नई दिल्ली। स्वीडन की टेलिकॉम इक्विपमेंट कंपनी एरिक्सन ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि अगर आरकॉम उसका 550 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुकाती है, तो वह कंपनी के चेयरमैन अनिल अंबानी के देश छोड़ने पर पाबंदी लगाए और उन्हें सिविल जेल में डालने का आदेश जारी करे।

एरिक्सन ने शीर्ष अदालत से अपील की है कि वह मामले में अवमानना याचिका स्वीकार करने के अलावा टेलिकॉम कंपनी के लेंडर्स को उसका बकाया ब्याज सहित अदा करने का आदेश जारी करे। उसने सुप्रीम कोर्ट से कंपनी के एसेट्स की सेल पर रोक लगाने और पहले बिके एसेट्स के लिए उसे मिली पेमेंट को अपीलेट ट्राइब्यूनल के पुराने ऑर्डर के मुताबिक रिवर्स कराने की भी अपील की है।
एरिक्सन ने कोर्ट से मामले में कंपनी के खिलाफ एनसीएलटी के ऑर्डर और कार्यवाही के मुताबिक इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू कराने की इजाजत दिए जाने की भी अपील की। नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) ने तो पहले आरकॉम के खिलाफ इनसॉल्वेंसी पिटीशन मंजूर कर ली, लेकिन कंपनी 46,600 करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ में 18,000 करोड़ रुपये की कमी लाने के लिए एसेट मॉनेटाइजेशन प्लान देकर इस प्रोसेस से बचने में कामयाब रही।
आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ अवमानना याचिका इसलिए फाइल की गई है, क्योंकि उन्होंने कंपनी पर चढ़े एरिक्सन के बकाये का भुगतान समय पर होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पर्सनल गारंटी दी थी। पेमेंट की पहली डेडलाइन 30 सितंबर, 2018 की थी जो मिस हो गई। इस पर एरिक्सन ने अक्टूबर में आरकॉम के चेयरमैन के खिलाफ अदालत में अवमानना याचिका डाल दी। एरिक्सन का बकाया चुकाने के लिए आरकॉम को सुप्रीम कोर्ट से 15 दिसंबर तक की मोहलत मिली। ईटी ने दिसंबर में खबर दी थी कि एरिक्सन मामले में दूसरी अवमानना याचिका देने की तैयारी में है।
इस मामले में आरकॉम ने कहा है कि एरिक्सन और लेंडर्स का बकाया चुकाने में उसे जो देरी हो रही है, उसकी जिम्मेदार टेलिकॉम डिपार्टमेंट है। आरकॉम का कहना है कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट रिलायंस जियो के साथ उसकी स्पेक्ट्रम डील को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं दे रहा है। कंपनी ने DoT के खिलाफ अदालत में अवमानना याचिका दी हुई है। SC सोमवार को दोनों मामलों की सुनवाई करेगा। गुरुवार को आरकॉम का स्टॉक बीएसई पर 2.17% की गिरावट के साथ ~13.51 पर बंद हुआ। मामले में कमेंट के लिए आरकॉम को भेजे गए ईमेल का जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं मिल पाया था।
आरकॉम ने डील को हरी झंडी मिलने में देरी को DoT की तरफ से जानबूझकर हो रही अवमानना करार दिया है। अदालत में दाखिल आरकॉम की अपील के मुताबिक, 'यह बात साफ है कि भारत सरकार और अवमानना करनेवाला DoT इस अदालत के आदेशों का तनिक भी सम्मान नहीं करते।'
courtesy: NBT

एरिक्सन ने शीर्ष अदालत से अपील की है कि वह मामले में अवमानना याचिका स्वीकार करने के अलावा टेलिकॉम कंपनी के लेंडर्स को उसका बकाया ब्याज सहित अदा करने का आदेश जारी करे। उसने सुप्रीम कोर्ट से कंपनी के एसेट्स की सेल पर रोक लगाने और पहले बिके एसेट्स के लिए उसे मिली पेमेंट को अपीलेट ट्राइब्यूनल के पुराने ऑर्डर के मुताबिक रिवर्स कराने की भी अपील की है।
एरिक्सन ने कोर्ट से मामले में कंपनी के खिलाफ एनसीएलटी के ऑर्डर और कार्यवाही के मुताबिक इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू कराने की इजाजत दिए जाने की भी अपील की। नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) ने तो पहले आरकॉम के खिलाफ इनसॉल्वेंसी पिटीशन मंजूर कर ली, लेकिन कंपनी 46,600 करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ में 18,000 करोड़ रुपये की कमी लाने के लिए एसेट मॉनेटाइजेशन प्लान देकर इस प्रोसेस से बचने में कामयाब रही।
आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ अवमानना याचिका इसलिए फाइल की गई है, क्योंकि उन्होंने कंपनी पर चढ़े एरिक्सन के बकाये का भुगतान समय पर होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पर्सनल गारंटी दी थी। पेमेंट की पहली डेडलाइन 30 सितंबर, 2018 की थी जो मिस हो गई। इस पर एरिक्सन ने अक्टूबर में आरकॉम के चेयरमैन के खिलाफ अदालत में अवमानना याचिका डाल दी। एरिक्सन का बकाया चुकाने के लिए आरकॉम को सुप्रीम कोर्ट से 15 दिसंबर तक की मोहलत मिली। ईटी ने दिसंबर में खबर दी थी कि एरिक्सन मामले में दूसरी अवमानना याचिका देने की तैयारी में है।
इस मामले में आरकॉम ने कहा है कि एरिक्सन और लेंडर्स का बकाया चुकाने में उसे जो देरी हो रही है, उसकी जिम्मेदार टेलिकॉम डिपार्टमेंट है। आरकॉम का कहना है कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट रिलायंस जियो के साथ उसकी स्पेक्ट्रम डील को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं दे रहा है। कंपनी ने DoT के खिलाफ अदालत में अवमानना याचिका दी हुई है। SC सोमवार को दोनों मामलों की सुनवाई करेगा। गुरुवार को आरकॉम का स्टॉक बीएसई पर 2.17% की गिरावट के साथ ~13.51 पर बंद हुआ। मामले में कमेंट के लिए आरकॉम को भेजे गए ईमेल का जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं मिल पाया था।
आरकॉम ने डील को हरी झंडी मिलने में देरी को DoT की तरफ से जानबूझकर हो रही अवमानना करार दिया है। अदालत में दाखिल आरकॉम की अपील के मुताबिक, 'यह बात साफ है कि भारत सरकार और अवमानना करनेवाला DoT इस अदालत के आदेशों का तनिक भी सम्मान नहीं करते।'
courtesy: NBT