पश्चिम बंगाल में महिलाओं, मुस्लिमों और बांग्ला मानुष पर अपनी पकड़ बरकरार रखने में ममता कामयाब रही तो केरल में 40 साल बाद विजयन ने इतिहास रच दिया है। तमिलनाडु में डीएमके जीत रही है तो असम में बीजेपी की वापसी हुई हैं लेकिन पूरे देश की नजरें तो ममता और पश्चिम बंगाल पर ही लगी हैं। जहां ममता महिलाओं और अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों के बीच भरोसा कायम रखने में कामयाब रहीं वहीं, बीजेपी को कोई रोक सकता है तो वो ममता हैं, की बात पुख्ता होने के साथ ही राजनीति में ममता की देशव्यापी भूमिका पर भी परिणाम मुहर लगाते दिखते हैं।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी की केंद्र की पूरी ताकत के साथ ध्रुवीकरण की कोशिश की काट करने के लिए 'बंगाल को चाहिए अपनी बेटी' का नारा देकर महिला वोटरों को बड़े पैमाने पर अपने पाले में खींचा। बीजेपी के पास न तो मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा था और ना ही कोई तेजतर्रार महिला नेता जो ममता को उनकी शैली में जवाब दे पाता। बीजेपी के बाहरी नेताओं के ममता बनर्जी पर सीधे हमले के मुद्दे को भुनाते हुए टीएमसी ने बांग्ला संस्कृति, बांग्लाभाषा और अस्मिता के फैक्टर को हर जगह उभारा। तो वही मुस्लिमों ने भी लेफ्ट-कांग्रेस के साथ शामिल इंडियन सेकुलर फ्रंट की जगह बीजेपी को हराने के लिए एकतरफा टीएमसी के लिए वोट किया और वोटों के बंटवारे की विपक्ष की रणनीति धरी की धरी रह गई।
बीजेपी की भारीभरकम चुनावी मशीनरी का अकेले मुकाबला कर रहीं ममता बनर्जी का नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान घायल हो जाना निर्णायक बातों में रहा। ममता बनर्जी ने चोट के बावजूद व्हीलचेयर पर जिस तरह से लगातार धुआंधार प्रचार किया और बीजेपी नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक हमला बोला। उससे यह छवि बनी कि घायल शेरनी ज्यादा मजबूती से मोर्चा संभाले हुए हैं। ऐसे में सहानुभूति की फैक्टर उनके पक्ष में गया। यही नहीं, ममता बनर्जी पर पीएम मोदी, अमित शाह जैसे बड़े केंद्रीय नेताओं का सीधा हमला भी उनके लिए सहानुभूति का काम कर गया। दीदी ओ दीदी, दो मई-दीदी गईं, दीदी की स्कूटी नंदीग्राम में गिर गई जैसे बयान बीजेपी पर उल्टे पड़े। बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष का बरमूडा वाला बयान भी महिलाओं के बीच अच्छा संदेश नहीं गया।
दूसरी ओर, बीजेपी की बंगाल में रणनीति साफ थी कि वो 70-30 के ध्रुवीकरण के फार्मूले को धार दे रही थी, लेकिन TMC नेताओं और ममता ने बहुत सावधानी से हर रैली में जोरशोर से कहा कि बीजेपी बंगाल को बांटने की साजिश रच रही है। ममता बनर्जी ने खुद मंदिरों के साथ मस्जिदों में भी जाने का सियासी जोखिम लिया। कट्टर बीजेपी विरोधी वोट इस कारण एकमुश्त तरीके से टीएमसी के पाले में चला गया। इसके साथ ही दलितों-पिछड़ों के लिए कल्याणकारी योजनाओं से भी ममता सत्ता विरोधी लहर को काबू में रखने में कामयाब रहीं और दलित पिछड़ी वोटों में टीएमसी ने बड़ा हिस्सा झटकने में कामयाबी पाईं।
केरल में 40 साल बाद बना इतिहास
