नासिक: महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक और किसान ने कर्ज के कारण शनिवार को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। स्थानीय अधिकारियों ने दावा किया कि मौजूदा वर्ष में इस क्षेत्र में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 108 पर पहुंच गई है।

तहसीलदार ज्योति देवरे ने बताया कि नीलेश धर्मराज हयालिज (28) ने जिले के मालेगांव इलाके में मौजे-वजीरखेड़े गांव में शनिवार को सुबह करीब नौ बजे फांसी लगा ली। उस पर चार लाख रुपये का कर्ज बकाया था। वडनेर-खाकुर्दी पुलिस ने किसान की मौत के संबंध में एक मामला दर्ज किया है और वह घटना के कारणों का पता लगा रही है।
पुलिस ने बताया कि 12 दिसंबर को यहां नंदगांव तहसील में 40 वर्षीय किसान ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी और उसके पास से बरामद एक नोट में यह लिखा हुआ था कि उन्होंने एक बैंक और क्रेडिट सोसायटी से कर्ज लिया था। नासिक जिलाधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि जिले में 2018 में 108 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से 15 किसानों ने नवंबर में और नौ ने दिसंबर में आत्महत्या की।
अधिकारियों ने बताया कि इन किसानों के परिजन से की गई पूछताछ में पता चला कि कर्ज, इस मानसून में बारिश कम होना और फसल बर्बाद होना इन आत्महत्याओं की वजह हैं। नासिक में प्याज़ का सही दाम न मिलने से दो किसानों ने आत्महत्या कर ली थी।
नासिक जिले में कर्ज और कम कीमत मिलने के कारण बीते दिनों दो प्याज किसानों ने आत्महत्या कर लिया था। मृतकों की पहचान तात्याभाउ खैरनर (44) और मनोज धोंडगे (33) के तौर पर हुई थी। वे उत्तर महाराष्ट्र के बागलाण तालुका के रहने वाले हैं।
नासिक जिले का भारत में प्याज उत्पादन का 50 प्रतिशत हिस्सा है। जिले के किसान दावा कर रहे हैं कि अच्छी फसल होने के कारण उन्हें उनकी उपज की अच्छी कीमत नहीं मिल रही है।
मृतक के रिश्तेदारों ने दावा किया कि वह कम कीमत मिलने की वजह से अपनी 500 क्विंटल प्याज बेच नहीं पा रहे थे। मृतक किसान के परिवार ने बताया कि खैरनर पर 11 लाख रुपये का बकाया कर्ज था।
एक अन्य मामले में 33 वर्षीय मनोज धोंडगे ने जहरीला रसायन पीकर शुक्रवार को कथित रूप से खुदकुशी कर ली। धोंडगे के परिवार ने बताया कि उनपर 21 लाख रुपये का बकाया कर्ज था और वह थोक बजार में प्याज की कम कीमत मिलने की वजह से अपनी उपज बेच नहीं पाए।

तहसीलदार ज्योति देवरे ने बताया कि नीलेश धर्मराज हयालिज (28) ने जिले के मालेगांव इलाके में मौजे-वजीरखेड़े गांव में शनिवार को सुबह करीब नौ बजे फांसी लगा ली। उस पर चार लाख रुपये का कर्ज बकाया था। वडनेर-खाकुर्दी पुलिस ने किसान की मौत के संबंध में एक मामला दर्ज किया है और वह घटना के कारणों का पता लगा रही है।
पुलिस ने बताया कि 12 दिसंबर को यहां नंदगांव तहसील में 40 वर्षीय किसान ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी और उसके पास से बरामद एक नोट में यह लिखा हुआ था कि उन्होंने एक बैंक और क्रेडिट सोसायटी से कर्ज लिया था। नासिक जिलाधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि जिले में 2018 में 108 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से 15 किसानों ने नवंबर में और नौ ने दिसंबर में आत्महत्या की।
अधिकारियों ने बताया कि इन किसानों के परिजन से की गई पूछताछ में पता चला कि कर्ज, इस मानसून में बारिश कम होना और फसल बर्बाद होना इन आत्महत्याओं की वजह हैं। नासिक में प्याज़ का सही दाम न मिलने से दो किसानों ने आत्महत्या कर ली थी।
नासिक जिले में कर्ज और कम कीमत मिलने के कारण बीते दिनों दो प्याज किसानों ने आत्महत्या कर लिया था। मृतकों की पहचान तात्याभाउ खैरनर (44) और मनोज धोंडगे (33) के तौर पर हुई थी। वे उत्तर महाराष्ट्र के बागलाण तालुका के रहने वाले हैं।
नासिक जिले का भारत में प्याज उत्पादन का 50 प्रतिशत हिस्सा है। जिले के किसान दावा कर रहे हैं कि अच्छी फसल होने के कारण उन्हें उनकी उपज की अच्छी कीमत नहीं मिल रही है।
मृतक के रिश्तेदारों ने दावा किया कि वह कम कीमत मिलने की वजह से अपनी 500 क्विंटल प्याज बेच नहीं पा रहे थे। मृतक किसान के परिवार ने बताया कि खैरनर पर 11 लाख रुपये का बकाया कर्ज था।
एक अन्य मामले में 33 वर्षीय मनोज धोंडगे ने जहरीला रसायन पीकर शुक्रवार को कथित रूप से खुदकुशी कर ली। धोंडगे के परिवार ने बताया कि उनपर 21 लाख रुपये का बकाया कर्ज था और वह थोक बजार में प्याज की कम कीमत मिलने की वजह से अपनी उपज बेच नहीं पाए।