पुणे RTO द्वारा 20 नवंबर तक जांच की घोषणा के बीच, यात्रियों ने कथित विनियामक विफलता को लेकर महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक की आलोचना की है।

दीवाली नजदीक आते ही, मुंबई और पुणे से अपने घर लौटकर परिवारों के साथ त्योहार मनाने की सालाना आपाधापी यात्रियों के लिए एक महंगी मुसीबत बन गई है। आरोप है कि प्राइवेट टूरिस्ट बस ऑपरेटर बहुत ज्यादा किराया वसूल रहे हैं। कुछ रूटों पर तो टिकट की कीमत 7,000 रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में यात्री सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इन ऑपरेटरों को त्योहार की इस भीड़ का फायदा उठाकर मनमाना मुनाफा कमाने की छूट कैसे दी जा रही है।
'मिड-डे' की रिपोर्ट के अनुसार, यात्रियों का आरोप है कि प्राइवेट बसों का किराया सामान्य दरों से दो से तीन गुना तक बढ़ गया है। एक रूट पर, जिस टिकट की कीमत आमतौर पर लगभग 700 रुपये होती है, वह 4,000 रुपये में बेची जा रही थी। अन्य रूटों पर किराया 6,000 से 7,000 रुपये तक पहुंच गया है, जिससे बस से यात्रा करना लगभग हवाई यात्रा जितना ही महंगा हो गया है।
किराए में हुई इस भारी बढ़ोतरी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी गुस्सा है। यात्री महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक और उनके विभाग की आलोचना कर रहे हैं। उनकी शिकायतों से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या राज्य सरकार के पास ऐसी कोई व्यवस्था या इच्छाशक्ति है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्राइवेट ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर त्योहार की भीड़ को बेतहाशा मुनाफा कमाने का मौका न बना लें?
एक यात्री ने 'X' (ट्विटर) पर लिखा, "क्या प्राइवेट बसों के टिकट की कीमतों पर कोई नियम-कानून नहीं है? किराया 6,000-7,000 रुपये तक पहुंच गया है, जो लगभग फ्लाइट के टिकट के बराबर है। जो लोग आखिरी समय में बुकिंग करते हैं, वे क्या करें? क्या वे अपने किराए के कमरों (पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन) में ही दीवाली मनाएं?"
एक अन्य यूजर ने परिवहन मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वे "सो रहे हैं या सोने का नाटक कर रहे हैं?" बुकिंग प्लेटफॉर्म पर दिख रहे किराए के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए, एक यात्री ने टिकट की कीमतों में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी की ओर इशारा किया और पूछा कि 700 रुपये का किराया अचानक 4,000 रुपये कैसे हो सकता है।
ये शिकायतें दिखाती हैं कि त्योहारों के समय यात्री कितने असहाय हो जाते हैं। छुट्टियों के करीब आने पर ट्रेन या अन्य सस्ते साधनों में टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है, इसलिए यात्रियों के पास प्राइवेट बसों का सहारा लेने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता। ऑपरेटर इस कमी का फायदा उठाते हैं, जबकि आखिरी समय में यात्रा करने वाले यात्रियों को इसका भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।


पुणे RTO ने निरीक्षण अभियान शुरू किया
लगातार मिल रही शिकायतों के बीच, पुणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) ने 1 नवंबर को एक विशेष निरीक्षण अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य निजी कॉन्ट्रैक्ट बसों की जांच करना और ऑपरेटरों को यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने से रोकना है। 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' के अनुसार, यह अभियान 20 नवंबर 2026 तक चलेगा।
RTO अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निजी बस ऑपरेटर, महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) द्वारा उसी श्रेणी की बसों के लिए तय किए गए किराए से 1.5 गुना से अधिक किराया नहीं वसूल सकते। ऑपरेटरों को अपनी बसों के अंदर किराए की सूची (फेयर चार्ट) लगाना भी अनिवार्य है, ताकि यात्री लागू दरों की जांच कर सकें।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जो ऑपरेटर तय किराया सीमा का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस निरीक्षण अभियान के दौरान यह भी जांचा जाएगा कि क्या बसों के पास वैध परमिट हैं, क्या ऑपरेटर अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जा रहे हैं, और क्या बसों में अनिवार्य सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं।
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'मिड-डे' की रिपोर्ट के अनुसार, यात्रियों का आरोप है कि प्राइवेट बसों का किराया सामान्य दरों से दो से तीन गुना तक बढ़ गया है। एक रूट पर, जिस टिकट की कीमत आमतौर पर लगभग 700 रुपये होती है, वह 4,000 रुपये में बेची जा रही थी। अन्य रूटों पर किराया 6,000 से 7,000 रुपये तक पहुंच गया है, जिससे बस से यात्रा करना लगभग हवाई यात्रा जितना ही महंगा हो गया है।
किराए में हुई इस भारी बढ़ोतरी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी गुस्सा है। यात्री महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक और उनके विभाग की आलोचना कर रहे हैं। उनकी शिकायतों से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या राज्य सरकार के पास ऐसी कोई व्यवस्था या इच्छाशक्ति है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्राइवेट ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर त्योहार की भीड़ को बेतहाशा मुनाफा कमाने का मौका न बना लें?
एक यात्री ने 'X' (ट्विटर) पर लिखा, "क्या प्राइवेट बसों के टिकट की कीमतों पर कोई नियम-कानून नहीं है? किराया 6,000-7,000 रुपये तक पहुंच गया है, जो लगभग फ्लाइट के टिकट के बराबर है। जो लोग आखिरी समय में बुकिंग करते हैं, वे क्या करें? क्या वे अपने किराए के कमरों (पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन) में ही दीवाली मनाएं?"
एक अन्य यूजर ने परिवहन मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वे "सो रहे हैं या सोने का नाटक कर रहे हैं?" बुकिंग प्लेटफॉर्म पर दिख रहे किराए के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए, एक यात्री ने टिकट की कीमतों में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी की ओर इशारा किया और पूछा कि 700 रुपये का किराया अचानक 4,000 रुपये कैसे हो सकता है।
ये शिकायतें दिखाती हैं कि त्योहारों के समय यात्री कितने असहाय हो जाते हैं। छुट्टियों के करीब आने पर ट्रेन या अन्य सस्ते साधनों में टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है, इसलिए यात्रियों के पास प्राइवेट बसों का सहारा लेने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता। ऑपरेटर इस कमी का फायदा उठाते हैं, जबकि आखिरी समय में यात्रा करने वाले यात्रियों को इसका भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।


पुणे RTO ने निरीक्षण अभियान शुरू किया
लगातार मिल रही शिकायतों के बीच, पुणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) ने 1 नवंबर को एक विशेष निरीक्षण अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य निजी कॉन्ट्रैक्ट बसों की जांच करना और ऑपरेटरों को यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने से रोकना है। 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' के अनुसार, यह अभियान 20 नवंबर 2026 तक चलेगा।
RTO अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निजी बस ऑपरेटर, महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) द्वारा उसी श्रेणी की बसों के लिए तय किए गए किराए से 1.5 गुना से अधिक किराया नहीं वसूल सकते। ऑपरेटरों को अपनी बसों के अंदर किराए की सूची (फेयर चार्ट) लगाना भी अनिवार्य है, ताकि यात्री लागू दरों की जांच कर सकें।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जो ऑपरेटर तय किराया सीमा का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस निरीक्षण अभियान के दौरान यह भी जांचा जाएगा कि क्या बसों के पास वैध परमिट हैं, क्या ऑपरेटर अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जा रहे हैं, और क्या बसों में अनिवार्य सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं।
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