वाराणसी: पांच साल तक के 4403 बच्चे कुपोषित, 217 अतिकुपोषित... पहली बार 92 बेड के वार्ड फुल

Written by sabrang india | Published on: August 10, 2026
1 से 14 जुलाई तक चले विशेष दस्तक अभियान में 29 और 15 से 20 जुलाई तक तीन बच्चे मिले थे। जिले में पांच साल तक के कुल 2,67,594 बच्चे हैं। इनमें से 4403 कुपोषित मिले हैं।


फोटो साभार : अमर उजाला

वाराणसी जिले के अस्पतालों और ब्लॉकों में संचालित मिनी पोषण पुनर्वास केंद्रों के सभी 92 बेड पहली बार पूरी तरह भर गए हैं। हालात यह हैं कि अब जरूरतमंद बच्चों को भी भर्ती के लिए बेड खाली होने का इंतजार करना पड़ रहा है। नए बच्चों को तभी भर्ती किया जा सकेगा, जब मौजूदा मरीजों में से कुछ स्वस्थ होकर डिस्चार्ज होंगे।

जिले में पांच वर्ष तक की उम्र के कुल 4,403 बच्चे कुपोषण से प्रभावित हैं। इनमें 4,186 बच्चे कुपोषित और 217 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में हैं। अतिकुपोषित बच्चों को तत्काल चिकित्सकीय देखभाल और पोषण उपचार की जरूरत होती है, ऐसे में सभी बेड का भर जाना चिंता बढ़ाने वाला है।

अमर उजाला ने स्वास्थ्य विभाग के हवाले से लिखा कि 30 दिन में ही 32 नए बच्चे कुपोषित मिले हैं। इन बच्चों की सूची बनाकर ब्लॉक के स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों के पास भेजी गई है। बच्चों का वजन रोज जांचा जाएगा। इन सबके पोषण पर विशेष ध्यान देना है। 1 से 14 जुलाई तक चले विशेष दस्तक अभियान में 29 और 15 से 20 जुलाई तक तीन बच्चे मिले थे। जिले में पांच साल तक के कुल 2,67,594 बच्चे हैं। इनमें से 4403 कुपोषित मिले हैं।

उठाए जाने वाले कदम
  • मानक से कम वजन होने पर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराना जरूरी।
  • आंगनबाड़ी टीम हर तीसरे दिन सेहत की जानकारी देती है।
  • खान-पान की विशेष व्यवस्था की जाती है ताकि सेहत में तेजी से सुधार हो सके।
  • परिजनों की काउंसिलिंग की जाती है। बच्चों की देखभाल में सावधानी बरतें।

पोषण पुनर्वास केंद्र में बेड की स्थिति
  • दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में 12 बेड
  • आठ ब्लॉकों के मिनी पोषण पुनर्वास केंद्रों में 10-10 बेड हैं। यानी ब्लॉकों में कुल 80 बेड हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके सिंह ने कहा, “जिले में कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के वजन की जांच कराई जाती है। एक बार भर्ती होने के बाद बच्चों को 14 दिन बाद डिस्चार्ज किया जाता है। जिला अस्पताल और दूसरे केंद्रों में बच्चे भर्ती हैं। जैसे ही बेड खाली होंगे, वैसे ही बच्चों के परिजनों को सूचना दी जाएगी। बच्चों को भर्ती करके इलाज किया जाएगा।”

हाथरस में ‘संभव 6.0’ अभियान

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, हाथरस में कुपोषण उन्मूलन के लिए ‘सम्भव (SAMbhav 6.0) अभियान-2026’ शुरू करने की योजना बनाई गई है। जिलाधिकारी अतुल वत्स ने बताया कि प्रदेश सरकार के ‘कुपोषण मुक्त उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से यह अभियान सितंबर माह तक चलेगा। इसके सफल संचालन के लिए विस्तृत संयुक्त मार्गदर्शी सिद्धांत जारी किए गए हैं। इस अभियान का संचालन बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और पंचायती राज विभाग के संयुक्त समन्वय से होगा। शासन के निर्देशानुसार, मुख्य विकास अधिकारी को जनपद स्तर पर अभियान का नोडल अधिकारी बनाया गया है। वे संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर सभी गतिविधियों का समयबद्ध और सफल संचालन सुनिश्चित करेंगे।

जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने को कहा, ताकि जिले को कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

जिलाधिकारी ने बताया कि वर्ष 2021 से संचालित ‘संभव’ अभियान के तहत गंभीर कुपोषित (एसएएम) बच्चों की पहचान, उपचार और स्वस्थ होने की दिशा में महत्वपूर्ण काम हुआ है। इसी क्रम में इस वर्ष ‘संभव 6.0’ अभियान ‘गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा’ की थीम पर चलाया जा रहा है।

इस अभियान के तहत जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। गर्भवती और धात्री महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य में सुधार के लिए विभिन्न विभाग मिलकर काम करेंगे। गंभीर कुपोषण (एसएएम) और मध्यम कुपोषण (एमएएम) की रोकथाम, समय पर पहचान, उपचार और प्रभावी प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाएगा।

जिलाधिकारी का अभियान को लेकर निर्देश

जिलाधिकारी अतुल वत्स ने सभी संबंधित विभागों से जनभागीदारी के साथ इस अभियान को मिशन मोड में चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय और पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करें, ताकि हाथरस जिले में कुपोषण के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और स्थायी परिणाम हासिल किए जा सकें।

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