जब SDO और नागरिकों की समस्याओं को हल करने वाले सरकारी कैंप ने जिम्मेदारी MLA पर डाल दी, तो ये महिलाएँ दाना के पास गईं, लेकिन उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा। उन्होंने अन्नपूर्णा योजना का लाभ मिलने में हो रही देरी का मुद्दा उठाने और MLA की टिप्पणी पर उनसे जवाब माँगने का फैसला किया है।

फोटो साभार : द वायर
पश्चिम बंगाल के बांकुरा की बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं को तब गहरा झटका लगा जब वे शुक्रवार 2 अक्टूबर दोपहर स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) MLA, नीलाद्रि शेखर दाना से मिलने गईं। महिलाओं का कहना है कि वे ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत मदद मांगने के लिए दाना के पास गई थीं। यह योजना मुश्किल हालात वाले परिवारों की महिलाओं के लिए एक आर्थिक सहायता योजना है।
लेकिन मदद करने के बजाय, उनका आरोप है कि दाना ने उनसे हिंदुत्व का नारा ‘जय श्री राम’ लगाने को कहा और घोषणा की कि अन्नपूर्णा योजना का लाभ पहले हिंदू महिलाओं को मिलेगा और उसके बाद ही मुस्लिम परिवारों को।
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, बांकुरा नगरपालिका के वार्ड नंबर 19 में खेथरडांगा में रहने वाली इन महिलाओं का कहना है कि वे शहर में भैरवस्थान के पास स्थित दाना के ऑफिस से अपमानित महसूस करते हुए लौटीं। उन्होंने MLA के व्यवहार और अन्नपूर्णा योजना का लाभ न मिल पाने की अपनी शिकायत को अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया है।
MLA से मिलकर घर लौटने पर खेथरडांगा की सबेना मंडल ने कहा, “बांकुरा के MLA के व्यवहार से हमें इतना अपमान महसूस हुआ कि हम खाना भी नहीं खा पाईं।” लौटने के बाद काफी परेशान दिख रही रेशमा बीबी ने कहा, “उस दिन पूरे मोहल्ले में किसी ने खाना नहीं खाया।”
महिलाओं की शिकायत है कि उन्हें अन्नपूर्णा योजना के तहत वादा किया गया 3,000 रुपये का मासिक भुगतान नहीं मिल रहा है, जिसका वादा BJP ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान और सरकार बनाने के बाद किया था। अन्नपूर्णा योजना के भुगतान में देरी और भुगतान न होने के कारण न केवल बांकुरा में, बल्कि बंगाल के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। कई लोगों का कहना है कि BJP के सत्ता में आने के बाद से उन्हें एक भी किस्त नहीं मिली है।
लेकिन खेथरडांगा की इन महिलाओं के लिए, योजना की विफलता के साथ-साथ अपमान की चोट भी मिली है। इस इलाके में ज्यादातर लोग मुस्लिम हैं और अपनी रोजी-रोटी के लिए पूरी तरह से दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। काम के लिए अच्छे मौके न होने और कम मजदूरी मिलने की वजह से वे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर रहते हैं।
बांकुरा सम्मिलनी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर प्रतिप मुखर्जी ने बताया कि खेथरडांगा के ज्यादातर निवासी शारीरिक श्रम करने वाले मजदूर हैं, जिन्हें कभी-कभी ही काम मिलता है — या तो बांकुरा रेलवे गुड्स शेड में या बांकुरा शहर के बाजारों में। उन्होंने कहा, “काम अनियमित है और परिवारों को अक्सर गुजारा करने में मुश्किल होती है।”
