हिंसा

July 25, 2016
(कश्मीर कवरेज पर जारी बहस में नयूज़ चैनलों की दुनिया के दो सबसे चर्चित चेहरों की अलग राय ने पत्रकारिता को लेकर एक पुरानी बहस को नये सिरे से सामने ला दिया है। यह बहस है, अपनी आँख से दिख रहे सच को बताने या सरकार की आँख से दिखाये गये या कूटनीतिक ज़रूरतों के लिहाज़ से बताये जा रहे 'सच' को बताने की। एम्बेडेड जर्नलिज़्म या नत्थी पत्रकारिता का ही नतीजा है कि मेसोपोटामिया जैसी सभ्यता को जन्म...
July 23, 2016
वह जो यूपी का लंपट है, दयाशंकर सिंह, उसका राजनीतिक प्रशिक्षण ABVP में हुआ है. यानी RSS का बगलबच्चा संगठन. सही शिक्षा ली है दयाशंकर ने. तुम कितने दयाशंकर को BJP से निकालोगे, हर शाखा से दयाशंकर निकलेगा!   गुजरात में गौ-आतंकवादियों की गुंडागर्दी के लगभग 200 घंटे बाद RSS ने घटना की निंदा कर दी है…. शुक्रिया महाराज. लेकिन यह नहीं बताया है कि मरी हुई गोमाताओं का अंतिम...
July 23, 2016
प्रिय मोहन भागवत जी, मुझे RSS के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे व्यक्ति से पता चला है कि आप इस बात से दुखी हैं कि लाखों की संख्या में लोग, गुजरात में आपकी मां के मरने, सड़क पर पड़ी होने और लाश सड़ने जैसी बातें लिख रहे हैं. यह सच है कि किसी की भी मां के बारे में ऐसा नहीं लिखा जाना चाहिए. मां और बेटे/बेटी का रिश्ता इस दुनिया की सबसे बड़ी और पवित्र बात है. हालांकि यह बात आपकी मां नहीं, गायों के...
July 22, 2016
तथ्य पड़ताल टीम ने कहा - पुलिस अधिकारी चाहते तो हमलावरों को उना पहुंचने से पहले ही रोक सकते थे। गुजरात के उना में दलित युवकों के साथ जो बर्बरता हुई, उसे पुलिस चाहती तो पूरी तरह रोक सकती थी। इस मामले में सचाई का पता लगाने के लिए स्वतंत्र रिसर्चरों की जो टीम गुजरात गई उसकी रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि पुलिस गाय की खाल निकालने वाले युवकों को घसीट कर उना ले जाने से पहले ही इस हमले को रोक...
July 21, 2016
देश में कुछ स्थानों पर दलितों पर हुए  अत्याचार का मामला संसद में उठा और साथ ही उठा बीजेपी के उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह का बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर दिया गया विवादित बयान। इस मुद्दे पर तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने मुखर होकर अपनी-अपनी बात रखी और दलितों की स्थिति के साथ-साथ उनके उत्थान पर विचार व्यक्त किए। सभी दलों ने सरकार से दलितों पर हो रहे अत्याचार पर तुरंत...
July 21, 2016
Image: PTI गुजरात में दलितों का विद्रोह खास क्यों है? यह इसलिए कि जिस गाय के सहारे आरएसएस-भाजपा अपनी असली राजनीति को खाद-पानी दे रहे थे, वही गाय पहली बार उसके गले की फांस बनी है। बल्कि कहा जा सकता है कि गाय की राजनीति के सहारे आरएसएस-भाजपा ने हिंदू-ध्रुवीकरण का जो खेल खेला था, उसके सामने बाकी तमाम राजनीतिक दल एक तरह से लाचार थे और उसके विरोध का कोई जमीनी तरीका नहीं निकाल पा रहे थे। गुजरात...
July 21, 2016
कुछ बेहद गंभीर सवाल – धर्मशास्त्रों में मरी हुई गाय के निपटान की क्या व्यवस्था है? यह काम किस जाति के हिस्से है? दफनाया जाना है या अग्नि को समर्पित करना चाहिए? वेद, पुराण, गीता… ये ग्रंथ क्या कहते हैं? अंतिम संस्कार के मंत्र क्या हैं? मालिक की उपस्थिति होनी चाहिए या नहीं? श्राद्ध होगा या नहीं? पिंडदान कराना है या नहीं? अस्थि विसर्जन करना पड़ता है या...
July 21, 2016
फर्जी मुठभेड़ों की जांच टीम ने किया खुलासा मामला हो दर्ज मामलाहत्यारी पुलिस के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत एसआईटी से कराने की सिफारिशवाली निगरानी सुप्रीम कोर्ट की जांच की नरसंहार) कंधमाल (गुमुदामाहा                      ...
July 21, 2016
पिछले कई बरसों से हम गुजरात मॉडल , इसके झूठ और अधूरे सच से जुड़ी कहानियां सुन-सुन कर थक चुके हैं। यह बात याद रखना जरूरी है राज्य में 2002 के जघन्य मुस्लिम नरसंहार के  दाग मिटाने के लिए 2007 के बाद इस मॉडल की बिक्री और और मार्केटिंग शुरू हुई। ऐसा नहीं है कि दूसरी सरकारों और राजनीतिक पार्टियों के दौर में सरकार में बैठे बड़े लोग और सत्ता के केंद्र रहे संस्थान अल्पसंख्यक विरोधी पूर्वाग्रह...
July 20, 2016
गाय मरी हुई थी, लेकिन इंसान जिंदा थे। वे मरी गाय की खाल उतार रहे थे, बदले में आपने उनकी खाल खींच ली। आपका कदम पूरी तरह नैतिक था। गाय आपकी माता ठहरी, अपना परलोक सुधारने से लेकर दूसरो को परलोक भेजने तक आप जैसे चाहें उनके नाम का इस्तेमाल करें, आपका जन्मसिद्ध अधिकार है। A Dalit protests in Ahmedabad on Tuesday against attacks on the community. Photo: PTI लेकिन हाय रे दुर्भाग्य! खाल आपने...