केरल के शुरुआती रुझान लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की वापसी के संकेत दे रहे हैं। अगर यही रुझान चुनावी परिणाम में तब्दील हुए तो 40 साल बाद राज्य में कोई पार्टी लगातार दूसरा चुनाव जीतेगी। अब तक के आए रुझान में एलडीएफ गठबंधन 90 सीट पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ फ्रंट इस समय 47 सीटों पर आगे चल रही है। बीजेपी और उसके सहयोगी दल 3 सीट पर आगे हैं। मेट्रो मैन ई श्रीधरन अपनी सीट पर लीड कर रहे हैं। 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को महज एक सीट ही मिली थी।
असम विधानसभा चुनाव में अब तक के जो रुझान सामने आए हैं, उसके हिसाब से असम में एक बार फिर से बीजेपी सरकार बनाती हुई दिखाई दे रही है। बीजेपी गठबंधन रुझानों में 81 सीटों पर आगे चल रहा है। पिछली बार के मुकाबले यह सात सीटें अधिक हैं। वहीं, कांग्रेस गठबंधन को 45 सीटों पर बढ़त हासिल है।
तमिलनाडु के 2021 के विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ AIADMK गठबंधन और विपक्षी DMK गठबंधन एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे है। चुनाव आयोग के अनुसार, सत्तारूढ़ AIADMK 35 निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रही है, जबकि उसके सहयोगी दल BJP 3 और PMK 5 सीटों पर आगे है। दूसरी ओर, DMK 38 सीटों पर और उसके दो वाम सहयोगी और VCK एक सीट पर आगे चल रहे हैं, जबकि कांग्रेस 3 सीटों पर आगे चल रही है। इस बीच, MNM पार्टी के संस्थापक और अभिनेता कमल हासन कोयंबटूर (दक्षिण) निर्वाचन क्षेत्र में अग्रणी हैं।
पश्चिम बंगाल चुनावी रुझान
TMC+214
भाजपा+76
अन्य+2
तमिलनाडु चुनावी रुझान
AIDMK+77
DMK+157
केरल चुनावी रुझान
लेफ्ट+ 98
कांग्रेस+41
भाजपा+3
पांडुचेरी चुनावी रुझान
भाजपा+8
कांग्रेस+3
आसाम चुनावी रुझान
भाजपा+81
कांग्रेस+45

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी की केंद्र की पूरी ताकत के साथ ध्रुवीकरण की कोशिश की काट करने के लिए 'बंगाल को चाहिए अपनी बेटी' का नारा देकर महिला वोटरों को बड़े पैमाने पर अपने पाले में खींचा। बीजेपी के पास न तो मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा था और ना ही कोई तेजतर्रार महिला नेता जो ममता को उनकी शैली में जवाब दे पाता। बीजेपी के बाहरी नेताओं के ममता बनर्जी पर सीधे हमले के मुद्दे को भुनाते हुए टीएमसी ने बांग्ला संस्कृति, बांग्लाभाषा और अस्मिता के फैक्टर को हर जगह उभारा। तो वही मुस्लिमों ने भी लेफ्ट-कांग्रेस के साथ शामिल इंडियन सेकुलर फ्रंट की जगह बीजेपी को हराने के लिए एकतरफा टीएमसी के लिए वोट किया और वोटों के बंटवारे की विपक्ष की रणनीति धरी की धरी रह गई।
