भेदभाव
July 1, 2016
हाल ही में बिहार में हुए 'टॉपर्स घोटाला' ने वहां एक बार फिर से कथित भ्रष्टाचार और पिछड़ेपन की जमीन तैयार कर दी। यह कोई पहला मौका नहीं है जब भारत के प्रबुद्ध तबकों के लिए बिहारियों की आलोचना एक प्रिय शगल बना हो। दरअसल, यह एक लगातार प्रक्रिया है जो कालखंड के हिसाब से सिलसिलेवार होती जाती है। अजीब विडंबना है कि भारत में असहिष्णुता बढ़ने का राग अलापने वाले और बिहार की आलोचना करने...
June 30, 2016
Rohith Vemula’s institutional murder has, once again focused on the discrimination and violence against Dalit-Bahujan scholars. in Indian institutions of higher education. The persistent demand for a Rohith Act has echoed in past months; here is the fleshed out version
Dilip Mandal , Consultant Editor of Sabranghindi interviews Supreme Court advocate Nitin Meshram, who is drafting a...
June 19, 2016
भारतीय राजनीति विशेषकर उत्तर भारत में दंगों और वोट का बहुत गहरा सम्बन्ध रहा है. कवि गोरख पांडे की लाईनें “इस बार दंगा बहुत बड़ा था, खूब हुई थी खून की बारिश,अगले साल अच्छी होगी, फसल मतदान की” आज भी हकीकत है और कई बार तो लगता है कि हम इस दलदल में और गहरे तक धंस चुके हैं.आपसी रंजिशों की खायी चौड़ी करके,डर व अफवाह फैलाकर लामबंदी करने के इस खेल में...
June 15, 2016
सुबह के दस बजे हैं. शामली जिले के कैराना में पत्रकारों का आना जारी है. दिल्ली से लगभग दो सौ किलोमीटर दूर बसे उत्तर प्रदेश के इस कस्बे में आज कई राष्ट्रीय चैनलों की ओबी वैन नज़र आ रही हैं. ये तमाम चैनल भाजपा नेता और कैराना से सांसद हुकुम सिंह के बयान को जांचने के लिए यहां पहुंच रहे हैं. हुकुम सिंह ने हाल ही में बयान दिया है कि कैराना में बढ़ती मुस्लिम आबादी और उसकी दबंगई के चलते यहां के हिंदू परिवार...
June 15, 2016
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(‘पहल’ के आगामी अंक हेतु )
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June 14, 2016
An interview with Lawrence Liang
Is free speech protected under all circumstances; does an elected government have the right (or indeed duty) to accuse citizens of sedition? In this detailed discussion with Rishab Bailey, legal director of the Society for Knowledge Commons, lawyer and legal researcher Lawrence Liang of the Alternative Law Forum discusses the history of free speech, sedition...
June 14, 2016
अप्रैल की उमस और नमी से भरी हुई गर्मी के बाद लोग मानसून के मजे का इंतजार करते हैं। सोशल मीडिया पर पहले ही 'मुंबई रैन्स' नाम से हैशटैग चल रहे थे और यही ट्रेंड कर रहा था, लोग सुहाने वाली शानदार लफ्जों और तस्वीरों के साथ मौजूद थे।
लेकिन वे लोग कौन हैं जो बरसात का इंतजार नहीं करते हैं? यह गांव के इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए वरदान है। जिस मुंबई में चौहत्तर लाख से ज्यादा लोग हर रोज...
June 14, 2016
Home Page Image: Indian Express
साक्षी महाराज या साध्वी प्राची जैसे नफरत की आग उगलने वाले लोगों की बेलगाम बातों को अब तक भाजपा उनकी व्यक्तिगत राय बता कर दिखने के लिए खुद को दूर करती रही है। हालांकि अब सब जानते हैं कि ये बेलगाम हिंसक बयान किस राजनीति का हिस्सा हैं, लेकिन अब वह परदा भी उठ रहा है।
भाजपा के सांसद हुकुम सिंह की ओर से उठाए गए मुद्दे के बाद बाकायदा भाजपा अध्यक्ष की हैसियत से...
June 14, 2016
मध्ययुगीन भारत के कई मंदिरों की मूर्तिकला उस समय को परिलक्षित करती है जब कामोत्तेजक प्यार का उन्मुक्त और सार्वजनिक चित्रण शर्म और आलोचना का विषय नहीं था। नरेंद्र मोदी एक बार फिर जॉर्ज बुश की तरह हरकत करते नजर आए, लेकिन इस बार संदर्भ कोणार्क का ऐतिहासिक सूर्यमंदिर था।
यों शिक्षाविदों की जमात भारतीय मंदिरों की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियों के पीछे की प्रेरणा को समझने के लिए जूझ रही है, ऐसा लगता...
June 14, 2016
Image: Orijit Sen
पैंतीस साल से ज्यादा उम्र वाले हर भारतीय को दूरदर्शन पर आनेवाला वह विज्ञापन ज़रूर याद होगा। विज्ञापन नहाने के साबुन ओके का था, जिसकी शुरुआत एक जिंगल से होती थी---
जो ओके साबुन से नहाये, कमल सा खिल जाये
ओके नहाने का बड़ा साबुन
इस जिंगल के बोल पर एक चड्डीधारी नौजवान झूम-झूमकर साबुन मलता था। नहा-धोकर तृप्त हो जाने के बाद वह अनाम मॉडल हाथ में साबुन लिये गर्व...