जब धर्म परिवर्तन हो सकता है तो जाति परिवर्तन क्यों नहीं ?

Written by Mithun Prajapati | Published on: February 6, 2018
वे आये और घबराए हुए स्वर में कहने लगे- बहुत बुरा हो गया। 

Religious Conversion
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मुझे लगा फिर से कहीं दलित पीटे गए, उनके घरों को आग लगा दी गई। पर ऐसा नहीं था। वे थोड़ा अपने आप को संभालते हुए फिर बोले- फलाने की लड़की एक नीची जाति के लड़के संग भाग गई।
 
मुझे यह खबर सुनकर बहुत खुशी हुई। मैंने मुस्कुराते हुए कहा- इससे बड़ी खुशी की क्या बात हो सकती है कि लड़का लड़की भाग गए। एक बाप दहेज के बोझ से उबर गया। उसे खेत नहीं बेचने पड़ेंगे। महाजन से कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। शादी के बाद कोई सेठ वसूली करने नहीं आएगा।
 
वे गंभीर होकर बोले- बड़े उजड्ड हो यार, किसी की लड़की भाग गई और आपको मजाक सूझ रहा है !
 
मैंने कहा- दो जानें बच गयी इससे ज्यादा खुशी की बात क्या हो सकती है ?
 
वे बोले- क्या मतलब आपका ?
 
मैंने कहा- इसके पहले की दो प्रेमियों को कुछ पागल मिलकर मार दें, भाग जाना बेहतर है।
 
वे उदास हुए और कहने लगे- आपने मुझे निराश किया। मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। आपने शायद मेरी बात पर गौर नहीं किया, वह छोटी जाति वाले के संग भागी है। 
 
उन्होंने 'छोटी जाति' शब्द पर अतिरिक्त जोर दिया। वे यह शब्द मेरे कानों में ठूसने के इरादे से कह रहे थे।
 
मैं और खुश हुआ, मुस्कुराते हुए कहा- वाह, जाति के बंधनों को तोड़ने का इससे बेहतर और कौन सा तरीका हो सकता है कि दो अलग जाति से संबंध रखने वाले प्रेमी भाग निकले। आप उनमें जाति ढूंढ रहे हैं , पर वे प्रेमी थे। उन्हें जाति से क्या लेना-देना !  एक-दूसरे से प्रेम करते थे ये क्या कम है ?
 
वे फिर बोले- अरे भागना ही था तो अपनी जाति वाले के साथ भागती। छोटी जाति वाले के साथ भागकर उसनें कुल का नाम डुबा दिया।
 
मैं थोड़ा असमंजस में था कि यह आदमी दुःखी क्यों है ?  लड़की के भाग जाने का दुःख है या फिर छोटी जाति वाले के साथ चली गयी इसका दुःख है ! वे चेहरा लटकाए मेरी तरफ देखते रहे। वे चाहते थे कि मैं भी दुःखी हो जाऊं और कहूँ की वास्तव में गलत हुआ। उसे भागना नहीं चाहिए था। भागी भी तो अपने जाति वाले के साथ भागना चाहिए था। अपनी जाति वाले के साथ भागने से दुःख फिफ्टी परसेंट कम हो जाता था। 
 
मैंने थोड़ा माहौल को हल्का करने के इरादे से पूछा- लड़का क्या करता था ? 
 
वे बोले- उसी के साथ पढ़ता था। कहीं जॉब लगी थी दोनों की साथ में।
 
मैंने कहा- इससे बेहतर क्या होगा। लड़का भी कमा रहा है, लड़की भी। दोनों का फ्यूचर ब्राइट है। बच्चे बेहतर शिक्षा प्राप्त करेंगे। आने वाली पीढ़ी सुधरेगी। 
 
वे बोले- वो सब ठीक है, पर लड़का अपनी जाति का नहीं है न।
 
मैंने कहा- पकड़कर जाति परिवर्तन कर  दो उसका। उसे अपनी जाति में शामिल कर लो। 
 
वे बौखला गए जैसे मैंने उनकी गर्दन मरोड़ दी हो। उनका बौखला जाना जायज भी था। भला कोई छोटी जाति वाला बड़ी जाति में कैसे शामिल हो सकता है ! बड़ी जाति वाला मुंह पर जूता पड़ने जैसा महसूस करेगा। जिन्हें वे अपने बर्तनों में पानी नहीं पीने देते, बगल में बैठाकर खाना कैसे खिलाएंगे !
 
 वे थोड़ा गुस्सा होते हुए कहने लगे- इतनी बेवकूफी भरी बातें सोच कैसे लेते हो ? भला जाति परिवर्तन कैसे हो सकता है ?
 
मैंने कहा- जैसे धर्म परिवर्तन होता है। 
 
वे उठकर जाने लगे। कहने लगे- आप से कोई चीज शेयर करने लायक नहीं है। हर जगह मजाक सूझता है। 
 
वे चले गए। मैं बस यही सोच रहा हूँ कि वे बीमार हैं। वे जाति से पीड़ित हैं। उन्हें जाति ने जकड़ रखा है। बहुत खतरनाक वायरस होता है जाति का। जिसे यह जकड़ लेता है उसके अंदर की मानवता संवेदना सब मरने लगती है। जितनी जल्दी यह जाति नामक खतरनाक वायरस शरीर से निकल जाए, समाज के लिए, मानवता के लिए बेहतर है।