कोसा ऑनर किलिंग की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में पुलिस-सामंती गठजोड़ का दावा

Written by sabrang india | Published on: September 18, 2026
जांजगीर-चांपा के कोसा में दलित युवक की हत्या मामले में फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में पुलिस-सामंती गठजोड़ का खुलासा किया गया है।



15 सितंबर को रायपुर स्थित जिसा (XISA) सेंटर में नफरती भाषण, घृणा अभियान और लक्षित हिंसा के खिलाफ राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस साझा प्रयास के तहत ‘कारवां-ए-मोहब्बत’ के राष्ट्रीय संयोजक हर्ष मंदर ने फैक्ट-फाइंडिंग टीम की मौजूदगी में छत्तीसगढ़ के कोसा में एक दलित युवक की हत्या से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट जारी की।

बहु-संगठनों की इस रिपोर्ट में जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला थाना क्षेत्र में हुई कथित प्रतिष्ठा आधारित हत्या (ऑनर किलिंग) की घटना और उससे जुड़े तथ्यों को सामने रखा गया है।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, यह रूह कंपा देने वाली घटना जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसा की है, जहां 27 जून 2026 की रात को 25 वर्षीय दलित युवक अमित कुमार भंडारी अचानक लापता हो गया था। दो दिन बाद, 29 जून 2026 को गांव के अमहा तालाब के पास एक निर्जन बाड़ी में उसका शव औंधे मुंह पड़ा मिला। मृतक के सिर और सीने पर घातक चोटों और बर्बरता के स्पष्ट निशान थे, जो एक सुनियोजित हत्या की गवाही दे रहे थे।

स्वतंत्र जांच दल की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट के अनुसार, इस हत्या के पीछे एक अंतरजातीय प्रेम संबंध प्रमुख वजह था। रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक अमित भंडारी, जो सतनामी समाज से थे, का गांव की ही रहने वाली क्षत्रिय युवती संतोषी सिंह के साथ पिछले सात-आठ वर्षों से प्रेम संबंध था।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस रिश्ते से नाराज युवती के परिजनों ने पहले भी अमित को धमकियां दी थीं। फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने घटना को जातिगत वर्चस्व और दलित समुदाय के प्रति हिंसक सामंती मानसिकता से जोड़ते हुए इसे कथित प्रतिष्ठा आधारित हत्या बताया है।

रिपोर्ट में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित जातीय पूर्वाग्रहों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। फैक्ट-फाइंडिंग टीम के अनुसार, घटना के बाद करीब दो महीने तक पुलिस ने कथित तौर पर वास्तविक दोषियों को बचाने और मामले की लीपापोती करने की कोशिश की।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मुलमुला थाना पुलिस और साइबर सेल ने मृतक के बड़े भाई अमृत भंडारी, उनकी पत्नी लक्ष्मी और दोस्त विनोद को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखा और उनके साथ मारपीट की। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने मृतक की भाभी के चरित्र पर भी सवाल उठाने की कोशिश की। आरोप है कि उन्हें बिजली का करंट लगाने की धमकी दी गई और हत्या का झूठा जुर्म कबूल करने के लिए दबाव बनाया गया।

दलित अधिकार संगठनों की सक्रियता, फैक्ट-फाइंडिंग टीम के जमीनी दौरे और सोशल मीडिया पर चलाए गए व्यापक अभियान के बाद मामला लगातार चर्चा में आया। बढ़ते जनदबाव के बीच पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

इसके बाद 9 सितंबर 2026 को पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए संतोषी सिंह, उसके भाई बजरंग सिंह और पप्पू सिंह क्षत्रिय को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस जांच के मुताबिक, 27 जून की रात संतोषी से मिलने पहुंचे अमित को देखकर बजरंग सिंह ने कथित तौर पर आपा खो दिया और फावड़े से हमला कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, इसके बाद पप्पू सिंह और संतोषी ने मिलकर शव को ठिकाने लगाने और जांच को गुमराह करने की साजिश रची।

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