गांव के निवासी प्रतीक भौमिक के निधन के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग अंतिम संस्कार की व्यवस्था में सहयोग के लिए आगे आए। ग्रामीणों ने मिलकर शव को कंधा दिया और यह सुनिश्चित किया कि हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार सार्वजनिक श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाए।

Imge Credit : Awaz The Voice
असम के बोंगाईगांव जिले के अंबारी-परेरचार गांव में सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक एकता की एक प्रेरक मिसाल देखने को मिली, जहां स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर एक हिंदू युवक का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार कराया।
यह घटना अंबारी-परेरचार गांव में हुई, जो श्रीजंग्राम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला मुस्लिम-बहुल इलाका है।
इंडिया टुडे नॉर्थ ईस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, गांव के निवासी प्रतीक भौमिक के निधन के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग अंतिम संस्कार की व्यवस्था में सहयोग के लिए आगे आए। ग्रामीणों ने मिलकर शव को कंधा दिया और यह सुनिश्चित किया कि हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार सार्वजनिक श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाए।
धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर किए गए इस मानवीय प्रयास ने पूरे क्षेत्र का ध्यान आकर्षित किया है। कई लोग इसे विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सम्मान, सहयोग और सौहार्द की मिसाल के रूप में देख रहे हैं।
ऐसे समय में जब देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक ध्रुवीकरण और सामाजिक विभाजन को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं, अंबारी-परेरचार गांव की यह पहल इंसानियत, सामाजिक एकजुटता और सांप्रदायिक सद्भाव का सकारात्मक संदेश देती है।
ज्ञात हो कि कुछ सप्ताह पहले दिल्ली में लगी भीषण आग के दौरान भी कई मुस्लिम युवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
जब दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लोरिश स्टे B&B’ में भीषण आग लगी, जिसमें करीब 21 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए, तब स्थानीय लोग बिना किसी औपचारिक बचाव उपकरण के ही असली नायक बनकर सामने आए।
अफरा-तफरी और भय के माहौल में उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना इमारत में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश की। कई लोग धुएं और आग की लपटों से बचने के लिए ऊपरी मंजिलों से कूदने को मजबूर हो गए थे।
यह आग मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित पांच मंजिला ‘बेड-एंड-ब्रेकफास्ट’ (B&B) इमारत में लगी थी। देखते ही देखते पूरी इमारत घने धुएं से भर गई, जिससे कई मेहमान अंदर फंस गए।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जब लोग मदद के लिए पुकार रहे थे और कुछ लोग खिड़कियों से कूदने की कोशिश कर रहे थे, तब आपातकालीन सेवाओं के पहुंचने से पहले ही स्थानीय निवासी मौके पर बचाव कार्य में जुट गए।
मोहम्मद अफज़ल
इनमें मोहम्मद अफज़ल भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि मौके पर पहुंचने के कुछ ही मिनटों के भीतर स्थानीय लोगों ने बचाव के लिए तत्काल उपाय शुरू कर दिए।
अफज़ल ने कहा, “जब मैं और मेरे भाई सुबह यहां पहुंचे, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। हमने तुरंत सड़क के उस पार स्थित एक दुकान से गद्दे लाकर एक सुरक्षित ‘लैंडिंग ज़ोन’ तैयार किया। हमने लोगों से कूदने के लिए कहा। कुछ लोग सुरक्षित उतरने में सफल रहे, जबकि कुछ ऐसा नहीं कर सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोगों ने बचने के अन्य तरीके अपनाए, जबकि कई लोग हमारे द्वारा बिछाए गए गद्दों पर कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।”
अफज़ल ने बताया कि जैसे-जैसे आग बढ़ती गई, बचाव कार्य का दायरा भी बढ़ता गया।
उन्होंने कहा, “हाजी साहब ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को फोन किया। बाद में फायर ब्रिगेड पहुंची और आग पर काबू पाया। उसके बाद हम इमारत के अंदर जाकर फंसे हुए लोगों को बाहर निकाल सके और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा सके।”
