कहीं पे गैया कहीं पे दंगा, मत लो सरकार से पंगा, JNU'नियन या राष्ट्रदोही बताकर कस देंगे ये जेल का फंदा

Written by Mithun Prajapati | Published on: March 9, 2018
आई मूर्ति पर विपदा भारी
अम्बेडकर और गांधी की तोड़े
लेनिन को भी अब  नहीं छोड़े
भगतसिंह भी खतरे में दिखते
शाषक आया अत्याचारी
आई मूर्ति पर विपदा भारी।


कर्ज में डूबे किसान हैं मरते
बच्चे ऑक्सीजन बिन तड़पे
खाने को कहीं भात नहीं है
लाला सरकारी गल्ला है हड़पे
राष्ट्रवाद के नारे में ढ़ककर
चंदन तस्करी करे भगवाधारी
आई मूर्ति पर विपदा भारी।

कहीं पर गैया कहीं पर दंगा
मत लो तुम सरकार से पंगा
'जेएनयू'नियन' या राष्ट्रद्रोही बताकर
कस देंगे ये जेल का फंदा
भक्तिभाव में अंधे हुए सब
क्या जनता क्या अधिकारी
आई मूर्ति पर विपदा भारी

माल्या भागा नीरव भागा
तब भी न साहब  नींद से जागा
लच्छेदार भाषण में फंसकर
तड़प रहा अर्थतंत्र अभागा
सूखी रोटी जनता तोड़े
साहब मशरूम तीस हजारी
आई मूर्ति पर विपदा भारी।

बाकी ख़बरें