केरल की पहली ट्रांसजेंडर पीएचडी छात्रा समेत 16 विद्यार्थी निलंबित: खराब स्ट्रीटलाइट के खिलाफ अनोखे विरोध प्रदर्शन से संस्कृत विश्वविद्यालय में कैसे बढ़ा विवाद?

Written by sabrang india | Published on: November 5, 2026
इस विरोध प्रदर्शन की थीम 'स्ट्रीटलाइट का अंतिम संस्कार' रखी गई थी। इसके तहत छात्रों ने खराब पड़ी एक स्ट्रीटलाइट को प्रतीकात्मक रूप से शव के तौर पर प्रस्तुत किया। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।


फोटो साभार : द मूकनायक

केरल स्थित श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की कमी के विरोध में नाटकीय प्रदर्शन करने वाले 16 छात्रों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित छात्रों में 6 रिसर्च स्कॉलर और केरल की पहली ट्रांसजेंडर पीएचडी छात्रा रितीशा भी शामिल हैं।

केरल हाईकोर्ट से 4 नवंबर को शुरू हो रही परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं मिलने के बाद छात्रों ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और याचिका दायर की है।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, केरल हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने छात्रों को राहत देते हुए परीक्षा फीस जमा करने और अस्थायी रूप से परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी थी। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन और वीसी ने इस फैसले को चुनौती दी, जिसके बाद 3 नवंबर को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को पलट दिया और उपस्थिति की कमी तथा अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने इस कार्रवाई को "विच-हंट", यानी छात्रों को निशाना बनाने की साजिश, करार दिया है और पूरे देश के विश्वविद्यालयों में एकजुटता प्रदर्शन का आह्वान किया है।

SFI के अध्यक्ष आदर्श एम. सजी और महासचिव श्रीजन भट्टाचार्य ने बताया कि विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था।

इसी दौरान थिएटर विभाग के छात्रों ने अपने विभाग में खराब लाइटिंग व्यवस्था के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध जताया। इस प्रदर्शन की थीम 'स्ट्रीटलाइट का अंतिम संस्कार' रखी गई थी, जिसमें खराब पड़ी एक स्ट्रीटलाइट को मृत शरीर के रूप में दर्शाया गया।

छात्रों के इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।

SFI का आरोप है कि इसके बाद अंतरिम वाइस चांसलर सीजा थॉमस ने छात्रों की इस रचनात्मक अभिव्यक्ति को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया और इसे "उनके लिए अंतिम संस्कार करने की कोशिश" बताया। इसी के आधार पर छात्रों को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए।

निलंबित किए गए छात्रों में विश्वविद्यालय के सबसे मेधावी और कलात्मक रूप से सक्षम छात्र शामिल हैं:

 रितीशा: केरल की पहली ट्रांसजेंडर छात्रा, जो पीएचडी कर रही हैं और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) प्राप्त कर चुकी हैं।
 अरुणिमा: संस्कृत यूनिवर्सिटी कलोत्सव में "कला तारका" की विजेता।
 श्यामजीत: इंटर-यूनिवर्सिटी नेशनल यूथ फेस्टिवल की माइम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
 शिवा और जिश्नु: नाटक "पराची" के क्रमशः निर्देशक और अभिनेता, जिसने नेशनल इंटर-यूनिवर्सिटी यूथ फेस्टिवल में पहला स्थान जीता था।

SFI के अनुसार, अन्य निलंबित छात्र भी अपने-अपने शैक्षणिक और कलात्मक क्षेत्रों में बेहद मेधावी हैं।

SFI ने उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन की भी आलोचना की। मंत्री ने कुलपति का समर्थन करते हुए छात्रों के रचनात्मक विरोध प्रदर्शन को 'आदिम' करार दिया था। इस पर SFI ने कहा कि संबंधित विश्वविद्यालय मंत्री के ही विधानसभा क्षेत्र में स्थित है। संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि जॉन इससे पहले कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं।

SFI का आरोप है कि UDF सरकार के निर्देश पर राज्य पुलिस ने वाइस चांसलर द्वारा निशाना बनाए गए छात्रों को पकड़ना शुरू कर दिया और कई छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। संगठन ने इसे "संघ परिवार समर्थित प्रशासन द्वारा कांग्रेस नीत राज्य सरकार के समर्थन से छात्र प्रतिरोध को कुचलने की राजनीतिक साजिश" बताया।

इसके अलावा, SFI ने आरोप लगाया कि एर्नाकुलम के महाराजा कॉलेज में भी कई छात्रों को निलंबित कर दिया गया। संगठन के मुताबिक, इन छात्रों ने कॉलेज परिसर में उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन के एक कार्यक्रम के दौरान श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय (SSUS) में हुई घटना को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से सवाल उठाए थे।

