लखनऊ: पानी की समस्या पर बाल्टियों लेकर विरोध करेगी इंसानी बिरादरी

Published on: July 23, 2018
लखनऊ के इंदिरा नगर के सी ब्लाक में स्थित गाजीपुर और उससे सटी आवास विकास कालोनी में लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे गरीब-गुरबे नगर निगम और स्थानीय पार्षद के उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ 23 जुलाई को बाल्टियों के साथ लाइन लगा कर विरोध दर्ज करेंगे. नगर निगम द्वारा लगाई गयीं पानी की टंकियां खुद ही भेदभाव की गवाही देती हैं. दूसरी तरफ तमाम मामलों की तरह इस मामले में भी स्थानीय पार्षद की भूमिका गरीब जनता के खिलाफ रही है. इंसानी बिरादरी ने इस स्थिति को लोकतंत्र का दुर्भाग्य करार दिया है.


 
इंसानी बिरादरी के खिदमतगार वीरेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि गाजीपुर की तीन टंकियां कई दिनों से खाली पड़ी हैं. एक चिटक चुकी है, दूसरी का सबमर्सिबल खराब है और तीसरी के सबमर्सिबल की वायारिंग जर्जर है. उसे ठीक कराने या नया लगाने की जिम्मेदारी लोगों पर रहती है. गड़बड़ी होती है तो लोग चंदा जमा कर उसे ठीक भी कराते रहे हैं. लेकिन जहां दो जून की रोटी का जुगाड़ करना पहाड़ चढ़ने की चुनौती हो, वहां चंदे का जुटना आसान भी नहीं होता. टंकी इसीलिए खाली पड़ी है.
 
उन्होंने कहा कि कायदे से और कम से कम गरीब बस्तियों में पानी की टंकियों के रखरखाव का जिम्मा नगर निगम को लेना चाहिए. आरोप लगाया कि नगर निगम का गरीब जनता के साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार है. गैर जरूरी मदों में पानी की तरह पैसा बहा दिया जाता है लेकिन गरीब बस्तियों में पानी जैसी मूलभूत जरूरतों की पूर्ति से मुंह चुराया जाता है.
 
उन्होंने बताया कि गाजीपुर की दो टंकियां कुल पांच सौ लीटर की हैं और इन्हीं दोनों टंकियों पर पानी लेनेवालों की भीड़ सबसे ज्यादा लगती है. इसके चलते पानी को लेकर कहासुनी होती रहती है जो कभी-कभार मारपीट में भी बदल काती है. बाकी टंकियां एक हजार लीटर की हैं. भाजपाई पार्षद दिलीप श्रीवास्तव की छोटी सी कालोनी में ऐसी ही दो टंकियां हैं जहां पानी लेनेवालों की संख्या बहुत-बहुत कम रहती है.
 
इंसानी बिरादरी ने कहा कि यह निर्मम भेदभाव का उदाहरण है. लखनऊ के अधिकतर इलाकों का यही सीन है. इसके खिलाफ गरीबों को एकजुट संघर्ष में उतरना चाहिए. बेहतरी के लिए यही इकलौता रास्ता है.  
 

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