Goa SIR: बॉम्बे हाई कोर्ट ने ECI को अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए छह मतदाताओं के नाम फिर शामिल करने का आदेश दिया

Written by sabrang india | Published on: November 6, 2026
बॉम्बे हाई कोर्ट (गोवा बेंच) ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह 10 दिनों के भीतर परिवार के छह सदस्यों के नाम शामिल करे। साथ ही, कोर्ट ने सवाल उठाया कि जिन मतदाताओं ने अपना निवास स्थान बदल लिया है, उन्हें अपने पुराने पते के बारे में घोषणापत्र वाले फॉर्म जमा करने के लिए क्यों मजबूर किया गया।

  
Image: goa365tv

बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 5 नवंबर को भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि वह एक ही परिवार के उन छह सदस्यों के नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल करे, जिन्हें गोवा में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के दौरान अंतिम मतदाता सूची से हटा दिया गया था।

न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने उन याचिकाओं को स्वीकार कर लिया, जिनमें नाम हटाए जाने और 'फॉर्म 8' आवेदनों को खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। बता दें कि मतदाता अपने आवासीय पते को अपडेट करने के लिए 'फॉर्म 8' का इस्तेमाल करते हैं।

अदालत ने गोवा के सांताक्रूज विधानसभा क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं के निवास स्थान का सत्यापन करने के बाद 10 दिनों के भीतर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल करें।

'लाइव लॉ' (LiveLaw) की रिपोर्ट के अनुसार, बेंच ने कहा, "हम याचिका स्वीकार करते हैं... हमने ECI के इस तर्क को खारिज कर दिया है कि इस मामले की सुनवाई टाल दी जानी चाहिए क्योंकि SIR का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है... यह मामला SIR से संबंधित नहीं है... इसलिए, हमने (गोवा के) सांताक्रूज निर्वाचन क्षेत्र के BLO को आदेश दिया है कि वे आज से 10 दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ें।"

अदालत ने ECI के उस अनुरोध को भी ठुकरा दिया, जिसमें उन्होंने अपने आदेश के अमल पर दो सप्ताह के लिए रोक लगाने की मांग की थी।

अदालत ने 'एन्यूमरेशन फॉर्म' (गणना फॉर्म) जमा करने की अनिवार्यता पर सवाल उठाए

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सालगांवकर परिवार के सदस्यों (याचिकाकर्ताओं) ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने बताया कि अपने आवासीय पते में बदलाव के लिए 'फॉर्म 8' जमा करने के बावजूद, उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।

ECI ने तर्क दिया कि SIR दिशानिर्देशों के तहत, मतदाताओं को 'फॉर्म 8' के साथ पहले से भरा हुआ 'एन्यूमरेशन फॉर्म' (गणना फॉर्म) भी जमा करना था। चूंकि याचिकाकर्ताओं ने ये फॉर्म जमा नहीं किए थे, इसलिए उनसे 'फॉर्म 6' भरने के लिए कहा गया, जिसका उपयोग मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है।

बेंच ने इस अनिवार्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले से भरे हुए उस 'एन्यूमरेशन फॉर्म' में एक घोषणा होती है कि मतदाता उसी पते पर रह रहा है जो पहले से मौजूद मतदाता सूची में दर्ज है। यह सवाल उठाते हुए कि जो मतदाता अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, उन्हें इस तरह की घोषणा करने के लिए कैसे मजबूर किया जा सकता है, जस्टिस मेनेजेस ने टिप्पणी की:

“अगर कोई मतदाता फॉर्म 8 लेकर आपके पास आता है और कहता है कि उसने अपना पता बदल लिया है, तो आप उससे यह नहीं कह सकते कि 'देखिए, आपका नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं है, इसलिए अब आपको फॉर्म 6 (नए मतदाता के रूप में पंजीकरण) भरना होगा।' आपके एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फॉर्म) में मूल रूप से एक घोषणा होती है कि व्यक्ति उसी पते पर रह रहा है जो मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज है। लेकिन सोचिए, अगर किसी ने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो क्या आप उसे पहले से भरे हुए एन्यूमरेशन फॉर्म के जरिए कोई गलत घोषणा करने के लिए मजबूर कर सकते हैं? वह व्यक्ति बस फॉर्म 8 क्यों नहीं दे सकता? आखिरकार, उसका नाम तो पहले से ही मौजूदा सूची में है, वह तो बस अपना पता बदलवाना चाहता है... तो फिर एन्यूमरेशन फॉर्म भरने के लिए मजबूर क्यों किया जाए?”

बेंच ने यह भी सवाल किया कि जो मतदाता पहले से ही सूची में शामिल हैं और केवल अपना पता ठीक करवाना चाहते हैं, उन्हें एक नए मतदाता के रूप में आवेदन करने के लिए क्यों कहा जाना चाहिए?

कोर्ट ने पात्र मतदाताओं के सूची से बाहर हो जाने के जोखिम की ओर इशारा किया

सुनवाई के दौरान, बेंच ने ECI (चुनाव आयोग) के उस तरीके पर सवाल उठाया, जिसमें फॉर्म 8 के आवेदनों को सत्यापन (वेरिफिकेशन) के लिए पेंडिंग रखने के बजाय सीधे खारिज कर दिया जाता है। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि जो मतदाता अपना घर बदल चुके हैं, उन्हें ऐसी घोषणा करने के लिए मजबूर करने के क्या परिणाम हो सकते हैं, जो अब उनके वास्तविक निवास स्थान को नहीं दर्शाती है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने इसे एक “कैच-22” (ऐसी स्थिति जहां कोई भी विकल्प सही न हो) जैसी स्थिति बताया। इसमें जो मतदाता अपना निवास स्थान बदल चुके थे, उनके फॉर्म 8 आवेदनों को खारिज कर दिया गया और उन्हें फॉर्म 6 भरने के लिए कहा गया। इससे उनके मतदाता पंजीकरण को लेकर और अधिक मुश्किलें पैदा हो सकती थीं।

ECI की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने तर्क दिया कि ड्राफ्ट SIR रोल को नए सिरे से (de novo) तैयार किया गया था, जो हाल ही में एकत्र किए गए एन्यूमरेशन फॉर्मों पर आधारित था। ECI के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं थे, वे मौजूदा प्रविष्टि (entry) में बदलाव के लिए फॉर्म 8 का उपयोग नहीं कर सकते थे। उन्हें 'दावे और आपत्तियों' (claims and objections) की अवधि के दौरान फॉर्म 6 के माध्यम से नए सिरे से आवेदन करना था।

हालांकि, कोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार कर लिया और उन छह नामों को वापस सूची में शामिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने ECI के उस अनुरोध को भी खारिज कर दिया, जिसमें SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही व्यापक चुनौतियों पर फैसला आने तक कार्यवाही को टालने की मांग की गई थी।

विस्तृत लिखित आदेश की प्रतीक्षा है।

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