कोरोना में अंतिम संस्कार भी बना कारोबार, पैकेज दे रही कंपनियां तो निजी हाथों में दिए जा रहे 'श्मशान'

Written by Navnish Kumar | Published on: April 21, 2021
कोरोना काल में लोगों ने मौत में भी 'अवसर' तलाश लिया है। आलम यह है कि मृतकों के अंतिम संस्कार का कारोबार शुरू हो गया है। बड़े शहरों में मृतकों के दाह संस्कार या दफनाने के लिए कंपनियां खुल गई हैं, जो कॉरपोरेट स्टाइल में काम कर रही हैं और ग्राहकों को कई तरह के पैकेज और ऑफर पेश कर रही हैं। ये कंपनियां कोरोना मरीज की मौत के बाद संस्कार का सारा इंतजाम खुद करने का दावा करती हैं। दूसरी ओर, श्मशान घाटों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। 



शायद इसी को 'आपदा में अवसर' तलाशना कहते हैं। अब जहां कोरोना महामारी ने देश में तबाही मचा रखी है। हर रोज न जाने कितने लोगों की जान जा रही है। हर दिन मौत के आंकड़े दिल बैठाने वाले हैं। ऐसे भारी आपदा के समय में लोगों ने 'अवसर' की तलाश करते हुए, मृतकों के अंतिम संस्कार का कारोबार शुरू किया है। चूंकि कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद अंतिम संस्कार भी सभी बचाव और सावधानी के साथ किया जाना आवश्यक है। कई शहरों से इस तरह की खबरें भी आ रही हैं कि अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग चल रही है। कहीं कब्रिस्तान में जगह नहीं है तो कहीं लकड़ियां कम पड़ गई हैं। ऐसे में कुछ कंपनियां अंतिम संस्कार के सारे इंतजाम करने का ऑफर दे रही हैं। इसके लिए 30 से 40 हजार रुपये तक के पैकेज दिए जा रहे हैं।

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी कई कंपनियां बाजार में आ गई हैं। एक कंपनी आधा दर्जन भारतीय शहरों में सर्विस दे रही है। कंपनी ने बाकायदा कस्टमर सपोर्ट के लिए नंबर इश्यू कर रखे हैं। कंपनी के फोन नंबर पर ग्राहकों को जानकरी दी जा रही है तो फील्ड में इसकी मार्केटिंग टीम घूम-घूम कर 'ऑर्डर' ले रही है।

बेंगलुरु स्थित अंत्येष्टि फ्यूनरल सर्विस का चेन्नई, दिल्ली, जयपुर जैसे शहरों में कारोबार है। हैदराबाद में इसके सिटी मैनेजर संपत बांगाराम ने कहा, ''हम पूरी प्रक्रिया को अंजाम देते हैं। शव उठाने से गाड़ी के प्रबंध, श्मशान में स्लॉट की बुकिंग, पंडित की व्यवस्था से लेकर अंतिम संस्कार के लिए सामान जुटाने तक, सारी जिम्मेदारी हमारी होती है।'' उन्होंने बताया कि हैदराबाद में पैकेज की दर 32 हजार रुपए है। 

किसी ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म की तरह ग्राहक को पहले कंपनी के हॉटलाइन नंबर पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। लोकेशन के आधार पर शहर के कॉर्डिनेटर उनसे संपर्क साधते हैं। पेमेंट सीधे कंपनी के अकाउंट में किया जाता है। फ्यूनरल सेवा सर्विस कंपनी गोल्ड और बेसिक नाम से दो पैकेज ऑफर करती है। 

कंपनी एग्जीक्युटिव के अनुसार, हम कोविड-19 मरीजों के लिए 30 हजार रुपए चार्ज कर रहे हैं। यह जोखिम भरा काम है और श्मशान में स्लॉट पाना इन दिनों कठिन काम है।'' पैकेज को लेकर और सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, आप अपना लोकेशन बता दीजिए, हमारा एजेंट आपके पास आकर ब्योरा दे देगा। कहा फिलहाल उन्हें रोजाना 5-10 ऑर्डर मिल रहे हैं।

उधर 'आपदा में अवसर' के मूल मंत्र को अपनाते हुए बिहार की राजधानी पटना के सभी तीन श्मशान घाटों को भी निजी एजेंसियों को सौंपा जाएगा। पटना नगर निगम आयुक्त ने इस बाबत फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट  की मानें तो अप्रैल अंत तक निविदा प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। अब गंगा नदी के किनारे बने तीनों घाटों पर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का संचालन, देखरेख और मेंटनेंस निजी एजेंसियों के हवाले होगा।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। तेजस्वी यादव ने ट्वीटर पर लिखा है कि सीएम नीतीश कुमार ने पटना के श्मशान घाटों का भी निजीकरण कर दिया। तेजस्वी ने कहा कि बिहार की निकम्मी एनडीए सरकार ना तो जिंदा लोगों को संभाल पा रही है और नहीं मृत को। नीतीश सरकार पर करारा प्रहार करते हुए तेजस्वी ने कहा कि धिक्कार है ऐसी नाकारा, निष्ठुर और बेशर्म सरकार पर।

तेजस्वी के इस ट्वीट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। चंद्रकांत यादव लिखते हैं कि अगर श्मशानों का निजीकरण नहीं करेंगे तो डबल इंजन में तेल कहां से डालेंगे? एम्मी नामक यूजर ने लिखा है कि सरकार ऐसा इसलिए कर रही है ताकी कोरोना की आड़ में जिन काले कारनामों को अंजाम दिया जा रहा है, वो बाहर न जाएं! वहीं आलोक स्वतंत्र लिखते हैं कि जब सबकुछ निजी हाथों को ही सौंपना है तो फिर ये मंत्री संतरी और तामझाम क्यों?

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