सीबीआई विवाद, राफेल डील समेत कई सवालों के बीच घिरी मोदी सरकार पर अब आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने बडा बयान दिया है। उन्होने कहा कि अगर सरकार केंद्रीय बैंक की आजादी का सम्मान नहीं करेगी तो उसे आर्थिक बाजारों की नाराजगी का शिकार होना पड़ेगा। पीटीआई के मुताबिक, सरकार और आरबीआई के बीच मतभेदों की अटकलों के बीच शुक्रवार को आचार्य ने कहा कि केंद्रीय बैंक की आजादी को कमतर आंकना किसी भी सरकार के लिए 'सेल्फ गोल' साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि बुद्धिमान राजनेता केंद्रीय बैंक को जरूरी स्वायत्ता देंगे ताकि वह आर्थिक स्थितियों के चुनावी लाभ उठा सकें। आचार्य ने कहा, 'सरकारें केंद्रीय बैंक की आजादी का सम्मान नहीं करेंगी तो उन्हें बाजारों से निराशा ही हाथ लगेगी। इसके बाद उन्हें पछतावा होगा कि एक महत्वपूर्ण संस्था को कमतर आंका गया।‘
आचार्य ने कहा कि जो बुद्धिमान सरकारें आवश्यक छूट प्रदान करती हैं, उधार लेने की कम लागत, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के प्यार और लंबे समय तक सत्ता में बने रहने का लाभ पाती हैं। उन्होंने आरबीआई को सरकार का 'मित्र' बताया, जो 'सरकार को अप्रिय लेकिन क्रूर ईमानदार सच्चाई बताएगा।'
डिप्टी गवर्नर ने कहा कि सरकार के ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच से इतर आरबीआई टेस्ट मैच खेलता है, जिसका ध्यान मैच जीतने के साथ ही अगले सेशन में बने रहने पर भी केंद्रित होता है ताकि अगला सेशन भी जीता जा सके।' ब्याज दर घटाए जाने के सवाल पर आचार्य ने कहा, 'इसे ज्यादा घटाने पर कर्ज बढ़ता है जो आगे चलकर महंगाई का कारण बनता है। यह छोटी अवधि के लिए मजबूत आर्थिक वृद्धि का भले संकेत दे लेकिन आगे इसके नतीजे बुरे हो सकते हैं। इसके चलते दीर्घ अवधि में संदिग्ध निवेश, प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट और वित्तीय संकट के खतरे झेलने पड़ सकते हैं।‘
आरबीआई से अधिकारियों ने हाल ही में कहा है कि कुछ बैंकों के कर्ज ब्याज में छूट दी जाए। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केंद्र सरकार आरबीआई की रेगुलेटरी शक्तियां घटाने की तैयारी में है और पेमेंट सिस्टम के लिए अलग से कोई नियामक संस्था बनाने पर सोच रही है।

उन्होंने कहा कि बुद्धिमान राजनेता केंद्रीय बैंक को जरूरी स्वायत्ता देंगे ताकि वह आर्थिक स्थितियों के चुनावी लाभ उठा सकें। आचार्य ने कहा, 'सरकारें केंद्रीय बैंक की आजादी का सम्मान नहीं करेंगी तो उन्हें बाजारों से निराशा ही हाथ लगेगी। इसके बाद उन्हें पछतावा होगा कि एक महत्वपूर्ण संस्था को कमतर आंका गया।‘
आचार्य ने कहा कि जो बुद्धिमान सरकारें आवश्यक छूट प्रदान करती हैं, उधार लेने की कम लागत, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के प्यार और लंबे समय तक सत्ता में बने रहने का लाभ पाती हैं। उन्होंने आरबीआई को सरकार का 'मित्र' बताया, जो 'सरकार को अप्रिय लेकिन क्रूर ईमानदार सच्चाई बताएगा।'
डिप्टी गवर्नर ने कहा कि सरकार के ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच से इतर आरबीआई टेस्ट मैच खेलता है, जिसका ध्यान मैच जीतने के साथ ही अगले सेशन में बने रहने पर भी केंद्रित होता है ताकि अगला सेशन भी जीता जा सके।' ब्याज दर घटाए जाने के सवाल पर आचार्य ने कहा, 'इसे ज्यादा घटाने पर कर्ज बढ़ता है जो आगे चलकर महंगाई का कारण बनता है। यह छोटी अवधि के लिए मजबूत आर्थिक वृद्धि का भले संकेत दे लेकिन आगे इसके नतीजे बुरे हो सकते हैं। इसके चलते दीर्घ अवधि में संदिग्ध निवेश, प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट और वित्तीय संकट के खतरे झेलने पड़ सकते हैं।‘
आरबीआई से अधिकारियों ने हाल ही में कहा है कि कुछ बैंकों के कर्ज ब्याज में छूट दी जाए। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केंद्र सरकार आरबीआई की रेगुलेटरी शक्तियां घटाने की तैयारी में है और पेमेंट सिस्टम के लिए अलग से कोई नियामक संस्था बनाने पर सोच रही है।