जिन गद्दों ने कई लोगों को गंभीर चोटों से बचाया, वे पास की एक दुकान से लाए गए थे। अफज़ल ने कहा, “हमने ‘अरमान’ नाम की दुकान से गद्दे लिए। दुकान मालिक ने बिना किसी हिचकिचाहट के मदद की, जबकि इससे उनके सामान को नुकसान पहुंच सकता था। उन्होंने हमें बेडशीट भी दीं, जिनका इस्तेमाल हमने घायलों को नीचे उतारने के लिए किया।”
उन्होंने आगे कहा, “उन्हीं बेडशीटों की मदद से हमने ऊपरी मंजिलों से लोगों को सावधानीपूर्वक नीचे उतारा। हमारे पास कोई विशेष बचाव उपकरण नहीं थे, इसलिए स्थानीय लोगों की यह मदद बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।”
वसीम राजा
एक अन्य बचावकर्ता वसीम राजा ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में उनकी पेशेवर ट्रेनिंग काफी काम आई।
मैक्स अस्पताल में कार्यरत राजा ने अपनी चिकित्सीय ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए धुएं से प्रभावित लोगों को तत्काल प्राथमिक सहायता प्रदान की।
उन्होंने कहा, “मेरा नाम वसीम राजा है। मैं हौज रानी गांव का निवासी हूं और मैक्स अस्पताल में काम करता हूं। हमारी ट्रेनिंग में हमें आग और अन्य आपात स्थितियों से निपटने तथा CPR देने का प्रशिक्षण दिया जाता है।”
राजा ने कहा, “मैंने इस प्रशिक्षण का पूरा उपयोग पहले इमारत के भीतर और बाद में घायलों को एम्बुलेंस तक पहुंचाने के दौरान किया। साथ ही, मैं लगातार अपनी अस्पताल प्रबंधन टीम को स्थिति की जानकारी देता रहा। पूरी टीम के समय पर पहुंचने से कई लोगों की जान बचाई जा सकी।”
बचाए गए लोगों की स्थिति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मुझे राहत है कि अधिकांश लोग आग से नहीं जले थे। वे मुख्य रूप से धुएं के कारण बेहोश हुए थे। जिन लोगों को CPR की आवश्यकता थी, उनके चेहरे धुएं से काले पड़ गए थे, लेकिन उनकी त्वचा गंभीर रूप से नहीं जली थी।”
उन्होंने आगे कहा, “साफ-सफाई और अन्य औपचारिक चिंताओं की परवाह किए बिना हमने कई लोगों को माउथ-टू-माउथ रिससिटेशन दिया। इन्हीं प्रयासों की वजह से कुछ लोगों की जान बचाई जा सकी, हालांकि दुर्भाग्यवश सभी को बचाना संभव नहीं हो पाया।”
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Imge Credit : Awaz The Voice
असम के बोंगाईगांव जिले के अंबारी-परेरचार गांव में सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक एकता की एक प्रेरक मिसाल देखने को मिली, जहां स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर एक हिंदू युवक का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार कराया।
यह घटना अंबारी-परेरचार गांव में हुई, जो श्रीजंग्राम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला मुस्लिम-बहुल इलाका है।
इंडिया टुडे नॉर्थ ईस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, गांव के निवासी प्रतीक भौमिक के निधन के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग अंतिम संस्कार की व्यवस्था में सहयोग के लिए आगे आए। ग्रामीणों ने मिलकर शव को कंधा दिया और यह सुनिश्चित किया कि हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार सार्वजनिक श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाए।
धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर किए गए इस मानवीय प्रयास ने पूरे क्षेत्र का ध्यान आकर्षित किया है। कई लोग इसे विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सम्मान, सहयोग और सौहार्द की मिसाल के रूप में देख रहे हैं।
ऐसे समय में जब देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक ध्रुवीकरण और सामाजिक विभाजन को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं, अंबारी-परेरचार गांव की यह पहल इंसानियत, सामाजिक एकजुटता और सांप्रदायिक सद्भाव का सकारात्मक संदेश देती है।
ज्ञात हो कि कुछ सप्ताह पहले दिल्ली में लगी भीषण आग के दौरान भी कई मुस्लिम युवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
जब दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लोरिश स्टे B&B’ में भीषण आग लगी, जिसमें करीब 21 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए, तब स्थानीय लोग बिना किसी औपचारिक बचाव उपकरण के ही असली नायक बनकर सामने आए।
