
कैम्पस में लोकतंत्र और निर्वाचित छात्र संघ की बहाली सुनिश्चित करने के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने 18 दिनों की भूख हड़ताल के ज़रिए अपना संघर्ष जारी रखा।
तीस्ता सीतलवाड़, एबिन बेसिल और मोहम्मद अथनान से बातचीत करती हैं। इस बातचीत में वे दो दशकों बाद अपने विश्वविद्यालय और निर्वाचित छात्र संघ को फिर से हासिल करने के लिए छात्रों द्वारा किए गए संघर्ष पर चर्चा करते हैं।
यह बातचीत जामिया और उसके छात्रों को बदनाम करने तथा उनके खिलाफ नफरत का माहौल बनाने की कोशिशों को भी उजागर करती है। यह उस दक्षिणपंथी एजेंडे की ओर इशारा करती है, जिसका मकसद भारत के स्वतंत्रता संग्राम से निकले इस ऐतिहासिक संस्थान की पहचान और विरासत को मिटाना है।