सरकार ने जिम्मेदारी टाल दी
जब ‘द वायर’ ने इस इलाके का दौरा किया, तो महिलाओं ने बताया कि वे सितंबर के आखिरी हफ्ते में अन्नपूर्णा योजना का लाभ न मिलने की शिकायत करने बांकुरा के सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) के पास गई थीं। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से आवेदन किया था, लेकिन उनमें से ज्यादातर को पैसे कभी नहीं मिले।
SDO के ऑफिस में उन्हें बताया गया कि गांधी जयंती (2 अक्टूबर) पर बांकुरा नगरपालिका में ‘सेवा सेतु अभियान’ आयोजित किया जाएगा और यह 4 अक्टूबर तक चलेगा। उन्हें मदद के लिए वहां जाने को कहा गया। ‘सेवा सेतु अभियान’ पश्चिम बंगाल की पिछली सरकारों द्वारा शुरू किया गया एक जन-संपर्क कार्यक्रम है, जिसका मकसद सरकारी योजनाओं के वादों और उनके क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना है।
इसके बाद, खेथरडांगा की महिलाओं का एक बड़ा समूह अपने दस्तावेज लेकर पहले दिन — 2 अक्टूबर को — बांकुरा के गोधुली लॉज में आयोजित ‘सेवा सेतु अभियान’ में पहुंचा। लेकिन यहां भी उन्हें सिर्फ इधर-उधर भटकाया गया। इस बार, उन्हें BJP विधायक दाना से मिलने के लिए कहा गया।
फिर उस समूह की लगभग 30 महिलाएं चार ई-रिक्शा में सवार होकर बांकुरा में भैरवस्थान के पास स्थित दाना के ऑफिस के लिए रवाना हुईं।
‘वादे पूरे करने के बजाय बेइज्जती की गई’
MLA से मिलने गईं महिलाओं में से एक, रेशमा बीबी ने कहा, “हम इस उम्मीद में वहां गए थे कि कोई हमारी समस्या का समाधान करेगा। लेकिन जैसे ही MLA ने हमें देखा, उन्होंने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। हमने उनसे कहा कि ठीक है, लेकिन हमारे अन्नपूर्णा योजना के पैसे का क्या होगा? उन्होंने हमसे कहा कि हिंदू महिलाओं को पहले पैसे मिलने चाहिए और मुस्लिम महिलाओं को बाद में मिलेंगे।”
एक और निवासी, शरीफी बीबी ने आरोप लगाया कि दाना ने उनसे कहा, “हम मुस्लिम वोटों से नहीं जीते हैं, इसलिए आपकी समस्या पर बाद में विचार किया जाएगा।”
नूरजान बीबी ने कहा, “MLA लोगों को हिंदू और मुस्लिम में क्यों बांट रहे हैं? हम वहां वोट या राजनीति पर चर्चा करने नहीं गए थे। हम सरकार द्वारा आयोजित कैंप में इसलिए गए क्योंकि हमें वहां जाने के लिए कहा गया था, और वहां से हमें MLA से मिलने का निर्देश दिया गया।”
नूरजान ने कहा, “हम मदद की उम्मीद में गए थे, लेकिन इसके बजाय हमारी बेइज्जती की गई।”
मदद से इनकार और सांप्रदायिक टिप्पणियां ही इन मुस्लिम महिलाओं की परेशानी का अंत नहीं थीं। उनमें से कई ने कहा कि MLA के साथ आए लोगों ने उनके प्रति अश्लील इशारे किए। उनसे अन्नपूर्णा योजना का लाभ पाने के बदले ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने को कहा गया।
“क्या हम मुस्लिम होने के कारण अन्नपूर्णा योजना के लाभ की हकदार नहीं हैं?”
“हमारी बेइज्जती क्यों की गई?”