अफरा-तफरी और भय के माहौल में उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना इमारत में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश की। कई लोग धुएं और आग की लपटों से बचने के लिए ऊपरी मंजिलों से कूदने को मजबूर हो गए थे।
यह आग मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित पांच मंजिला ‘बेड-एंड-ब्रेकफास्ट’ (B&B) इमारत में लगी थी। देखते ही देखते पूरी इमारत घने धुएं से भर गई, जिससे कई मेहमान अंदर फंस गए।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जब लोग मदद के लिए पुकार रहे थे और कुछ लोग खिड़कियों से कूदने की कोशिश कर रहे थे, तब आपातकालीन सेवाओं के पहुंचने से पहले ही स्थानीय निवासी मौके पर बचाव कार्य में जुट गए।
मोहम्मद अफज़ल
इनमें मोहम्मद अफज़ल भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि मौके पर पहुंचने के कुछ ही मिनटों के भीतर स्थानीय लोगों ने बचाव के लिए तत्काल उपाय शुरू कर दिए।
अफज़ल ने कहा, “जब मैं और मेरे भाई सुबह यहां पहुंचे, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। हमने तुरंत सड़क के उस पार स्थित एक दुकान से गद्दे लाकर एक सुरक्षित ‘लैंडिंग ज़ोन’ तैयार किया। हमने लोगों से कूदने के लिए कहा। कुछ लोग सुरक्षित उतरने में सफल रहे, जबकि कुछ ऐसा नहीं कर सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोगों ने बचने के अन्य तरीके अपनाए, जबकि कई लोग हमारे द्वारा बिछाए गए गद्दों पर कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।”
अफज़ल ने बताया कि जैसे-जैसे आग बढ़ती गई, बचाव कार्य का दायरा भी बढ़ता गया।
उन्होंने कहा, “हाजी साहब ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को फोन किया। बाद में फायर ब्रिगेड पहुंची और आग पर काबू पाया। उसके बाद हम इमारत के अंदर जाकर फंसे हुए लोगों को बाहर निकाल सके और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा सके।”
जिन गद्दों ने कई लोगों को गंभीर चोटों से बचाया, वे पास की एक दुकान से लाए गए थे। अफज़ल ने कहा, “हमने ‘अरमान’ नाम की दुकान से गद्दे लिए। दुकान मालिक ने बिना किसी हिचकिचाहट के मदद की, जबकि इससे उनके सामान को नुकसान पहुंच सकता था। उन्होंने हमें बेडशीट भी दीं, जिनका इस्तेमाल हमने घायलों को नीचे उतारने के लिए किया।”
उन्होंने आगे कहा, “उन्हीं बेडशीटों की मदद से हमने ऊपरी मंजिलों से लोगों को सावधानीपूर्वक नीचे उतारा। हमारे पास कोई विशेष बचाव उपकरण नहीं थे, इसलिए स्थानीय लोगों की यह मदद बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।”
वसीम राजा
एक अन्य बचावकर्ता वसीम राजा ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में उनकी पेशेवर ट्रेनिंग काफी काम आई।
मैक्स अस्पताल में कार्यरत राजा ने अपनी चिकित्सीय ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए धुएं से प्रभावित लोगों को तत्काल प्राथमिक सहायता प्रदान की।
उन्होंने कहा, “मेरा नाम वसीम राजा है। मैं हौज रानी गांव का निवासी हूं और मैक्स अस्पताल में काम करता हूं। हमारी ट्रेनिंग में हमें आग और अन्य आपात स्थितियों से निपटने तथा CPR देने का प्रशिक्षण दिया जाता है।”
राजा ने कहा, “मैंने इस प्रशिक्षण का पूरा उपयोग पहले इमारत के भीतर और बाद में घायलों को एम्बुलेंस तक पहुंचाने के दौरान किया। साथ ही, मैं लगातार अपनी अस्पताल प्रबंधन टीम को स्थिति की जानकारी देता रहा। पूरी टीम के समय पर पहुंचने से कई लोगों की जान बचाई जा सकी।”
बचाए गए लोगों की स्थिति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मुझे राहत है कि अधिकांश लोग आग से नहीं जले थे। वे मुख्य रूप से धुएं के कारण बेहोश हुए थे। जिन लोगों को CPR की आवश्यकता थी, उनके चेहरे धुएं से काले पड़ गए थे, लेकिन उनकी त्वचा गंभीर रूप से नहीं जली थी।”
उन्होंने आगे कहा, “साफ-सफाई और अन्य औपचारिक चिंताओं की परवाह किए बिना हमने कई लोगों को माउथ-टू-माउथ रिससिटेशन दिया। इन्हीं प्रयासों की वजह से कुछ लोगों की जान बचाई जा सकी, हालांकि दुर्भाग्यवश सभी को बचाना संभव नहीं हो पाया।”
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