दलित भाइयों ने कस्टडी में टॉर्चर का आरोप लगाया, SC कमीशन से की शिकायत

Written by sabrang india | Published on: September 2, 2026
दिहाड़ी पर काम करने वाले इन राजमिस्त्रियों का आरोप है कि उन्हें निर्वस्त्र किया गया, बुरी तरह पीटा गया, गालियां दी गईं और छोड़ने से पहले बिजली के झटके दिए गए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, कानूनी सुरक्षा और शामिल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।



पटियाला जिले के नाभा के ककराला गांव के दो दलित भाइयों ने नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (अनुसूचित जाति आयोग) से शिकायत की है। उनका आरोप है कि छिनतानवाला पुलिस पोस्ट के कर्मचारियों ने चोरी के शक में उन्हें कस्टडी में टॉर्चर किया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिहाड़ी पर काम करने वाले इन राजमिस्त्रियों का आरोप है कि उन्हें निर्वस्त्र किया गया, बुरी तरह पीटा गया, गालियां दी गईं और छोड़ने से पहले बिजली के झटके दिए गए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, कानूनी सुरक्षा और शामिल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

इन भाइयों ने बताया कि वे गांव के ही रहने वाले बघेल सिंह के घर काम कर रहे थे, जहां 24 अगस्त की रात चोरी की घटना हुई थी। उनका आरोप है कि बिना किसी शुरुआती जांच या ठोस सबूत के उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया।

1 सितंबर को दी गई अपनी अर्जी में उन्होंने आयोग से मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन और जाति-आधारित दुर्व्यवहार का स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया। उन्होंने स्थानीय पुलिस के बजाय किसी वरिष्ठ स्वतंत्र अधिकारी या एजेंसी से जांच कराने की मांग की।

उन्होंने सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर, डेली डायरी रजिस्टर और कस्टडी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, स्वतंत्र मेडिकल-लीगल जांच कराने, आरोपी कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने और अपने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की।

पंजाब भाजपा शेड्यूल्ड कास्ट मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ, जो समुदाय के नेताओं के साथ परिवार से मिलने गए थे, ने पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अधिकारियों को बचाया गया तो संगठन राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।

छिनतानवाला पुलिस पोस्ट के इंचार्ज, सब-इंस्पेक्टर चमकौर सिंह ने टॉर्चर के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जांच के सिलसिले में भाइयों से सिर्फ चार दिन पहले पूछताछ की गई थी और उन पर दबाव बनाने की तरकीबें इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

चमकौर सिंह ने दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि संदिग्धों में से एक के बेटे ने एक छोटा गेट खुला छोड़ दिया था, जिससे चोर 24 अगस्त की रात घर में घुसे और 10 लाख रुपये के सोने के गहने चुरा ले गए। उन्होंने कहा कि जांच और सबूत इकट्ठा करने (जिसमें कॉल डिटेल्स भी शामिल हैं) के बाद ही मामला दर्ज किया जाएगा।

ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के बदायूं में पुलिस कस्टडी में एक 28 वर्षीय दलित व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना के बाद विवाद खड़ा हो गया। पुलिस का दावा है कि थाने में उसकी तबीयत बिगड़ी और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई, जबकि परिवार का आरोप है कि कस्टडी में टॉर्चर की वजह से उसकी मौत हुई।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें राजेश कुमार थाने के फर्श पर बेहोश पड़ा दिख रहा है। उसे एक कम्युनिटी दावत के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद डतगंज थाने में हिरासत में लिया गया था, जिसमें दो-तीन लोग घायल हो गए थे। करीब एक मिनट के इस वीडियो में दो पुलिसकर्मी कुमार को सहारा देते और उसे पानी पिलाने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

बदायूं की एसएसपी अंकिता शर्मा ने कहा, “राजेश को शुक्रवार रात हिरासत में लिया गया था। शौचालय से लौटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह गिर पड़ा। उसे कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया गया और बाद में बदायूं जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।”

एसएसपी ने आगे कहा, “सीसीटीवी फुटेज में कुमार के साथ मारपीट की कोई घटना नहीं दिखी। एक मेडिकल पैनल ने पोस्टमार्टम किया और उसकी मौत का कारण कार्डियोजेनिक शॉक बताया। मामले की जांच चल रही है।”

स्थानीय कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के डॉक्टर रितेश भसीन ने कहा, “राजेश को गंभीर हालत में और सांस लेने में तकलीफ के साथ यहां लाया गया था। उसकी हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उसके शरीर पर बाहर से कोई चोट नहीं दिखी।”

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