मनरेगा की जगह ‘VB-G RAM G’ लागू होने के दो महीने बाद भी 57 लाख सक्रिय श्रमिकों का ई-केवाईसी लंबित: रिपोर्ट

Written by sabrang india | Published on: August 31, 2026
9 अगस्त 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में वीबी-जी राम जी योजना के तहत महज 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार सृजित हुआ। यह पिछले साल इसी महीने मनरेगा के तहत सृजित 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार की तुलना में 49.94 फीसदी कम है।


फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स/मुल्क सिंह

नई ग्रामीण रोजगार योजना ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी राम जी) शुरू हुए दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन करीब 57 लाख सक्रिय श्रमिक अब भी ई-केवाईसी सत्यापन का इंतजार कर रहे हैं। यह जानकारी द हिंदू की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

यह नई योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह लागू की गई है।

द वायर ने लिखा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित जॉब कार्ड तब तक वैध रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। इसका उद्देश्य रोजगार तक निर्बाध पहुंच और मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक नई योजना शुरू होने के दो महीने बाद तक पंजीकृत श्रमिकों में से केवल 71 फीसदी का ही ई-केवाईसी सत्यापन हो सका था। वहीं, सक्रिय श्रमिकों—यानी ऐसे श्रमिक जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार काम किया है—के ई-केवाईसी सत्यापन की दर 94.88 फीसदी रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बावजूद करीब 57 लाख श्रमिकों का ई-केवाईसी सत्यापन अब भी लंबित है।

9 अगस्त 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में वीबी-जी राम जी योजना के तहत महज 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिवस (person-days) रोजगार सृजित हुआ। यह पिछले साल जुलाई में मनरेगा के तहत सृजित 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिवस की तुलना में 49.94 फीसदी कम है।

व्यक्ति-दिवस काम की मात्रा को मापने की एक इकाई है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति ने एक कार्यदिवस में जितना काम किया हो।

सरकार ने कुछ मामलों में ई-केवाईसी सत्यापन पूरा नहीं होने के बावजूद जॉब कार्डधारकों को रोजगार देने की अनुमति दी है। हालांकि, इसके साथ ही वीबी-जी राम जी योजना के तहत काम पाने के लिए ई-केवाईसी सत्यापन को अनिवार्य शर्त भी बनाया गया है।

नेशनल कैंपेन फॉर पीपल्स राइट टू इंफॉर्मेशन (एनसीपीआरआई) के चक्रधर बुद्धा द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन से यह जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक, 30 जनवरी को हुई एक बैठक में मंत्रालय ने राज्यों को नई वीबी-जी राम जी व्यवस्था के तहत बदलावों के बीच शेष सभी सक्रिय श्रमिकों का ई-केवाईसी सत्यापन एक सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था।

राज्यों को 12 फरवरी को भी महीने के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया था। लेकिन सात महीने बाद भी आंकड़े बताते हैं कि यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मनरेगा में सबसे अधिक श्रमिकों वाले चार राज्यों में तमिलनाडु में दोनों श्रेणियों में ई-केवाईसी सत्यापन की दर सबसे ज्यादा है। राज्य में 99.32 फीसदी सक्रिय श्रमिकों और 84.89 फीसदी पंजीकृत श्रमिकों का ई-केवाईसी सत्यापन पूरा हो चुका है।

इसके बाद राजस्थान का स्थान है, जहां सक्रिय और पंजीकृत श्रमिकों में ई-केवाईसी सत्यापन की दर क्रमशः 95.66 फीसदी और 69.45 फीसदी है। वहीं, उत्तर प्रदेश में यह दर 94.21 फीसदी और 58.89 फीसदी, जबकि आंध्र प्रदेश में 90.4 फीसदी और 82.32 फीसदी है।

बिहार में 89.19 फीसदी सक्रिय श्रमिकों का ई-केवाईसी सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि सभी पंजीकृत श्रमिकों में यह दर 58.05 फीसदी है। बड़े राज्यों में पंजीकृत श्रमिकों के ई-केवाईसी सत्यापन के मामले में बिहार की दर सबसे कम राज्यों में शामिल है।

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-G RAM G) के शुरुआती दो महीनों में कई प्रशासनिक, तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। जमीनी स्तर के अधिकारी उस नए सिस्टम को अपनाने में संघर्ष कर रहे हैं जिसने दो दशक पुराने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) की जगह ली है।

यह नई स्कीम 1 जुलाई को लागू हुई थी। कर्नाटक ने शुरू में इस स्कीम का विरोध किया था, लेकिन 23 जुलाई से इसे लागू करना शुरू कर दिया।

स्कीम लागू करने में देरी के अलावा, नए फंडिंग पैटर्न, सेंट्रलाइज्ड सिस्टम के जरिए एक्शन प्लान की मंजूरी और काम पूरा करने के लिए सख्त प्रक्रियाओं जैसी संरचनात्मक बाधाओं ने ग्रामीण इलाकों में काम पैदा करने की प्रक्रिया को बाधित किया है।

कोप्पल के एक पंचायत विकास अधिकारी (PDO) ने कहा, “MGNREGA एक डिमांड-बेस्ड (मांग पर आधारित) सिस्टम था, लेकिन VB-G RAM G के लिए केंद्र सरकार से पहले मंजूरी लेनी पड़ती है। ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद, एक्शन प्लान की मंजूरी मिलने में कम से कम 3-4 दिन लग जाते हैं।” उन्होंने कहा कि इससे मजदूरों पर असर पड़ रहा है।

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