बीजेपी की भारीभरकम चुनावी मशीनरी का अकेले मुकाबला कर रहीं ममता बनर्जी का नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान घायल हो जाना निर्णायक बातों में रहा। ममता बनर्जी ने चोट के बावजूद व्हीलचेयर पर जिस तरह से लगातार धुआंधार प्रचार किया और बीजेपी नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक हमला बोला। उससे यह छवि बनी कि घायल शेरनी ज्यादा मजबूती से मोर्चा संभाले हुए हैं। ऐसे में सहानुभूति की फैक्टर उनके पक्ष में गया। यही नहीं, ममता बनर्जी पर पीएम मोदी, अमित शाह जैसे बड़े केंद्रीय नेताओं का सीधा हमला भी उनके लिए सहानुभूति का काम कर गया। दीदी ओ दीदी, दो मई-दीदी गईं, दीदी की स्कूटी नंदीग्राम में गिर गई जैसे बयान बीजेपी पर उल्टे पड़े। बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष का बरमूडा वाला बयान भी महिलाओं के बीच अच्छा संदेश नहीं गया।
दूसरी ओर, बीजेपी की बंगाल में रणनीति साफ थी कि वो 70-30 के ध्रुवीकरण के फार्मूले को धार दे रही थी, लेकिन TMC नेताओं और ममता ने बहुत सावधानी से हर रैली में जोरशोर से कहा कि बीजेपी बंगाल को बांटने की साजिश रच रही है। ममता बनर्जी ने खुद मंदिरों के साथ मस्जिदों में भी जाने का सियासी जोखिम लिया। कट्टर बीजेपी विरोधी वोट इस कारण एकमुश्त तरीके से टीएमसी के पाले में चला गया। इसके साथ ही दलितों-पिछड़ों के लिए कल्याणकारी योजनाओं से भी ममता सत्ता विरोधी लहर को काबू में रखने में कामयाब रहीं और दलित पिछड़ी वोटों में टीएमसी ने बड़ा हिस्सा झटकने में कामयाबी पाईं।
केरल में 40 साल बाद बना इतिहास
केरल के शुरुआती रुझान लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की वापसी के संकेत दे रहे हैं। अगर यही रुझान चुनावी परिणाम में तब्दील हुए तो 40 साल बाद राज्य में कोई पार्टी लगातार दूसरा चुनाव जीतेगी। अब तक के आए रुझान में एलडीएफ गठबंधन 90 सीट पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ फ्रंट इस समय 47 सीटों पर आगे चल रही है। बीजेपी और उसके सहयोगी दल 3 सीट पर आगे हैं। मेट्रो मैन ई श्रीधरन अपनी सीट पर लीड कर रहे हैं। 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को महज एक सीट ही मिली थी।
असम विधानसभा चुनाव में अब तक के जो रुझान सामने आए हैं, उसके हिसाब से असम में एक बार फिर से बीजेपी सरकार बनाती हुई दिखाई दे रही है। बीजेपी गठबंधन रुझानों में 81 सीटों पर आगे चल रहा है। पिछली बार के मुकाबले यह सात सीटें अधिक हैं। वहीं, कांग्रेस गठबंधन को 45 सीटों पर बढ़त हासिल है।
तमिलनाडु के 2021 के विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ AIADMK गठबंधन और विपक्षी DMK गठबंधन एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे है। चुनाव आयोग के अनुसार, सत्तारूढ़ AIADMK 35 निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रही है, जबकि उसके सहयोगी दल BJP 3 और PMK 5 सीटों पर आगे है। दूसरी ओर, DMK 38 सीटों पर और उसके दो वाम सहयोगी और VCK एक सीट पर आगे चल रहे हैं, जबकि कांग्रेस 3 सीटों पर आगे चल रही है। इस बीच, MNM पार्टी के संस्थापक और अभिनेता कमल हासन कोयंबटूर (दक्षिण) निर्वाचन क्षेत्र में अग्रणी हैं।
पश्चिम बंगाल चुनावी रुझान
TMC+214
भाजपा+76
अन्य+2
तमिलनाडु चुनावी रुझान
AIDMK+77
DMK+157
केरल चुनावी रुझान
लेफ्ट+ 98
कांग्रेस+41
भाजपा+3
पांडुचेरी चुनावी रुझान
भाजपा+8
कांग्रेस+3
आसाम चुनावी रुझान
भाजपा+81
कांग्रेस+45