“हम चाहते हैं कि जो भी पात्र हैं, उन्हें सरकारी योजना का लाभ मिले।”
जब ‘द वायर’ (The Wire) खेथरडांगा पहुंचा, तो इलाके की महिलाएं यही बातें कह रही थीं।
‘खाना खाने का मन नहीं, लेकिन इस मामले को आगे बढ़ाएंगी’
महिलाओं ने कहा कि वे MLA के दफ्तर से मायूस होकर लौटीं, लेकिन घर पहुंचने पर उन्हें और भी बुरा लगा। उनके साथ हुई घटना की खबर उनके परिवारों और पड़ोसियों तक पहले ही पहुंच चुकी थी। कई महिलाओं ने ‘द वायर’ को बताया कि घर पहुंचने पर उन्हें खाना देखने का भी मन नहीं हुआ — 2 अक्टूबर को सरकारी कैंप में जाने से पहले उन्होंने जो चावल और सब्जी बनाई थी, वह वैसी ही रखी थी।
खुशबू बीबी ने कहा, “हमने सुबह जल्दी खाना बनाया था और निकल गए थे, लेकिन हम यह नहीं भूल सकते कि बांकुरा के MLA ने हमारी कितनी बेइज्जती की। हम खाना नहीं खा पा रहे हैं।” जरीना बीबी, हसीना बीबी, साहेदुन बीबी, आयशा बीबी, फुलसुरा बीबी और कई अन्य महिलाएं सबेना मंडल के घर पर इकट्ठा हुईं और चर्चा की कि वे आगे क्या करेंगी।
महिलाओं ने तय किया है कि वे 6 अक्टूबर को बांकुरा SDO से मिलेंगी और उनसे पूछेंगी कि उन्हें अन्नपूर्णा योजना का पेमेंट क्यों नहीं मिला। साथ ही, वे यह भी पूछेंगी कि क्या MLA को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर उनसे उस तरह बात करने का अधिकार था।
‘द वायर’ ने महिलाओं की शिकायतों पर प्रतिक्रिया जानने के लिए BJP MLA नीलाद्रि शेखर दाना से संपर्क किया। उन्होंने माना कि उन्होंने “जय श्री राम” कहा था, लेकिन अपमानजनक बातें कहने से इनकार किया।
दाना ने कहा, “हां, मैंने ‘जय श्री राम’ कहा था, लेकिन मैंने किसी भी महिला के बारे में कोई अपमानजनक बात नहीं कही। मैंने उनसे कहा कि मामले की जांच की जाएगी। किसने क्या अपमानजनक शब्द कहे, मुझे नहीं पता। मेरे साथ कई लोग थे और उन्होंने क्या कहा होगा, इसकी जिम्मेदारी मैं नहीं लूंगा।”
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फोटो साभार : द वायर
पश्चिम बंगाल के बांकुरा की बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं को तब गहरा झटका लगा जब वे शुक्रवार 2 अक्टूबर दोपहर स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) MLA, नीलाद्रि शेखर दाना से मिलने गईं। महिलाओं का कहना है कि वे ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत मदद मांगने के लिए दाना के पास गई थीं। यह योजना मुश्किल हालात वाले परिवारों की महिलाओं के लिए एक आर्थिक सहायता योजना है।
लेकिन मदद करने के बजाय, उनका आरोप है कि दाना ने उनसे हिंदुत्व का नारा ‘जय श्री राम’ लगाने को कहा और घोषणा की कि अन्नपूर्णा योजना का लाभ पहले हिंदू महिलाओं को मिलेगा और उसके बाद ही मुस्लिम परिवारों को।
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, बांकुरा नगरपालिका के वार्ड नंबर 19 में खेथरडांगा में रहने वाली इन महिलाओं का कहना है कि वे शहर में भैरवस्थान के पास स्थित दाना के ऑफिस से अपमानित महसूस करते हुए लौटीं। उन्होंने MLA के व्यवहार और अन्नपूर्णा योजना का लाभ न मिल पाने की अपनी शिकायत को अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया है।
MLA से मिलकर घर लौटने पर खेथरडांगा की सबेना मंडल ने कहा, “बांकुरा के MLA के व्यवहार से हमें इतना अपमान महसूस हुआ कि हम खाना भी नहीं खा पाईं।” लौटने के बाद काफी परेशान दिख रही रेशमा बीबी ने कहा, “उस दिन पूरे मोहल्ले में किसी ने खाना नहीं खाया।”
महिलाओं की शिकायत है कि उन्हें अन्नपूर्णा योजना के तहत वादा किया गया 3,000 रुपये का मासिक भुगतान नहीं मिल रहा है, जिसका वादा BJP ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान और सरकार बनाने के बाद किया था। अन्नपूर्णा योजना के भुगतान में देरी और भुगतान न होने के कारण न केवल बांकुरा में, बल्कि बंगाल के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। कई लोगों का कहना है कि BJP के सत्ता में आने के बाद से उन्हें एक भी किस्त नहीं मिली है।
