप-चुनाव भी है.
जहां बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था क्योंकि इलाके में रहने वाले जाट और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने महागठबंधन की प्रत्याशी तब्बसुम हसन का सपोर्ट किया था. बता दें कि कैराना साल 2014 बीजेपी कैंडिडेट हुकुम सिंह ने भारी भरकम जीत हासिल की थी. लेकिन कुछ समय पहले उनकी अचानक मृत्यु हो गई और इस सीट पर उप-चुनाव कराया गया.