सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना का नाम बदलकर बीजेपी का प्रचार कर रही है सरकार

Written by Sabrangindia Staff | Published on: August 8, 2018
'जन औषधि योजना' को नवंबर 2008 में रसायन और उर्वरक मंत्रालय की ओर से इसलिए लॉन्च किया गया था ताकि सस्ती कीमतों पर गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। लेकिन बाद में 'भारतीय' और योजना के स्थान पर परियोजना शब्द को जोड़कर इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना कर दिया गया था। 



जन स्वास्थ्य अभियान और ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क ने गहरी चिंता व्यक्त की है कि सार्वजनिक वित्त पोषित प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का पॉलीटिकल पॉलिसी के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। 

यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार की प्रमुख योजना (प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना) के माध्यम से दी जाने वाली दवाईयों पर भगवा रंग में बीजेपी के नाम पर प्रकाश डाला गया है। प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना की वेबसाइट में पहले शब्द में भी भगवा रंग में प्रकाश डाला गया है। जाहिर है, सार्वजनिक रुप से वित्त पोषित योजना के माध्यम से वेबसाइट और प्रोडक्टों का उपयोग राजनीतिक दल बीजेपी के नाम पर प्रकाश डालने के लिए किया जा रहा है। यह सार्वजनिक निधियों के सकल दुरुपयोग का प्रतिनिधित्व करता है और सरकारी विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करता है। 

जन औषधि योजना की शुरुआत साल 2008 में रसायन और उर्वरक मंत्रालय की ओर से की गई थी जिससे कम कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं प्रदान की जा सके। एनडीए सरकार ने इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना (PBJP) किया गया। बाद में इस योजना में 'भारतीय' शब्द जोड़ा गया और 'योजना' के स्थान पर 'परियोजना' किया गया। स्पष्ट है कि यह योजना का नाम 'BJP' पर लोगों का ध्यान दिलाने के लिए नाम बदला गया। 

हालांकि सरकार कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए वैधानिक तरीके से विज्ञापन जारी कर सकती है। सरकार जनता के पैसों से सरकारी योजनाओं के बारे में एक विशेष राजनीतिक दल को विज्ञापन में पेश करना चाहती है. यह अनैतिक और गैरकानूनी है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।  

सरकार की योजनाएं और कार्यक्रम राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (संविधान का भाग- IV) के तहत आगे काम करते हैं। सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कदम उठाने और उपाय करने के कर्तव्य के लिए बाध्य है जिसमें सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण दवाएं प्रदान करना भी शामिल है। जन औषधि योजना इसे लागू करने का माध्यम है। भगवा रंग में बीजेपी के नाम को हाईलाइट करने का साफ संदेह है कि बीजेपी इस योजना को चलाने में शामिल है। 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक सार्वजनिक कार्यालय और सार्वजनिक निधियों का इस्तेमाल व्यक्तिगत, राजनीति या पक्षतापूर्ण उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता है, संविधान के तहत भी इसकी अनुमति नहीं है। 

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विज्ञापन दिशानिर्देश 2014 में निर्धारित किया गया है कि सरकारी विज्ञापनों को राजनीतिक तटस्थता बनाए रखना है और राजनीतिक दल या राजनीतिक व्यक्ति की महिमा से बचाना है। इसके तहत यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकार को पार्टी को सत्ता में सत्ता में सकारात्मक प्रभाव नहीं देना चाहिए।

बाकी ख़बरें