लेकिन खेथरडांगा की इन महिलाओं के लिए, योजना की विफलता के साथ-साथ अपमान की चोट भी मिली है। इस इलाके में ज्यादातर लोग मुस्लिम हैं और अपनी रोजी-रोटी के लिए पूरी तरह से दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। काम के लिए अच्छे मौके न होने और कम मजदूरी मिलने की वजह से वे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर रहते हैं।
बांकुरा सम्मिलनी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर प्रतिप मुखर्जी ने बताया कि खेथरडांगा के ज्यादातर निवासी शारीरिक श्रम करने वाले मजदूर हैं, जिन्हें कभी-कभी ही काम मिलता है — या तो बांकुरा रेलवे गुड्स शेड में या बांकुरा शहर के बाजारों में। उन्होंने कहा, “काम अनियमित है और परिवारों को अक्सर गुजारा करने में मुश्किल होती है।”
सरकार ने जिम्मेदारी टाल दी
जब ‘द वायर’ ने इस इलाके का दौरा किया, तो महिलाओं ने बताया कि वे सितंबर के आखिरी हफ्ते में अन्नपूर्णा योजना का लाभ न मिलने की शिकायत करने बांकुरा के सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) के पास गई थीं। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से आवेदन किया था, लेकिन उनमें से ज्यादातर को पैसे कभी नहीं मिले।
SDO के ऑफिस में उन्हें बताया गया कि गांधी जयंती (2 अक्टूबर) पर बांकुरा नगरपालिका में ‘सेवा सेतु अभियान’ आयोजित किया जाएगा और यह 4 अक्टूबर तक चलेगा। उन्हें मदद के लिए वहां जाने को कहा गया। ‘सेवा सेतु अभियान’ पश्चिम बंगाल की पिछली सरकारों द्वारा शुरू किया गया एक जन-संपर्क कार्यक्रम है, जिसका मकसद सरकारी योजनाओं के वादों और उनके क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना है।
इसके बाद, खेथरडांगा की महिलाओं का एक बड़ा समूह अपने दस्तावेज लेकर पहले दिन — 2 अक्टूबर को — बांकुरा के गोधुली लॉज में आयोजित ‘सेवा सेतु अभियान’ में पहुंचा। लेकिन यहां भी उन्हें सिर्फ इधर-उधर भटकाया गया। इस बार, उन्हें BJP विधायक दाना से मिलने के लिए कहा गया।
फिर उस समूह की लगभग 30 महिलाएं चार ई-रिक्शा में सवार होकर बांकुरा में भैरवस्थान के पास स्थित दाना के ऑफिस के लिए रवाना हुईं।
‘वादे पूरे करने के बजाय बेइज्जती की गई’
MLA से मिलने गईं महिलाओं में से एक, रेशमा बीबी ने कहा, “हम इस उम्मीद में वहां गए थे कि कोई हमारी समस्या का समाधान करेगा। लेकिन जैसे ही MLA ने हमें देखा, उन्होंने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। हमने उनसे कहा कि ठीक है, लेकिन हमारे अन्नपूर्णा योजना के पैसे का क्या होगा? उन्होंने हमसे कहा कि हिंदू महिलाओं को पहले पैसे मिलने चाहिए और मुस्लिम महिलाओं को बाद में मिलेंगे।”
एक और निवासी, शरीफी बीबी ने आरोप लगाया कि दाना ने उनसे कहा, “हम मुस्लिम वोटों से नहीं जीते हैं, इसलिए आपकी समस्या पर बाद में विचार किया जाएगा।”
नूरजान बीबी ने कहा, “MLA लोगों को हिंदू और मुस्लिम में क्यों बांट रहे हैं? हम वहां वोट या राजनीति पर चर्चा करने नहीं गए थे। हम सरकार द्वारा आयोजित कैंप में इसलिए गए क्योंकि हमें वहां जाने के लिए कहा गया था, और वहां से हमें MLA से मिलने का निर्देश दिया गया।”
नूरजान ने कहा, “हम मदद की उम्मीद में गए थे, लेकिन इसके बजाय हमारी बेइज्जती की गई।”
मदद से इनकार और सांप्रदायिक टिप्पणियां ही इन मुस्लिम महिलाओं की परेशानी का अंत नहीं थीं। उनमें से कई ने कहा कि MLA के साथ आए लोगों ने उनके प्रति अश्लील इशारे किए। उनसे अन्नपूर्णा योजना का लाभ पाने के बदले ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने को कहा गया।
“क्या हम मुस्लिम होने के कारण अन्नपूर्णा योजना के लाभ की हकदार नहीं हैं?”
