अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव व राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने पीएम के संसदीय क्षेत्र में मीडिया से मुखातिब हो कर उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए. उन्होने कहा कि पीएम बड़े भ्रष्टाचारी हैं. वह करप्शन में करप्शन करते हैं. उनका भ्रष्टाचार छोटा नहीं होता.

उन्होने कहा कि मैनें उनके साथ गुजरात विधानसभा में भी काम किया है, तब मैं वहां प्रतिपक्ष का नेता था. वहां उन्होने सीएम रहते 22 हजार करोड़ का घोटाला किया था. वहां से निकले और पीएम बने तो रक्षा मंत्रालय को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाया क्योंकि उनकी सोच थी कि इसकी पड़ताल नहीं होती. ऐसे में फ्रांस गए और अपने मित्र अनिल अंबानी को तीस हजार करोड़ रुपये का राफेल सौदा दिला दिया.
गोहिल ने कहा कि कांग्रेस के पास राफेल सौदे से संबंधित सारे दस्तावेज हैं. साथ ही उन्होने फ्रांस के जिस मुखिया के साथ सौदा किया उन्होने भी कहा है कि प्रधानमंत्री ने ही ऑप्शन दिया था कि अनिल अंबानी को यह सौदा दिला दिया जाए. फिर खुद अनिल अंबानी ने सौदा हासिल करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा था कि उन्हें तीस हजार करोड़ का राफेल सौदा किया गया है. इतना ही नहीं उन्होने यह भी कहा था कि राफेल सौदे के बाबत एक लाख करोड़ का लाइफ साइकिल सौदा मिल गया है. इसके बाबत उन्होने बकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी.
कांग्रेस नेता गोहिल ने भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी की बातों का जवाब देते हुए कहा कि यूपीए सरकार के मुखिया डॉ. मनमोहन सिंह ने राफेल सौदे को निबटाने के लिए टेक्निकल कमेटी गठित की थी और टेक्निकल कमेटी ने हर एक पहलू पर गौर फरमाते हुए करार किया था. इस मामले में तत्काल प्रधानमंत्री ने खुद कोई फैसला नहीं किया. देश की सुरक्षा का मामला था लिहाजा कोई जल्दबाजी भी नहीं की गई. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सारी कमेटियों को दरकिनार करते हुए सारा निर्णय खुद ही ले लिया. फ्रांस गए और रक्षा उपकरण बनाने वाली सरकारी कंपनी एचएएल को दरकिनार कर अपने मित्र अनिल अंबानी को सौदा दिया दिया. इसके सारे साक्ष्य हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे माना है. उसकी प्रोसीडिंग कांग्रेस के पास है. उन्होने कहा कि ऐसे सौदों में बैंक गारंटी की जरुरत होती लेकिन प्रधानमंत्री ने उसे भी दरकिनार कर दिया.
गोहिल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आधा सच बोलते हैं. सच तो यह है कि वह खुद बड़े भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और अगर उनके सामने कोई सच बोलने की कोशिश करता है तो उसकी नींद उड़ा देते हैं. उनका भ्रष्टाचार सबकी निगाह में नहीं आता.
उन्होने कहा कि वह अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते. उन्होने तो गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल को भी हटाने के लिए कोई कोरकसर नहीं छोड़ी. उनके लूप पोल वह खुद विपक्ष औऱ मीडिया को सौंपते थे.
मध्यप्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री कमलनाथ के यूपी बिहार के लोगों पर दिए बयान पर कहा कि इसकी शुरुआत तो भाजपा ने ही की है.

उन्होने कहा कि मैनें उनके साथ गुजरात विधानसभा में भी काम किया है, तब मैं वहां प्रतिपक्ष का नेता था. वहां उन्होने सीएम रहते 22 हजार करोड़ का घोटाला किया था. वहां से निकले और पीएम बने तो रक्षा मंत्रालय को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाया क्योंकि उनकी सोच थी कि इसकी पड़ताल नहीं होती. ऐसे में फ्रांस गए और अपने मित्र अनिल अंबानी को तीस हजार करोड़ रुपये का राफेल सौदा दिला दिया.
गोहिल ने कहा कि कांग्रेस के पास राफेल सौदे से संबंधित सारे दस्तावेज हैं. साथ ही उन्होने फ्रांस के जिस मुखिया के साथ सौदा किया उन्होने भी कहा है कि प्रधानमंत्री ने ही ऑप्शन दिया था कि अनिल अंबानी को यह सौदा दिला दिया जाए. फिर खुद अनिल अंबानी ने सौदा हासिल करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा था कि उन्हें तीस हजार करोड़ का राफेल सौदा किया गया है. इतना ही नहीं उन्होने यह भी कहा था कि राफेल सौदे के बाबत एक लाख करोड़ का लाइफ साइकिल सौदा मिल गया है. इसके बाबत उन्होने बकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी.
कांग्रेस नेता गोहिल ने भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी की बातों का जवाब देते हुए कहा कि यूपीए सरकार के मुखिया डॉ. मनमोहन सिंह ने राफेल सौदे को निबटाने के लिए टेक्निकल कमेटी गठित की थी और टेक्निकल कमेटी ने हर एक पहलू पर गौर फरमाते हुए करार किया था. इस मामले में तत्काल प्रधानमंत्री ने खुद कोई फैसला नहीं किया. देश की सुरक्षा का मामला था लिहाजा कोई जल्दबाजी भी नहीं की गई. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सारी कमेटियों को दरकिनार करते हुए सारा निर्णय खुद ही ले लिया. फ्रांस गए और रक्षा उपकरण बनाने वाली सरकारी कंपनी एचएएल को दरकिनार कर अपने मित्र अनिल अंबानी को सौदा दिया दिया. इसके सारे साक्ष्य हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे माना है. उसकी प्रोसीडिंग कांग्रेस के पास है. उन्होने कहा कि ऐसे सौदों में बैंक गारंटी की जरुरत होती लेकिन प्रधानमंत्री ने उसे भी दरकिनार कर दिया.
गोहिल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आधा सच बोलते हैं. सच तो यह है कि वह खुद बड़े भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और अगर उनके सामने कोई सच बोलने की कोशिश करता है तो उसकी नींद उड़ा देते हैं. उनका भ्रष्टाचार सबकी निगाह में नहीं आता.
उन्होने कहा कि वह अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते. उन्होने तो गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल को भी हटाने के लिए कोई कोरकसर नहीं छोड़ी. उनके लूप पोल वह खुद विपक्ष औऱ मीडिया को सौंपते थे.
मध्यप्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री कमलनाथ के यूपी बिहार के लोगों पर दिए बयान पर कहा कि इसकी शुरुआत तो भाजपा ने ही की है.