हैदराबाद: दो मुस्लिम इलेक्ट्रीशियनों से ‘जय श्री राम’ बुलवाकर कथित मारपीट

Written by sabrang india | Published on: October 23, 2026
25 वर्षीय मोहम्मद वाहेद अहमद और 26 वर्षीय मोहम्मद हैदर खान बिजली के काम से उस इलाके में गए थे। वहां पड़ोसियों के साथ हुई बहस ने कथित तौर पर मारपीट का रूप ले लिया।


फोटो साभार : द ऑब्जर्वर पोस्ट

हैदराबाद के पुराने शहर के दो मुस्लिम इलेक्ट्रीशियन पर शमशाबाद के रल्लागुडा में कुछ लोगों ने कथित तौर पर हमला कर दिया। इस घटना के बाद तेलंगाना में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 25 वर्षीय मोहम्मद वाहेद अहमद और 26 वर्षीय मोहम्मद हैदर खान बिजली के काम से उस इलाके में गए थे। वहां पड़ोसियों के साथ हुई बहस ने कथित तौर पर मारपीट का रूप ले लिया।

दोनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें उस्मानिया जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

इस घटना की ‘मजलिस बचाओ तहरीक’ (MBT) और ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ (AIMIM) ने आलोचना की है। विपक्षी दलों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस के अनुसार, पेंट के डिब्बे को लेकर हुआ विवाद मारपीट में बदल गया।

घटना के बारे में मिली जानकारी के अनुसार, गलती से पेंट का एक डिब्बा पड़ोस के एक घर पर गिर गया, जिसके बाद इलेक्ट्रीशियनों और स्थानीय लोगों के बीच बहस हो गई।

शमशाबाद पुलिस ने बताया कि यह घटना दो गुटों के बीच हुई बहस का नतीजा थी। दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर दो FIR दर्ज की गई हैं।

‘साउथ फर्स्ट’ से बात करते हुए शमशाबाद स्टेशन हाउस ऑफिसर बी. संजीवुलु ने बताया कि विवाद तब शुरू हुआ जब पेंट का एक डिब्बा पड़ोसी के घर पर गिर गया, जिससे लड़ाई हो गई।

पुलिस ने इस बारे में और जानकारी देने से इनकार कर दिया है और FIR को भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

हालांकि, मारपीट के बारे में एक और जानकारी सामने आई है, जिसके अनुसार इस दौरान लगभग 20 लोग इकट्ठा हो गए। आरोप है कि उन्होंने दोनों इलेक्ट्रीशियनों से “जय श्री राम” बोलने को कहा और फिर उन पर हमला कर दिया।

पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन पर डंडों से हमला किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पार्टियों का आरोप है कि पुलिस ने पीड़ितों की मदद नहीं की

MBT के प्रवक्ता अमजद उल्लाह खान ने आरोप लगाया कि घायल लोग किसी तरह वहां से बचकर स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंचे, लेकिन उन्हें वहां से कोई उचित मदद नहीं मिली।

एक जानकारी के अनुसार, इसके बाद वे किसी दूसरे पुलिस स्टेशन गए, जहां से उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

पीड़ितों के परिवारों का यह भी आरोप है कि मारपीट के दौरान पुलिसकर्मी वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पुलिस की भूमिका की जांच की मांग की है। खान ने पीड़ितों से मुलाकात की और मांग की कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस हमले की जांच करें, साथ ही इस बात की भी जांच करें कि स्थानीय पुलिस ने पीड़ितों की मदद क्यों नहीं की।

AIMIM के MLC मिर्जा रियाज उल हसन एफेंडी ने भी उस्मानिया जनरल अस्पताल जाकर पीड़ितों और उनके परिवारों से मुलाकात की।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें पूरी जांच करने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।

खान ने तेलंगाना सरकार पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (जिनके पास गृह विभाग भी है) के नेतृत्व में सरकार ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह पर चल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए मुख्यमंत्री ही जिम्मेदार हैं।

MBT का दावा: 50 से ज्यादा घटनाएं हुईं

खान ने दावा किया कि उनकी पार्टी के पास मौजूद शिकायतों और ज्ञापनों के अनुसार, जब से रेवंत रेड्डी ने मुख्यमंत्री का पद संभाला है, तब से मुसलमानों और मुस्लिम संस्थानों को निशाना बनाकर किए गए सांप्रदायिक हमलों की 50 से ज्यादा घटनाएं सामने आई हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से की गई अपील का सरकार के रवैये पर कोई असर नहीं पड़ा है।

‘X’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट में खान ने कहा कि अगर तेलंगाना में कांग्रेस सरकार का रवैया अलग दिखता है, तो राष्ट्रीय स्तर पर धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठ सकते हैं।

MBT के प्रवक्ता ने पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए सुरक्षा की मांग की और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

वहीं, पुलिस का कहना है कि यह घटना दो समूहों के बीच का विवाद है और दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले दर्ज कर लिए गए हैं।

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