“हमारी बेइज्जती क्यों की गई?”
“हम चाहते हैं कि जो भी पात्र हैं, उन्हें सरकारी योजना का लाभ मिले।”
जब ‘द वायर’ (The Wire) खेथरडांगा पहुंचा, तो इलाके की महिलाएं यही बातें कह रही थीं।
‘खाना खाने का मन नहीं, लेकिन इस मामले को आगे बढ़ाएंगी’
महिलाओं ने कहा कि वे MLA के दफ्तर से मायूस होकर लौटीं, लेकिन घर पहुंचने पर उन्हें और भी बुरा लगा। उनके साथ हुई घटना की खबर उनके परिवारों और पड़ोसियों तक पहले ही पहुंच चुकी थी। कई महिलाओं ने ‘द वायर’ को बताया कि घर पहुंचने पर उन्हें खाना देखने का भी मन नहीं हुआ — 2 अक्टूबर को सरकारी कैंप में जाने से पहले उन्होंने जो चावल और सब्जी बनाई थी, वह वैसी ही रखी थी।
खुशबू बीबी ने कहा, “हमने सुबह जल्दी खाना बनाया था और निकल गए थे, लेकिन हम यह नहीं भूल सकते कि बांकुरा के MLA ने हमारी कितनी बेइज्जती की। हम खाना नहीं खा पा रहे हैं।” जरीना बीबी, हसीना बीबी, साहेदुन बीबी, आयशा बीबी, फुलसुरा बीबी और कई अन्य महिलाएं सबेना मंडल के घर पर इकट्ठा हुईं और चर्चा की कि वे आगे क्या करेंगी।
महिलाओं ने तय किया है कि वे 6 अक्टूबर को बांकुरा SDO से मिलेंगी और उनसे पूछेंगी कि उन्हें अन्नपूर्णा योजना का पेमेंट क्यों नहीं मिला। साथ ही, वे यह भी पूछेंगी कि क्या MLA को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर उनसे उस तरह बात करने का अधिकार था।
‘द वायर’ ने महिलाओं की शिकायतों पर प्रतिक्रिया जानने के लिए BJP MLA नीलाद्रि शेखर दाना से संपर्क किया। उन्होंने माना कि उन्होंने “जय श्री राम” कहा था, लेकिन अपमानजनक बातें कहने से इनकार किया।
दाना ने कहा, “हां, मैंने ‘जय श्री राम’ कहा था, लेकिन मैंने किसी भी महिला के बारे में कोई अपमानजनक बात नहीं कही। मैंने उनसे कहा कि मामले की जांच की जाएगी। किसने क्या अपमानजनक शब्द कहे, मुझे नहीं पता। मेरे साथ कई लोग थे और उन्होंने क्या कहा होगा, इसकी जिम्मेदारी मैं नहीं लूंगा।”
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