हिंदू संगठनों के हंगामे के बाद आकांक्षा की शादी रद्द, मुस्लिम दोस्त से विवाह करना चाहती थी युवती

Written by sabrang india | Published on: February 10, 2026
शादी की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई थीं और निमंत्रण पत्र भी रिश्तेदारों में बाँटे जा चुके थे। हालांकि, इस रिश्ते को लेकर कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों ने आपत्ति जताई और इसे ‘लव जिहाद’ से जोड़ते हुए विरोध शुरू कर दिया। दोनों की सगाई 9 फरवरी को होनी थी, जबकि 13 फरवरी को विवाह तय था।



उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली आकांक्षा एक मुस्लिम युवक, साहिल उर्फ़ शावेज़ राणा, से शादी करना चाहती थीं। आकांक्षा एक बैंक में कार्यरत हैं और दोनों काफी समय से एक-दूसरे को जानते हैं। शादी की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई थीं और निमंत्रण पत्र भी रिश्तेदारों में बाँटे जा चुके थे। हालांकि, इस रिश्ते को लेकर कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों ने आपत्ति जताई और इसे ‘लव जिहाद’ से जोड़ते हुए विरोध शुरू कर दिया।

दोनों की सगाई 9 फरवरी को होनी थी, जबकि 13 फरवरी को विवाह तय था। लेकिन हिंदू संगठनों के बढ़ते विरोध और दबाव के चलते अंततः यह शादी रद्द कर दी गई।

ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने कहा कि शादी के निमंत्रण पत्र में युवक का नाम साहिल लिखा गया है, जबकि वह खुद को शावेज़ राणा बताता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नाम को लेकर भ्रम पैदा किया गया और युवती को गुमराह किया गया। संगठन का दावा है कि युवती को मानसिक रूप से प्रभावित कर इस रिश्ते के लिए मजबूर किया गया।

सचिन सिरोही का कहना है कि इस तरह के मामलों में कई बार महिलाएँ बाद में पछतावा करती हैं और यह मामला भी उसी तरह का प्रतीत होता है।

लड़की के मामा ने लगाए गंभीर आरोप

सिरोही ने स्पष्ट रूप से कहा कि संगठन 13 फरवरी को होने वाली शादी को किसी भी कीमत पर नहीं होने देगा। संगठन के मुताबिक, 9 फरवरी को शहर के एक रेस्टोरेंट में प्रस्तावित सगाई समारोह को भी रुकवा दिया गया।

संगठन इस पूरे मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है और संबंधित पुलिस थाने में मामला दर्ज कराने की योजना बना रहा है। लड़की के मामा ने भी प्रशासन को एक लिखित आवेदन दिया है। उन्होंने कहा कि लड़की के पिता का पहले ही निधन हो चुका है और उसका कोई भाई नहीं है।

मामा का कहना है कि परिवार इस शादी को लेकर बेहद परेशान है और नहीं चाहता कि उनकी भांजी दूसरे धर्म के युवक से विवाह करे। उन्होंने कहा कि परिवार इस शादी को रोकने के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाएगा।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड में एक हिंदुत्ववादी संगठन द्वारा एक मुस्लिम दुकानदार पर दुकान का नाम बदलने का दबाव बनाए जाने के मामले में हस्तक्षेप करने वाले दीपक कुमार को भी निशाना बनाया गया था।

उत्तराखंड के कोटद्वार में गणतंत्र दिवस के मौके पर एक स्थानीय जिम मालिक द्वारा किए गए हस्तक्षेप से शुरू हुई यह घटना अब कानून-व्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़ा एक जटिल संकट बन चुकी है। इस घटनाक्रम ने सांप्रदायिक धमकियों के प्रति राज्य की प्रतिक्रिया में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर किया है।

26 जनवरी 2026 को दीपक कुमार ने उस समय हस्तक्षेप किया, जब कथित तौर पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कुछ लोगों के समूह ने 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद को उनकी दशकों पुरानी दुकान के नाम में “बाबा” शब्द के इस्तेमाल को लेकर धमकाया।

कुछ ही दिनों में यह मामला और आगे बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप कई एफआईआर दर्ज की गईं, दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा बड़े पैमाने पर लामबंदी हुई, राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया गया और न केवल कथित धमकाने वालों व प्रदर्शनकारियों के खिलाफ, बल्कि बुजुर्ग दुकानदार के समर्थन में हस्तक्षेप करने वालों के खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज किए गए।

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 46 वर्षीय दीपक कुमार कोटद्वार में एक जिम चलाते हैं। 26 जनवरी को वे एक दोस्त की दुकान पर मौजूद थे, जब उन्होंने कुछ लोगों के समूह को 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद (जिन्हें अहमद वकील भी कहा जाता है) से बातचीत करते सुना। अहमद की दुकान — बाबा स्कूल ड्रेस — पिछले लगभग 30 वर्षों से पटेल मार्ग पर स्थित है।

कथित तौर पर खुद को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) का सदस्य बताने वाले इन लोगों ने अहमद की दुकान के नाम में “बाबा” शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई और नाम बदलने की मांग की। उनका दावा था कि यह शब्द केवल हिंदू धार्मिक हस्तियों के लिए प्रयुक्त होना चाहिए।

जब कुमार ने हस्तक्षेप कर यह पूछा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति को क्यों धमकाया जा रहा है, तो कथित तौर पर उनसे मामले में दखल न देने को कहा गया।

इस टकराव का एक वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया। वीडियो में कुमार भीड़ के तर्क पर सवाल उठाते हुए दिखाई देते हैं। वे पूछते हैं कि अन्य दुकानों को “बाबा” शब्द इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों है, लेकिन अहमद की दुकान को नहीं, और क्या तीन दशक पुरानी दुकान को अब अपनी पहचान बदलने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

जब समूह के कुछ सदस्यों ने कुमार से उनका नाम पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।”

बाद में द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कुमार ने स्पष्ट किया कि यह बयान जानबूझकर और प्रतीकात्मक था। उन्होंने कहा, “मेरा उद्देश्य यह बताना था कि मैं एक भारतीय हूँ और कानून के सामने सभी बराबर हैं।”

वीडियो वायरल होने के बाद जहाँ सोशल मीडिया पर उनकी सराहना हुई, वहीं कुमार के अनुसार उन्हें और उनके परिवार को धमकियाँ भी मिलीं।

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