वायरल वीडियो में मोहम्मद दानिश के आरोपों के बाद, मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक मुस्लिम ऑटो-रिक्शा चालक, मोहम्मद दानिश ने ट्रैफिक पुलिस पर धर्म के आधार पर मारपीट और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन आरोपों के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
क्लेरिअन की रिपोर्ट के अनुसार, खुद रिकॉर्ड किए गए वीडियो में दानिश को मौके पर पुलिसकर्मियों से बहस करते हुए सुना जा सकता है। वह आरोप लगाते हैं, "भाई, उन्होंने मुझे डंडों से मारा। वे मुझे मुस्लिम होने के कारण पीट रहे हैं। वे कह रहे हैं, 'यह मुस्लिम है, इसे मारो।' वे मेरी गाड़ी जब्त कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि वे अधिकारी हैं।"
वीडियो क्लिप में दानिश अधिकारियों से बहस करते दिखाई देते हैं, जबकि एक अन्य पुलिसकर्मी उनका वीडियो बना रहा है। दानिश का दावा है कि अधिकारियों ने उन पर झूठे मामले दर्ज करने और उन्हें जेल भेजने की धमकी दी। जब एक अधिकारी कैमरा उनकी ओर घुमाकर कहता है कि चालक के पास लाइसेंस नहीं है, तो दानिश जवाब देते हैं:
"अगर मेरे पास लाइसेंस नहीं है, तो क्या आप मुझे मारेंगे? मेरे पास लाइसेंस है, मैं अभी लाकर दिखाता हूं।"
दानिश और सोशल मीडिया पर सामने आई खबरों के अनुसार, अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें "कटुआ" कहकर संबोधित किया, जो मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने यह भी कहा, "तुम इन लोगों से बात ही क्यों करते हो?"
दानिश का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें डंडों से पीटा। उनका दावा है कि सभी दस्तावेज सही होने के बावजूद उनका ऑटो-रिक्शा जब्त कर लिया गया।
पीड़ित ने विशेष रूप से ट्रैफिक पुलिस अधिकारी अनुपम सिंह का नाम लेते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने 10,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। उनका कहना है कि जब उन्होंने अपनी गाड़ी जब्त किए जाने का विरोध किया, तो उन्हें केवल उनकी मुस्लिम पहचान के कारण जेल भेजने की धमकी दी गई।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश देखने को मिला है। कई यूज़र्स ने पुलिस पर मुस्लिम समुदाय के प्रति संस्थागत पूर्वाग्रह, नफरत और भेदभाव का आरोप लगाया है। साथ ही, मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
फिलहाल, दानिश निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब ट्रैफिक पुलिस वहां पहुंची, उस समय वह अपनी गाड़ी की मरम्मत कर रहे थे। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी रिपोर्टों में इस घटना को राज्य में बढ़ते संस्थागत सांप्रदायिक भेदभाव के व्यापक आरोपों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। यह वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है और नागरिकों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से जवाबदेही की मांग तेज हो रही है।
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क्लेरिअन की रिपोर्ट के अनुसार, खुद रिकॉर्ड किए गए वीडियो में दानिश को मौके पर पुलिसकर्मियों से बहस करते हुए सुना जा सकता है। वह आरोप लगाते हैं, "भाई, उन्होंने मुझे डंडों से मारा। वे मुझे मुस्लिम होने के कारण पीट रहे हैं। वे कह रहे हैं, 'यह मुस्लिम है, इसे मारो।' वे मेरी गाड़ी जब्त कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि वे अधिकारी हैं।"
वीडियो क्लिप में दानिश अधिकारियों से बहस करते दिखाई देते हैं, जबकि एक अन्य पुलिसकर्मी उनका वीडियो बना रहा है। दानिश का दावा है कि अधिकारियों ने उन पर झूठे मामले दर्ज करने और उन्हें जेल भेजने की धमकी दी। जब एक अधिकारी कैमरा उनकी ओर घुमाकर कहता है कि चालक के पास लाइसेंस नहीं है, तो दानिश जवाब देते हैं:
"अगर मेरे पास लाइसेंस नहीं है, तो क्या आप मुझे मारेंगे? मेरे पास लाइसेंस है, मैं अभी लाकर दिखाता हूं।"
दानिश और सोशल मीडिया पर सामने आई खबरों के अनुसार, अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें "कटुआ" कहकर संबोधित किया, जो मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने यह भी कहा, "तुम इन लोगों से बात ही क्यों करते हो?"
दानिश का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें डंडों से पीटा। उनका दावा है कि सभी दस्तावेज सही होने के बावजूद उनका ऑटो-रिक्शा जब्त कर लिया गया।
पीड़ित ने विशेष रूप से ट्रैफिक पुलिस अधिकारी अनुपम सिंह का नाम लेते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने 10,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। उनका कहना है कि जब उन्होंने अपनी गाड़ी जब्त किए जाने का विरोध किया, तो उन्हें केवल उनकी मुस्लिम पहचान के कारण जेल भेजने की धमकी दी गई।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश देखने को मिला है। कई यूज़र्स ने पुलिस पर मुस्लिम समुदाय के प्रति संस्थागत पूर्वाग्रह, नफरत और भेदभाव का आरोप लगाया है। साथ ही, मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
फिलहाल, दानिश निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब ट्रैफिक पुलिस वहां पहुंची, उस समय वह अपनी गाड़ी की मरम्मत कर रहे थे। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी रिपोर्टों में इस घटना को राज्य में बढ़ते संस्थागत सांप्रदायिक भेदभाव के व्यापक आरोपों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। यह वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है और नागरिकों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से जवाबदेही की मांग तेज हो रही है।
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