SFI ने सभी निलंबित छात्रों का निलंबन तत्काल वापस लेने और अंतरिम कुलपति सीजा थॉमस को पद से हटाने की मांग की है। संगठन ने सीजा थॉमस को 'संघ परिवार का एजेंट' करार दिया है।

इसके साथ ही SFI ने सभी प्रगतिशील छात्रों, लोकतांत्रिक संगठनों और आम जनता से छात्र अधिकारों पर हो रहे इस कथित हमले के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है। संगठन ने देशभर के विश्वविद्यालयों में एकजुटता प्रदर्शनों का आह्वान भी किया है।

केरल हाईकोर्ट में क्या हुआ?

मंगलवार को केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें विश्वविद्यालय को छात्रों की परीक्षा फीस स्वीकार करने और उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्णा एस. की पीठ ने विश्वविद्यालय और कुलपति की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि सिंगल जज ने अंतरिम आदेश जारी करके गलती की थी।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि छात्रों द्वारा उपस्थिति की कमी माफ कराने के लिए आवेदन दिए बिना ही सिंगल जज ने उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी थी। इसके अलावा, छात्रों ने विश्वविद्यालय की अधिसूचना में निर्धारित प्रक्रिया के तहत भी आवेदन नहीं किया था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिसूचना के मुताबिक ऐसे आवेदन संबंधित विभागाध्यक्ष या केंद्र निदेशक के माध्यम से भेजे जाने चाहिए। आवेदनों के साथ उपस्थिति प्रमाणपत्र, प्रगति रिपोर्ट, परीक्षा शुल्क जमा करने का प्रमाण और अन्य आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना भी अनिवार्य है।

बेंच ने कहा, "ऐसा अंतरिम आदेश देकर सिंगल जज ने विश्वविद्यालय को नियमों के खिलाफ काम करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानून के अनुसार, ऐसा करना कानूनी रूप से मान्य नहीं है।" कोर्ट ने यह भी गौर किया कि सिंगल जज ने विश्वविद्यालय का पक्ष सुने बिना ही यह आदेश पारित कर दिया था। प्रभावित छात्रों ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

विवाद की शुरुआत

अगस्त महीने में SFI के नेतृत्व में छात्रों ने विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की कमी, पेयजल संकट, शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने और थिएटर विभाग में खराब लाइटिंग व्यवस्था सहित कुल 18 मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। 13 अगस्त को सिंडिकेट की बैठक के दौरान छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया।

इस प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने ‘The Light Is Dead’ (लाइट मर गई है) नामक एक प्रतीकात्मक नाटक किया, जिसे लेकर दोनों पक्षों के दावे पूरी तरह अलग हैं:

थिएटर विभाग के छात्रों के मुताबिक, उन्होंने लंबे समय से खराब पड़ी लाइटिंग व्यवस्था और स्ट्रीटलाइट्स की समस्या की ओर विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान छात्रों ने खराब लाइटों को प्रतीकात्मक रूप से 'शव' के तौर पर पेश किया और उनकी मॉक फ्यूनरल (शवयात्रा) निकाली।

अंतरिम वाइस चांसलर डॉ. सीजा थॉमस ने आरोप लगाया कि छात्रों ने जानबूझकर उनकी अर्थी (मॉक क्रिमेशन) निकाली और ईसाई अंतिम संस्कार की रीतियों का मजाक उड़ाते हुए उनके खिलाफ नारे लगाए। वीसी ने यह भी शिकायत की कि छात्रों ने उनके साथ हाथापाई की, उनका रास्ता रोका और उनकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाया।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस प्रदर्शन को अनुशासनहीनता और कुलपति पर हमले के रूप में देखते हुए मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी। इसके बाद 16 छात्रों को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया गया। वहीं, पुलिस ने चार छात्र नेताओं को गिरफ्तार भी किया था।

प्रशासन ने छात्रों के इस दावे को भी खारिज किया कि लाइटें हाल ही में खराब हुई थीं। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, ये लाइटें वर्ष 2018 में आई बाढ़ के दौरान खराब हो गई थीं।

विश्वविद्यालय की सिंडिकेट कमेटी ने 12 छात्रों का निलंबन वापस लेने के लिए उनसे बिना शर्त लिखित माफी मांगने को कहा है। हालांकि, SFI और प्रदर्शनकारी छात्रों ने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है।

छात्रों का कहना है कि केवल एक नाटक के जरिए विरोध जताने और अपनी जायज मांगें उठाने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। इस बीच, छात्र विश्वविद्यालय परिसर में भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।

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