यूपी के हापुड़ में कांवड़ियों के हमले के बाद कोमा में गए मुस्लिम ड्राइवर की मौत; हत्या की कोशिश का मामला दर्ज

Written by sabrang india | Published on: August 8, 2026
“सालों पहले पत्नी की मौत के बाद उनका बेटा ही उनका एकमात्र सहारा था। अब तो मेरा कोई सहारा ही नहीं बचा।”



उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में कांवड़ यात्रियों को ले जा रही गाड़ी के साथ सड़क दुर्घटना के बाद कथित तौर पर मारपीट का शिकार हुए 28 वर्षीय मुस्लिम ड्राइवर अजीम की 4 अगस्त को दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में मौत हो गई।

मक्तूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अजीम के परिवार का आरोप है कि 31 जुलाई को गढ़ टोल प्लाजा के पास कांवड़ियों को ले जा रहे एक ऑटो से अजीम की पिकअप ट्रक की टक्कर होने के बाद कुछ लोगों के समूह ने उसकी पिटाई की।

हालांकि, पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले दर्ज किए हैं और मारपीट तथा अजीम की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

अजीम के पिता इंतजार हुसैन के अनुसार, दुर्घटना तब हुई जब अजीम द्वारा चलाई जा रही पिकअप कांवड़ियों को ले जा रहे एक ऑटो से टकरा गई। टक्कर के बाद ऑटो ड्राइवर और कई यात्रियों ने कथित तौर पर अजीम पर हमला कर दिया। मारपीट के बाद भीड़ उसे घटनास्थल पर ही छोड़ गई।

पुलिस ने अजीम को इलाज के लिए पहले एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में उसे मेरठ रेफर किया गया और फिर दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां लगभग पांच दिनों तक इलाज के दौरान 4 अगस्त को उसकी मौत हो गई।

पुलिस में दर्ज शिकायत में अजीम के पिता ने आरोप लगाया कि टक्कर के बाद ऑटो ड्राइवर और अन्य यात्रियों ने उनके बेटे पर हमला किया।

गढ़ मुक्तेश्वर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में ऑटो ड्राइवर फरमान के साथ-साथ मनीष, अंकित, लोकेश और शिवम (सभी बाझेडा खुर्द गांव के निवासी) तथा दो अज्ञात लोगों के नाम शामिल हैं।

यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत दंगा करने, जानबूझकर चोट पहुंचाने और हत्या के प्रयास के आरोपों में दर्ज किया गया है।

परिवार का आरोप है कि मारपीट के कारण अजीम गंभीर रूप से घायल हो गया था और अंततः उसकी मौत हो गई।

हालांकि, पुलिस ने ऑटो ड्राइवर की शिकायत के आधार पर एक क्रॉस-एफआईआर भी दर्ज की है।

उस एफआईआर में अजीम पर जानबूझकर अपनी पिकअप ऑटो से टकराने और ड्राइवर को कुचलने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। उस पर हत्या के प्रयास की धारा के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

डेथ सर्टिफिकेट में ब्रेन ब्लीडिंग और सूजन का जिक्र

नई दिल्ली के लोक नायक अस्पताल से जारी डेथ सर्टिफिकेट, जिसे ‘मक्तूब’ ने देखा है, में मौत की वजह इस तरह बताई गई है:

“कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट के कारण एक्स्ट्रा-एक्सियल ब्लीड, सब-एराक्नॉइड हैमरेज, मास इफेक्ट और पूरे दिमाग में सूजन (डिफ्यूज सेरेब्रल एडिमा)।”

आसान शब्दों में कहें तो इस सर्टिफिकेट में खोपड़ी के अंदर ब्लीडिंग, दिमाग के आस-पास ब्लीडिंग, दिमाग पर दबाव और पूरे दिमाग में सूजन की बात कही गई है, जिसके बाद कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट हुआ।

सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में बातें फैलने के बाद हापुड़ पुलिस ने कहा कि एक लिखित शिकायत के आधार पर गढ़ मुक्तेश्वर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई चल रही है।

मक्तूब ने अजीम की चोटों और मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में और जानकारी तथा स्पष्टता के लिए गढ़ मुक्तेश्वर पुलिस स्टेशन और हापुड़ पुलिस के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की। कॉल्स का कोई जवाब नहीं मिला।

‘अब तो मेरा कोई सहारा ही नहीं बचा’

अजीम की मौत से परिवार की कमाई का मुख्य जरिया खत्म हो गया है।

इंतजार हुसैन ने मक्तूब को बताया कि सालों पहले पत्नी की मौत के बाद उनका बेटा ही उनका एकमात्र सहारा था।

उन्होंने कहा, “अब तो मेरा कोई सहारा ही नहीं बचा।”

इंतजार ने बताया कि वे पिछले कुछ सालों से बिस्तर पर हैं और अपनी दवाइयों, सेहत तथा परिवार की जरूरतों के लिए अजीम पर निर्भर थे।

उन्होंने कहा, “वह मेरी सेहत, दवाइयों और परिवार का ध्यान रखता था। अब जब वह नहीं रहा, तो मेरे पास कोई सहारा नहीं बचा है।”

उन्होंने कहा, “हम हमलावरों में से किसी को नहीं जानते। पुलिस ने खुद ही आरोपियों के नाम बताए। हम बस निष्पक्ष जांच और न्याय चाहते हैं।”

समाजवादी पार्टी के राज्य सचिव और उसी इलाके के रहने वाले फरासत हुसैन गामा ने अजीम की मौत के बाद उनके परिवार से मुलाकात की।

रिपोर्ट के अनुसार, गामा ने कहा कि परिवार बहुत ज्यादा आर्थिक तंगी में जी रहा है और अजीम ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था।

गामा ने कहा, “परिवार आर्थिक रूप से बहुत पिछड़ा हुआ है। वे तिरपाल से ढके एक कच्चे घर में रह रहे हैं। अजीम, जो ट्रांसपोर्टर का काम करता था, वही परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। वह पूरे परिवार का ध्यान रखता था।”

उन्होंने कहा कि अजीम की मौत के बाद उसके बुजुर्ग पिता, विधवा पत्नी और छोटे बच्चे के पास कोई कमाने वाला नहीं बचा है।

“अब उनके पास पिता, विधवा और छोटे बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नहीं है।”

गामा ने उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की और कहा कि अगर अधिकारी परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद उनकी मदद करने में नाकाम रहते हैं, तो यह सरकार के लिए शर्म की बात होगी।

उन्होंने कहा, “अगर सरकार को यह पता चलने के बाद भी कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की मौत कथित तौर पर कांवड़ियों की भीड़ के हमले में हुई है, वह उनकी आर्थिक स्थिति पर ध्यान नहीं देती है, तो यह उनके लिए शर्म की बात होगी।”

अजीम के परिवार में उनके बुजुर्ग पिता, विधवा पत्नी और पांच महीने का बेटा है। परिवार अब कथित हमले की निष्पक्ष जांच और अजीम की मौत की वजह बने हालात के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है।

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