मध्य प्रदेश: सपा बसपा के साथ मिलकर लड़ती कांग्रेस तो बीजेपी का हो जाता सूपड़ा साफ

Written by Sabrangindia Staff | Published on: December 13, 2018
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस की टक्कर रही है। बीजेपी को 109 और कांग्रेस को 114 सीटों पर जीत मिली है। इसके अलावा सपा को एक और बसपा को दो सीटें मिली हैं। लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह से सपा बसपा और कांग्रेस तमाम विपक्षी दलों के महागठबंधन की बात कही जा रही थी वह विधानसभा चुनाव में नजर ऩहीं आया। अगर सपा बसपा और कांग्रेस साथ मिलकर लड़तीं तो स्थिति कुछ और ही होती। 

अगर कांग्रेस ने सपा, बसपा और गोंगपा से गठबंधन कर लिया होता तो वह बीजेपी को आसानी से हरा सकती थी। इन दलों ने खुद तो अच्छा परफॉर्म नहीं किया लेकिन कांग्रेस को नुकसान जरूर पहुंचाया। अनुमान के मुताबिक कांग्रेस अगर इन पार्टियां के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरती तो बीजेपी 50 सीटों तक सिमट सकती थी। अगर आगामी लोकसभा चुनाव में यही गलती यूपी में दोहराई तो बीजेपी को संजीवनी मिल सकती है।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 109 और कांग्रेस को 114 सीटों पर जीत मिली है। वहीं सपा एक सीट तो बसपा को दो सीट हाथ लगी है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) एक भी सीट नहीं जीत सकी। सपा, बसपा और गोंगपा का खुद का प्रदर्शन तो ठीक नहीं रहा, लेकिन उन्होंने कई सीटों पर बीजेपी को फायदा पहुंचाया। मध्य प्रदेश में कई ऐसी सीटें रहीं जहां काफी टक्कर का मुकाबला था। इन सीटों पर जीत का अंतर 5 हजार से 100 वोटों तक रहा।

मसलन अमरपाटन सीट पर बीजेपी के पम्खेलावान पटेल ने कांग्रेस के दादा भाई को महज 3747 वोटों से हराया। इस सीट पर बसपा उम्मीदवार छंगेलाल कोल को 37918 वोट मिले। वहीं गोंगपा के संतोष कुमार गुप्ता को 750 वोट मिले। अगर कांग्रेस का बसपा से गठबंधन होता तो यह सीट न केवल उसकी झोली में जाती बल्कि जीत अंतर भी बड़ा होता। आमला सीट पर भी यही हाल रहा। यहां बसपा और गोंगपा उम्मीदवार को कुल 18743 वोट हासिल किए। इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर लगभग इतने ही वोटों का था।

इसी तरह यूपी से सटे जिलों में सपा और बसपा ने अच्छे वोट हासिल किये। सपा करीब चार सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। इसी तरह बसपा ने भी कई सीटों पर सम्मानजनक वोट हासिल कर कांग्रेस का खेल बिगाड़ा। वोट प्रतिशत की बात करें तो बसपा को 1911642 वोट के साथ 5 फीसदी वोट प्राप्त हुए। सपा को 496025 मत हासिल हुआ और उसका वोट शेयर 1।3 फीसदी रहा। गोंगपा एक भी सीट नहीं जीत पाई लेकिन उसे 675648 मत मिले। पार्टी का वोट शेयर 1।8 फीसदी रहा। जबकि 114 सीट के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी कांग्रेस को 40।9 प्रतिशत वोट मिले। बीजेपी को 41 फीसदी वोट प्राप्त हुए। अगर सपा, बसपा और गोंगपा का वोट शेयर कांग्रेस के साथ जाता तो स्थिति पलट सकती थी।

4337 वोट और मिल जाते तो चौथी बार सीएम बन जाते शिवराज सिंह
सपा बसपा और कांग्रेस का गठबंधन न होने से एक औऱ स्थिती बन रही थी। शिवराज सिंह चौहान चौथी बार सीएम बनने से मात्र कुछ हजार वोटों से चूके हैं। अगर बीजेपी को 4337 वोट मिल जाते तो ये 7 सीटें भी बीजेपी के खाते में जुड़ जातीं और बहुमत (116) का आंकड़ा पार कर जाती। 

चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो बीजेपी सिर्फ 4337 वोट से ही पीछे रह गई। जिन 7 सीटों पर बीजेपी को नुकसान हुआ, वहां हार का अंतर 1000 वोटों से भी कम है। मध्य प्रदेश चुनाव में बहुमत के लिए 116 सीटें चाहिए थीं जबकि बीजेपी ने जीती 109। चुनाव आयोग के अनुसार, मध्य प्रदेश में 10 सीटें ऐसी थीं जहां जीत का अंतर हजार से भी कम था। इनमें कांग्रेस के हाथ आई 7, जबकि बीजेपी को 3 सीटें मिली। 

सीट----------- वोट मार्जिन----- विजेता
ग्वालियर दक्षिण- -----121-------कांग्रेस 
सुवासरा ---------- 350-------कांग्रेस 
जबलपुर उत्तर------- 578 -------कांग्रेस 
राजनगर----------- 732 -------कांग्रेस 
दमोह------------ 798 -------कांग्रेस 
ब्यावरा------------ 826-------कांग्रेस 
राजपुर (एसटी) -------932------- कांग्रेस 
बीना-------------- 632 ------बीजेपी 
जावरा ------------ 511------- बीजेपी 
कोलारस------------ 720 ------ बीजेपी 

कुल मिलाकर अगर बीजेपी को 4337 वोट अधिक मिले होते तो बीजेपी इन 7 सीटों पर जीतने में कामयाब हो सकती थी। इन 7 सीटों में सबसे कम अंतर ग्वालियर दक्षिण सीट पर रहा जहां कांग्रेस के उम्मीदवार प्रवीण पाठक ने बीजेपी के नारायण सिंह कुशवाहा को सिर्फ 121 वोटों से हराया। वहीं मालवा क्षेत्र के मंदसौर जिले के सुवासरा सीट पर कांग्रेस के दंग हरदीप सिंह ने बीजेपी के राधेश्याम नानालाल पाटीदार को 350 वोटों से हराया।  

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